खेती में किसानों को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने का रास्ता अब केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं रह गया है। सब्जी की खेती भी किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत कर रही है। खरीफ सीजन को देखते हुए पूरे मध्य प्रदेश में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। कोई किसान कमर्शियल फसल के लिए अपने खेत तैयार कर रहा है तो कोई सब्जी की खेती की ओर बढ़ रहा है।
सब्जी से अधिक से अधिक उत्पादन लेने के लिए कृषि वैज्ञानिक किसानों को नई-नई तकनीकें अपनाने की सलाह दे रहे हैं। जिन किसानों ने इन तकनीकों को अपनाया है, उन्हें इसका सीधा फायदा मिल रहा है और वे एक-एक एकड़ की खेती से सीजन में दो से 4 लाख रुपये तक का मुनाफा कमा रहे हैं। मिर्च की खेती में भी स्मार्ट तरीका अपनाकर मेहनती किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं।
बेड और ड्रिप मल्चिंग सबसे असरदार तकनीक
सागर जिले की रहली में पदस्थ वरिष्ठ उद्यानिकी अधिकारी विदेश प्रजापति बताते हैं कि सब्जी की खेती में बेड बनाकर ड्रिप मल्चिंग के जरिए फसल से उत्पादन लेना सबसे प्रभावी तकनीक है। इसके लिए किसान अपने खेतों में रोटावेटर चलाकर बेड तैयार करें, फिर उस पर ड्रिप लगाकर मल्चिंग बिछा दें और खेत को खाली छोड़ दें।
जैसे ही मानसूनी बारिश शुरू होती है और बीच में गैप मिलता है, तो किसान 10 जुलाई तक इनमें प्लांटेशन कर सकते हैं।
बीज की क्वालिटी सबसे अहम
विदेश प्रजापति आगे बताते हैं कि किसी भी फसल में बीज की क्वालिटी सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। जो किसान मिर्च लगाना चाहते हैं, उनके लिए बाजार में अलग-अलग कंपनियों की हाइब्रिड किस्म के बीज उपलब्ध हैं, इसलिए हमेशा अच्छी से अच्छी क्वालिटी का बीज ही खरीदें।
यदि कोई 1 एकड़ में मिर्च की खेती करना चाहता है तो उसे 40 से 50 ग्राम बीज की नर्सरी तैयार करनी चाहिए। जिस तरह टमाटर का प्लांटेशन जुलाई में होता है, उसी तरह मिर्च को भी जुलाई के पहले पखवाड़े में लगाया जा सकता है।
एक एकड़ में कितना उत्पादन
एक एकड़ में हाइब्रिड मिर्च का उत्पादन लगभग 200 से लेकर ढाई सौ क्विंटल तक होता है। यदि सब कुछ सही रहे, अच्छी तैयारी हो, समय पर फर्टिलाइजर दिया जाए और वायरस का अटैक न हो, तो किसान 400 क्विंटल तक का उत्पादन ले सकते हैं। कई किसानों ने ऐसा करके दिखाया भी है।
वायरस सबसे बड़ी समस्या
मिर्च की खेती में सबसे बड़ी समस्या वायरस की आती है, इसके अलावा कोई बड़ी दिक्कत नहीं होती। जो लिपिकल वायरस आता है, उसे स्थानीय भाषा में चुर्रा-मुर्रा रोग कहा जाता है। एक बार यह अटैक हो जाए तो इसे कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है।
इससे बचाव के लिए शुरुआत में ही बेसल डोज देते समय ऐसा सकिंग पेस्ट डालना चाहिए जिससे कीड़ों को नियंत्रित किया जा सके। बेसल डोज में ऐसी दवा मिलाएं जिससे कीड़ों के अंडे भी नष्ट हो जाएं।
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