CBSE को IRCTC से सीखनी चाहिए पोर्टल चलाने की कला: रजत शर्मा का नज़रिया

OSM सिस्टम के टेंडर और री-इवैल्यूएशन पोर्टल में गड़बड़ी के बाद सरकार ने CBSE के अध्यक्ष और सचिव को हटाया, साथ ही बंगाल में ममता बनर्जी की पकड़ कमज़ोर होने और यूपी में योगी आदित्यनाथ के तेज़ अभियान पर एक नज़र।

CBSE पर सरकार का बड़ा कदम

सरकार ने CBSE के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। बोर्ड के अध्यक्ष राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता को उनके पदों से हटा दिया गया है। OSM सिस्टम की टेंडर प्रक्रिया की पड़ताल के लिए एक कमेटी गठित कर दी गई है, जबकि प्रशांत लोखंडे और वरुण भारद्वाज को नया सचिव नियुक्त किया गया है। अब इस पूरे मामले की जांच होगी कि आखिर OSM सिस्टम को लागू करने का फैसला इतनी हड़बड़ी में क्यों लिया गया और यह फैसला किसने किया।

सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या किसी खास कंपनी को फायदा पहुंचाने की नीयत से टेंडर की शर्तें बदली गईं। जिस कंपनी को ठेका मिला, क्या उसकी पृष्ठभूमि की ठीक से पड़ताल की गई थी? और अगर उस कंपनी के विरुद्ध पहले से शिकायतें दर्ज थीं, तो फिर इतनी विशाल बोर्ड परीक्षा का काम उसे क्यों सौंपा गया?

इन तमाम सवालों के जवाब कमेटी तलाशेगी और एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। CBSE के चेयरमैन और सचिव का हटाया जाना एक सही कदम है। दरअसल इनकी पारी तो तीन-चार दिन पहले ही खत्म हो चुकी थी, लेकिन अगर इन्हें पहले हटा दिया जाता तो आज संसदीय कमेटी में तीखे सवालों का सामना कौन करता? यही वजह रही कि बैठक खत्म होते ही आदेश जारी कर दिया गया, क्योंकि CBSE ने गलतियों में कोई कमी नहीं छोड़ी थी। हड़बड़ी में OSM लागू किया गया, खराब रिकॉर्ड वाली कंपनी को ठेका दिया गया और कॉन्ट्रैक्ट के SOP तक बदल डाले गए। अब जांच में ही साफ होगा कि इसमें किसने कितनी रकम का खेल किया।

री-इवैल्यूएशन में गड़बड़ी कैसे टल सकती थी

री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया में आई दिक्कतों की बात करें तो CBSE का काम उतना पेचीदा नहीं था, जितना शोर इस पर मचाया गया। चार लाख छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपी पाने के लिए आवेदन किया था। करीब 11 लाख 32 हजार आंसर शीट्स की मांग की गई, क्योंकि स्कैन की हुई कॉपी मिलने के बाद ही छात्र री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह सारा काम बिना किसी तकनीकी अड़चन के पूरा हो सकता था। अगर CBSE ने शुरुआत में ही सभी पैरामीटर्स की जांच कर ली होती, तो पोर्टल बार-बार हैंग नहीं होता।

तुलना के लिए देखें तो IRCTC की वेबसाइट हर दिन औसतन चार से पांच करोड़ विज़िट्स संभालती है। यह एक साथ 3 लाख यूज़र्स को मैनेज करती है और हर मिनट 32 हजार टिकट प्रोसेस करती है। अगर CBSE अपने री-इवैल्यूएशन पोर्टल के लिए IRCTC के तजुर्बे से कुछ सीख लेता, तो इस तरह की कोई मुश्किल पेश ही नहीं आती।

ममता का किला ढहता हुआ

ममता बनर्जी को भी अब इस हकीकत का अहसास हो चुका है कि उनके ज़्यादातर विधायक साथ छोड़ने की तैयारी में हैं। बुधवार को 58 विधायकों के हस्ताक्षर वाला एक पत्र विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा गया, जिसमें ऋतब्रत बनर्जी को प्रतिपक्ष का नेता घोषित करने की मांग रखी गई। दिलचस्प यह है कि ममता बनर्जी ने दो दिन पहले ही ऋतब्रत को पार्टी से बाहर कर दिया था। मंगलवार को जब ममता कोलकाता के धर्मतल्ला में धरने पर बैठीं, तो उनके साथ महज़ 6 विधायक और 5 सांसद ही मौजूद रहे। दो विधायकों को निकाले जाने के बाद इस समय उनकी पार्टी में 78 विधायक और 42 सांसद बचे हैं। आज यह साफ दिखाई दिया कि ममता बनर्जी कितनी बेबस हो चुकी हैं। कल तक जो सांसद और विधायक उनसे खौफ खाते थे, आज ममता खुद उनके भाग निकलने के डर में जी रही हैं।

