रंभा तृतीया व्रत 17 जून बुधवार को, जानें शुभ मुहूर्त, नक्षत्र और राहुकाल की पूरी जानकारी

17 जून 2026, बुधवार को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर रंभा तृतीया का व्रत रखा जाएगा। जानिए इस दिन का पंचांग, शुभ मुहूर्त, नक्षत्र, राहुकाल और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।

17 June 2026 Ka Panchang: 17 जून को शुद्ध ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है और दिन बुधवार है। यह तृतीया तिथि बुधवार रात 9 बजकर 39 मिनट तक बनी रहेगी। इसी दिन रात 8 बजकर 51 मिनट तक ध्रुव योग का संयोग रहेगा, जबकि दोपहर 1 बजकर 37 मिनट तक पुनर्वसु नक्षत्र प्रभावी रहेगा। 17 जून को रंभा तृतीया का व्रत किया जाएगा। इसके साथ ही बुधवार के दिन महाराणा प्रताप की जयंती भी मनाई जाएगी। आइए जानते हैं बुधवार का पंचांग, राहुकाल, शुभ मुहूर्त तथा सूर्योदय और सूर्यास्त का समय।

17 जून 2026 का पंचांग

  • शुद्ध ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि- 17 जून 2026 को रात 9 बजकर 39 मिनट तक
  • ध्रुव योग- 17 जून 2026 को रात 8 बजकर 51 मिनट तक
  • पुनर्वसु नक्षत्र- 17 जून 2026 दोपहर 1 बजकर 37 मिनट तक
  • 17 जून 2026 विशेष- रंभा तृतीया

17 जून 2026 का शुभ समय

  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:35 ए एम से 05:18 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त- कोई नहीं
  • विजय मुहूर्त- 02:52 पी एम से 03:45 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त- 07:17 पी एम से 07:38 पी एम
  • अमृत काल- 11:28 ए एम से 12:54 पी एम

राहुकाल का समय

  • दिल्ली- दोपहर 12:22 - 02:07 PM
  • मुंबई- दोपहर 12:40 - 02:19 PM
  • चंडीगढ़- दोपहर 12:24 - 02:10 PM
  • लखनऊ- दोपहर 12:07 - 01:51 PM
  • भोपाल- दोपहर 12:21 - 02:03 PM
  • कोलकाता- दोपहर पहले 11:37 - 01:19 PM
  • अहमदाबाद- दोपहर 12:40 - 02:22 PM
  • चेन्नई- दोपहर 12:10 - 01:46 PM

सूर्योदय-सूर्यास्त का समय

  • सूर्योदय- सुबह 05:22 बजे
  • सूर्यास्त- शाम 07:20 बजे

रंभा तृतीया व्रत का महत्व

ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की तीसरी तिथि पर रंभा तृतीया व्रत रखे जाने की परंपरा है, जिसे रंभा तीज के नाम से भी पुकारा जाता है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले 14 रत्नों में से एक रंभा भी थीं, जिन्हें अत्यंत सुंदर बताया गया है। इस दिन कई साधक रंभा के नाम से साधना करके सम्मोहन की शक्तियां अर्जित करते हैं। ऐसा माना जाता है कि रंभा अप्सरा की सिद्धि प्राप्त होने पर वे साधक के जीवन में एक छाया की तरह सदा साथ रहती हैं और उसकी प्रत्येक इच्छा को पूर्ण करती हैं। इससे साधक में किसी को भी सम्मोहित व आकर्षित करने की क्षमता आ जाती है और उसका जीवन प्रेम तथा खुशियों से भर जाता है।

यह साधना 9 दिनों की होती है और इसे रात के समय करना उचित माना जाता है। इसकी शुरुआत पूर्णिमा, अमावस्या या शुक्रवार के दिन भी की जा सकती है। हालांकि साल में एक बार आने वाली रंभा तृतीया, जो ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि होती है, उस दिन यह साधना करने से विशेष फल मिलता है और सिद्धि प्राप्त होने की संभावना बढ़ जाती है।

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