पशुओं के लिए वरदान बनी ये हरी चरी, सेहत होगी मजबूत और बढ़ेगा दूध उत्पादन

उत्तर प्रदेश के रामपुर के पशुपालक रईस अहमद ने SSH-400 ज्वार चरी अपनाई है, जो पौष्टिक होने के साथ रोजाना 1 लीटर तक दूध उत्पादन बढ़ाती है और महंगे भूसे का खर्च बचाती है।

पशुपालन में चारे की गुणवत्ता का सीधा असर पशुओं की सेहत और दूध उत्पादन पर पड़ता है। उत्तर प्रदेश के रामपुर के एक प्रगतिशील पशुपालक रईस अहमद ने अपने पशुओं के लिए SSH-400 ज्वार चरी की किस्म को चुना है, जो डेयरी किसानों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रही। यह चरी इतनी पौष्टिक, मुलायम और रसदार है कि इसके सेवन से पशुओं का दूध उत्पादन रोजाना 1 लीटर तक बढ़ जाता है। खास बात यह है कि इसके इस्तेमाल से महंगे भूसे की जरूरत नहीं रहती, जिससे हर महीने हजारों रुपये की बचत होती है।

सामान्य चारे से ज्यादा पौष्टिक

रईस अहमद अपने पशुओं को SSH-400 ज्वार चरी खिला रहे हैं। उनका कहना है कि यह आम चरी की तुलना में अधिक पौष्टिक होती है और डेयरी किसानों के लिए विशेष रूप से लाभदायक मानी जाती है, क्योंकि इससे पशुओं को लंबे समय तक हरा और ताजा चारा उपलब्ध रहता है। इसी कारण दूध उत्पादन में भी बढ़ोतरी देखने को मिलती है।

अकेले खिलाने पर भी पूरा पोषण

आमतौर पर पशुपालक हरे चारे के साथ भूसा मिलाकर पशुओं को खिलाते हैं, लेकिन रईस अहमद के अनुसार SSH-400 किस्म की चरी इतनी पौष्टिक है कि पशु इसे अकेले भी आसानी से खा लेते हैं। इससे उन्हें भरपूर पोषण मिलता है और शरीर मजबूत बना रहता है। किसान बताते हैं कि लगातार हरा चारा मिलने से पशुओं की सक्रियता बढ़ती है, यही वजह है कि कई पशुपालक इस चरी को अपने पशुओं के आहार में शामिल कर रहे हैं।

मुलायम और रसदार होने से जल्दी खाते हैं पशु

किसान का कहना है कि यह चरी मुलायम और रसदार होने के कारण गाय और भैंस इसे जल्दी खा लेते हैं। अक्सर पशु सूखा चारा छोड़ देते हैं, लेकिन इस चरी के साथ ऐसी समस्या कम सामने आती है। इस घास की अच्छी खपत का सीधा फायदा पशुओं की सेहत पर पड़ता है।

गर्मी में चारे की किल्लत का समाधान

गर्मी के मौसम में हरा चारा जुटाना एक बड़ी चुनौती बन जाती है। ऐसे समय में SSH-400 चरी पशुपालकों के लिए सहारा बनती है। किसान बताते हैं कि लंबे समय तक कटाई मिलने के कारण ज्यादातर किसान इसे अपने खेत में लगाते हैं। रईस अहमद के पास खुद 6 पशु हैं और वे इसी चरी से उनका पालन करते हैं। उनका कहना है कि अन्य चरी की तुलना में यह घास खाने से पशु 1 लीटर ज्यादा दूध देते हैं, क्योंकि लगातार ताजा चारा मिलने से पोषण की कमी नहीं रहती।

छोटे पशुपालकों को भी राहत

दूध उत्पादन काफी हद तक पशु के आहार पर निर्भर करता है। किसान के अनुसार जब पशुओं को नियमित रूप से पौष्टिक हरा चारा मिलता है, तो उसका असर दूध उत्पादन पर भी दिखता है। जिन किसानों के पास 2 से 5 गाय-भैंस हैं, उनके लिए कई बार चारे का इंतजाम करना मुश्किल हो जाता है। लेकिन यह चरी लंबे समय तक उपलब्ध रहने के कारण छोटे पशुपालकों को राहत देती है और उन्हें बार-बार चारा खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती।

हजारों रुपये की बचत

किसान के मुताबिक एक भैंस महीने में करीब 4 क्विंटल भूसा खा जाती है और भूसे का भाव 1000 रुपये प्रति क्विंटल है। इस हिसाब से अकेले एक भैंस पर ही 4 हजार रुपये का खर्च आता है। ऐसे में यह चरी पशुपालकों के हजारों रुपये बचा सकती है, क्योंकि इसमें अलग से भूसा मिलाने की जरूरत नहीं पड़ती।

समय की भी बचत

इस चरी को खेत से काटकर सुबह सीधे पशुओं को खिलाया जा सकता है। इसमें ज्यादा प्रोसेसिंग या अलग से तैयारी की जरूरत नहीं होती, जिससे समय की बचत होती है और रोजाना चारा तैयार करने की परेशानी भी नहीं रहती।

चारे की चिंता हुई कम

पशुपालकों की सबसे बड़ी चिंता पशुओं के लिए रोजाना चारे का इंतजाम करना होती है। रईस अहमद बताते हैं कि इस चरी ने उनकी यह चिंता काफी हद तक दूर कर दी है। खेत में फसल तैयार होने के बाद लंबे समय तक चारा मिलता रहता है, जिससे रोज बाजार से चारा खरीदने या अलग इंतजाम करने की जरूरत नहीं पड़ती। उनका कहना है कि जब चारे की चिंता कम हो जाती है, तो पशुपालन का काम और भी व्यवस्थित तरीके से किया जा सकता है।

https://hindi.news18.com/photogallery/agriculture/ssh-400-jowar-chari-benefits-for-dairy-farmers-green-fodder-to-increases-cattle-milk-production-local18-10535990.html