कल तक INDIA ब्लॉक के जो नेता ममता के सामने सिर झुकाया करते थे, अब वही उनका फोन तक नहीं उठा रहे। बंगाल में सेक्युलरिज्म के नाम पर ममता ने हिंदू-विरोधी राजनीति की जो दीवार खड़ी की थी, वह अब भरभराकर गिर चुकी है और उसकी जगह हिंदू स्वाभिमान ने ले ली है। अब कोई 'जय श्रीराम' का नारा लगाने से नहीं हिचकता। सत्ता का समीकरण बदलने के बाद पहली बार यह उजागर हो रहा है कि बंगाल में किस हद तक डर का माहौल बना हुआ था। हवा बदलते ही चारों ओर लोगों के भीतर तृणमूल नेताओं के प्रति नाराज़गी साफ झलकने लगी है। ममता के लिए अब अपनी पार्टी को बचाए रखना बेहद कठिन साबित होने वाला है।

यूपी में योगी का चुनावी अभियान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दस साल पहले प्रदेश में बम और कट्टों की फैक्ट्रियां चलती थीं, जबकि आज यहां ब्रह्मोस मिसाइल बन रही है। उन्होंने कहा कि पहले यूपी में मच्छर बीमारियां फैलाते थे और माफिया खौफ का कारोबार करते थे, मगर नौ साल में मच्छर भी खत्म हो गए और माफिया भी अपने अंजाम तक पहुंच गए। योगी ने यह बात कुशीनगर में कही, लेकिन इसका असर पूरे प्रदेश में देखा जा रहा है। संभल में 48 साल बाद एक दंगा पीड़ित परिवार को फिर से बसाया गया है। 1978 के दंगे में कई हिंदू परिवार अपना घर छोड़कर भाग गए थे और उनकी संपत्तियों पर कब्ज़ा कर लिया गया था। उसी दंगे में रामशरण रस्तोगी की उनके परिवार के सामने चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई थी और शव को उनकी दुकान के सामने मौजूद कुएं में फेंक दिया गया था।

इस भयावह घटना के बाद डरा-सहमा परिवार संभल छोड़कर दिल्ली में जा बसा और उनके घर तथा दुकान पर कब्ज़ा हो गया। रामशरण के पोते ने अपनी मां और दादी के साथ योगी से मुलाकात कर परिवार की पूरी दास्तां सुनाई। योगी के निर्देश पर DM ने जांच कराई तो सामने आया कि जिस ज़मीन पर टीले वाली मस्जिद बनी है, उसके आसपास कब्रिस्तान बना हुआ है और वह सारी ज़मीन सरकारी है। प्रशासन ने यह भूमि खाली करवाई और इसका एक हिस्सा रामशरण के परिवार को सौंप दिया। संभल के डीएम बुधवार को इस ज़मीन के कागज़ात दंगा पीड़ित परिवार को सौंपेंगे और प्रशासन की निगरानी में इस ज़मीन पर घर बनेगा।

इसी तरह गाजियाबाद में योगी के आदेश पर प्रशासन ने चंचल नाम की एक बुजुर्ग महिला को सिर्फ 48 घंटे के भीतर उनका घर वापस दिला दिया। 70 साल की चंचल के घर पर ताज मोहम्मद नाम के प्रॉपर्टी डीलर ने कब्ज़ा कर लिया था। चंचल ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाई थी। इस बुजुर्ग महिला ने अपने पति के इलाज के लिए ताज मोहम्मद से डेढ़ लाख रुपये उधार लिए थे, मगर पति की मौत हो गई। ताज मोहम्मद ने चार महीने में ब्याज जोड़कर डेढ़ लाख की रकम को सात लाख तक पहुंचा दिया। जब बुजुर्ग महिला इतनी बड़ी रकम नहीं चुका सकी, तो उसने उन्हें घर से बेदखल कर मकान पर कब्ज़ा जमा लिया और वह मकान पड़ोस में रहने वाले मोमिन को बेच दिया।

सोमवार को डीएम खुद मौके पर पहुंचे, अवैध कब्ज़ा हटवाकर तुरंत मकान की चाबियां चंचल को सौंपीं और भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजने का आदेश दिया। योगी आदित्यनाथ ने सरकारी व्यवस्था के प्रति आम लोगों के मन में जो भरोसा जगाया है, वह उनकी बड़ी उपलब्धि है। जनता का यही विश्वास योगी की सबसे बड़ी ताकत है और शायद इसीलिए वे पूरे जोश में नज़र आते हैं। यूपी में चुनाव अभी दूर है, फिर भी ऐसा लगता है कि योगी ने पूरी ताकत से प्रचार शुरू कर दिया है और हर दिन वे किसी अलग ज़िले में दिखाई देते हैं।

योगी का एजेंडा बिल्कुल स्पष्ट है। उन्होंने प्रदेश में माफियाओं के दिल में कानून का खौफ बैठाया है, बहन-बेटियां खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं और उद्योगपति यूपी में पूंजी लगाने लगे हैं। इसके साथ ही योगी का एक और एजेंडा भी है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में हिंदुओं के आत्म-सम्मान को जगाया है और इसका जवाब न तो PDA का नारा देने वाले अखिलेश यादव के पास है और न ही संविधान की कॉपी लहराने वाले राहुल गांधी के पास।

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