रेलवे ट्रैक के ठीक बीच मजार बनी विकास में रोड़ा, सांसद बोले- हर हाल में हटेगा अवैध कब्जा

फर्रुखाबाद रेलवे स्टेशन पर अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत चल रहे पटरियों के चौड़ीकरण के बीच ट्रैक के बीचों-बीच बनी एक मजार बड़ी बाधा बन गई है। इसे हटाने पहुंची टीम का विभाग के ही दो मुस्लिम कर्मचारियों ने विरोध कर भीड़ बुला ली, जिस पर सांसद मुकेश राजपूत ने कड़ा रुख अपनाया है।

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद रेलवे स्टेशन से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'अमृत भारत स्टेशन योजना' के तहत हो रहे आधुनिकीकरण और पटरियों के चौड़ीकरण कार्य में पटरियों के ठीक बीचों-बीच बनी एक मजार सबसे बड़ी बाधा बनकर उभरी है। राज्य में सरकारी जमीनों और विभागीय परिसरों पर हुए अवैध कब्जों को हटाने की प्रक्रिया तेज है और इसी बीच यह विवाद खड़ा हो गया।

योजना के अंतर्गत फर्रुखाबाद रेलवे स्टेशन का कायाकल्प और रेलवे लाइनों के चौड़ीकरण का काम इन दिनों युद्ध स्तर पर चल रहा है। नए ट्रैक बिछाने और प्लेटफॉर्म के विस्तार के दौरान पटरियों के बीच बनी यह मजार सबसे बड़ा रोड़ा साबित हुई, जिसके ध्वस्तीकरण को लेकर स्टेशन परिसर में भारी हंगामे और तनाव की स्थिति बन गई।

अपने ही दो कर्मचारियों ने जुटाई भीड़

मौके से मिली जानकारी के अनुसार, जब रेलवे के तकनीकी अधिकारियों और गैंगमैन की टीम ने पटरियों के बीच बाधक बन रहे मजार के हिस्से और अवैध अतिक्रमण को विधिक तरीके से हटाने का प्रयास किया, तो विभाग के भीतर ही काम कर रहे दो मुस्लिम कर्मचारियों ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया।

आरोप है कि इन दोनों रेल कर्मचारियों ने न सिर्फ सरकारी काम में अड़ंगा डाला, बल्कि मजार को बचाने के लिए स्थानीय स्तर पर संदेश भिजवाकर एक विशेष समुदाय की भारी भीड़ को रेलवे स्टेशन परिसर के भीतर बुला लिया। अचानक जुटी इस भीड़ के विरोध प्रदर्शन के चलते मौके पर कानून-व्यवस्था बिगड़ने लगी, जिसके चलते सुरक्षा कारणों से रेलवे प्रशासन को कुछ समय के लिए पीछे हटना पड़ा और अतिक्रमण हटाओ अभियान को अस्थायी रूप से रोक दिया गया।

सांसद का सख्त रुख

स्टेशन पर हुए इस हंगामे और आंतरिक मिलीभगत की खबर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों तक पहुंचते ही स्थानीय सांसद मुकेश राजपूत ने बेहद आक्रामक रुख अपना लिया। उन्होंने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि अमृत योजना के तहत फर्रुखाबाद रेलवे स्टेशन का आधुनिक बनना पूरे क्षेत्र के व्यापार और यात्रियों की सुरक्षा के लिए बेहद आवश्यक है।

रेलवे की बेशकीमती सरकारी जमीन पर किया गया कोई भी अवैध कब्जा या अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रेलवे लाइन के चौड़ीकरण में जो भी मजार बाधक बन रही है, उसे प्रशासन कानून सम्मत तरीके से हर हाल में वहां से हटाएगा।

सांसद ने स्पष्ट किया कि विकास के राष्ट्रीय कार्यों में किसी भी तरह का भीड़ तंत्र या तुष्टिकरण आड़े नहीं आने दिया जाएगा।

अरबों का बजट, कड़ी कार्रवाई के संकेत

उल्लेखनीय है कि भारतीय रेलवे स्टेशनों को विश्वस्तरीय बनाने के लिए अरबों रुपये का बजट खर्च कर रहा है, जिसके तहत नए ट्रैक बिछाने और सिग्नलों को हाई-टेक करने का काम चल रहा है। मुख्य यार्ड और लाइनों के बीच मजार का यह विवाद अब पूरी तरह प्रशासनिक और कानूनी दायरे में आ चुका है।

रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस घटना का संज्ञान लेते हुए सरकारी काम में बाधा डालने और भीड़ जुटाने वाले दोनों मुस्लिम कर्मचारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है और उन पर निलंबन सहित अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के संकेत दिए हैं। फिलहाल स्टेशन परिसर और मजार के आसपास किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और स्थानीय पुलिस की मुस्तैदी काफी बढ़ा दी गई है।

कहां स्थित है विवादित मजार

यह विवादित मजार फर्रुखाबाद रेलवे स्टेशन परिसर के भीतर रेलवे की सरकारी जमीन पर सीधे रेलवे लाइनों के बिल्कुल बीचों-बीच बनी हुई है, जो यार्ड आधुनिकीकरण और लाइनों के चौड़ीकरण के काम में बाधा बन रही है।

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