जनसुनवाई में पहुंचा अनोखा शख्स, बोला- 'यह मेरा 9वां जन्म, पूरी दुनिया मेरी', कलेक्टर से पूछा- विश्व का मालिक कौन?

बालाघाट कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में एक 44 वर्षीय व्यक्ति ने खुद को परमेश्वर बताते हुए पूरी धरती पर मालिकाना हक का दावा किया और कलेक्टर से अपनी जमीन की पावती मांगी। डॉक्टरों के अनुसार यह किसी मानसिक विकार का मामला हो सकता है।

बालाघाट कलेक्ट्रेट में हर मंगलवार की तरह जनसुनवाई का दिन था। दूर-दराज के ग्रामीण अंचलों से लोग अपनी-अपनी समस्याएं लेकर अधिकारियों के पास पहुंचे थे। कोई सड़क की शिकायत कर रहा था तो कोई बिजली और पानी की परेशानी बता रहा था। जनसुनवाई कक्ष में अलग-अलग विभागों के अधिकारी मौजूद थे और एक-एक कर हर आवेदन सुनकर समाधान का आश्वासन दे रहे थे।

एक सवाल और छा गया सन्नाटा

इसी बीच भीड़ में से 44 साल का एक व्यक्ति अधिकारियों के सामने आगे बढ़ा। बिना किसी भूमिका के उसने सीधा सवाल दाग दिया- 'बताइए, इस विश्व का मालिक कौन है?' यह असामान्य सवाल सुनते ही पूरे सभागार में कुछ पल के लिए सन्नाटा पसर गया। वहां मौजूद सभी अधिकारी और आवेदक सन्न रह गए और उस शख्स की ओर देखने लगे।

जब उससे पूछा गया कि वह कौन है, तो उसने जवाब दिया कि वह इस धरती पर परमेश्वर के पद पर है। उसने कहा, 'शरीर शिवाजी राजै का है, यह मेरा नौवां जन्म है और पूरी दुनिया मेरी है।'

कौन है यह शख्स

इस व्यक्ति का नाम दिलीप नारबोदे है, जो बालाघाट की वारासिवनी तहसील के बकेरा गांव का रहने वाला है। हालांकि उसने खुद को एक नई पहचान दे रखी है और स्वयं को 'परमेश्वर शरीर शिवाजी राजै' बताता है। गांव में भी वह अकसर चर्चा का विषय बना रहता है।

कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर उसने एक आवेदन दिया, जिसके बाद वह पूरे कलेक्ट्रेट में चर्चा का केंद्र बन गया। आवेदन में उसने खुद को बकेरा गांव का निवासी और किसान बताया है, लेकिन साथ ही यह दावा भी किया है कि धरती की पूरी जमीन उसकी है। उसने मांग की है कि असली जमीन उसके असली मालिक के नाम की जाए।

नौवें जन्म का दावा

दिलीप नारबोदे का कहना है कि यह उसका नौवां जन्म है और यह जन्म सतयुग की स्थापना के लिए हुआ है। उसका दावा है कि इसी कारण धरती की समस्त जमीन उसकी है। उसने यह भी कहा कि दो सौ साल पहले उसका जन्म हरियाणा के एक जाट परिवार में हुआ था और तब उसने एक ग्रंथ लिखा था, जिसमें सारी जमीन उसी की बताई गई है।

दिलीप का कहना है कि वह वर्तमान व्यवस्था पर भरोसा करता है, इसी वजह से वह कलेक्टर के पास अपनी जमीन की पावती मांगने आया है।

गांव की महिला को मानता है पत्नी

दिलीप के अनुसार उसके परिवार में पत्नी और दो बेटियां हैं। उसका कहना है कि पिछले जन्म की उसकी पत्नी का छल-कपट से किसी और से विवाह करा दिया गया। गांव के सरपंच ने बताया कि एक बार वह न्याय की मांग लेकर पहुंचा था, लेकिन जिस महिला को वह अपनी पत्नी बता रहा था, वह वास्तव में किसी और की पत्नी थी।

मांग न माने जाने पर उसने युद्ध की चेतावनी दे दी और अगले दिन प्राचीन काल के युद्ध जैसे परिधान में पहुंच गया। इस मामले में शिकायत के बाद वह करीब महीना भर जेल में भी रहा। इसके अलावा उसने एक तालाब के जीर्णोद्धार के काम में भी अड़ंगा डाल दिया और यही कहता रहा कि पूरी धरती उसकी है।

मानसिक रोग की आशंका

जानकारों का मानना है कि यह एक मनोवैज्ञानिक विकार का मामला हो सकता है। इस व्यक्तित्व को समझने के लिए जिला चिकित्सालय के डॉक्टर अरुण लांजेवार से बातचीत की गई।

मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अरुण कुमार लांजेवार का कहना है कि दिमाग पर किसी तरह की चोट लगने से ऐसी समस्या सामने आ सकती है। लेकिन अगर कोई चोट न हो, तो यह किसी प्रकार के मानसिक रोग का संकेत हो सकता है, जिसे तकनीकी भाषा में बायपोलर डिसऑर्डर भी कहा जाता है।

उनके मुताबिक यह स्थिति अत्यधिक पूजा-पाठ करने या किसी किताब को बहुत ज्यादा पढ़ने के कारण भी पैदा हो सकती है। उन्होंने साल 2007 में आई फिल्म 'भूल भुलैया' का उदाहरण देते हुए बताया कि उसमें भी नायिका किसी कहानी को सुनकर खुद को उसी पात्र के स्थान पर मान बैठती है। ऐसे में आशंका है कि दुनिया की जमीन पर दावा करने वाला यह शख्स भी किसी ऐसी ही बीमारी से ग्रस्त हो।

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