संजय सिंह के बाद अब लेशी सिंह से मुलाकात... क्या आनंद मोहन का असर कम करने खुद उतरे नीतीश कुमार?

आनंद मोहन के तीखे बयानों के बीच नीतीश कुमार पहले जेडीयू नेता संजय सिंह और अब मंत्री लेशी सिंह के आवास पहुंचे, जिसे सियासी हलकों में बड़े राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

बिहार की राजनीति में इन दिनों राजपूत नेतृत्व और उसके असर को लेकर नई बहस गरमाई हुई है। पूर्व सांसद आनंद मोहन के लगातार तीखे बयानों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की हालिया राजनीतिक सरगर्मियां भी सुर्खियों में आ गई हैं। पहले जेडीयू नेता और एमएलसी संजय सिंह के घर पहुंचना और अब भवन निर्माण मंत्री लेशी सिंह के आवास जाना— इन दोनों घटनाओं को राजनीतिक गलियारों में एक बड़े इशारे के रूप में आंका जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सामाजिक समीकरणों को साधने और पार्टी के भीतर साफ संदेश देने की रणनीति पर जेडीयू काम कर रही है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री की इन मुलाकातों को महज औपचारिक शिष्टाचार नहीं माना जा रहा।

आनंद मोहन के बयानों के बाद बदला सियासी मिजाज

दरअसल बीते कुछ समय से आनंद मोहन जेडीयू नेतृत्व और सरकार को निशाने पर लेते हुए लगातार बयान दे रहे हैं। खासकर अपने बेटे चेतन आनंद के सम्राट कैबिनेट में जगह न मिलने पर उन्होंने खुलकर नाराजगी जताई थी। आनंद मोहन ने कहा था कि जेडीयू में थैली भरकर पैसे देने के बाद ही मंत्री पद मिलता है।

इसके अलावा उन्होंने नीतीश कुमार के इस्तीफे पर भी तंज कसा और निशांत के स्वास्थ्य मंत्री बनने पर कटाक्ष किया था। उनके इन बयानों ने सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर असहजता पैदा कर दी है। राजपूत समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और नेतृत्व को लेकर दिए गए उनके बयानों ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।

इसी बीच जेडीयू के कई नेता खुलकर सामने आए, जिनमें लेशी सिंह का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर आनंद मोहन के रुख से असहमति जताई थी। ऐसे में मुख्यमंत्री का उनके आवास पहुंचना कई राजनीतिक संकेत छोड़ गया।

आखिर क्यों अहम है लेशी सिंह के घर जाना?

लेशी सिंह सिर्फ एक मंत्री भर नहीं हैं, बल्कि इस वक्त वे बिहार की सबसे चर्चित प्रशासनिक और राजनीतिक फाइलों में से एक से भी जुड़ी हुई हैं। भवन निर्माण विभाग की मंत्री होने के नाते पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास 10 सर्कुलर रोड से जुड़े विवाद में उनके विभाग की अहम भूमिका है।

सरकारी बंगले के आवंटन, नोटिस और उसे खाली कराने की पूरी प्रक्रिया भवन निर्माण विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती है। ऐसे में जब राबड़ी देवी का बंगला विवाद सुर्खियों में है, उसी दौरान मुख्यमंत्री का लेशी सिंह के घर पहुंचना राजनीतिक रूप से और भी मायने रखता है।

पहले संजय सिंह, फिर लेशी सिंह

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री की हालिया मुलाकातों का क्रम भी अपने आप में महत्वपूर्ण है। कुछ दिन पहले वे जेडीयू के वरिष्ठ नेता संजय सिंह के आवास पहुंचे थे और अब लेशी सिंह के यहां गए हैं। दोनों नेताओं का अपना अलग सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव है।

इसी आधार पर माना जा रहा है कि जेडीयू नेतृत्व अपने प्रभावशाली नेताओं को सार्वजनिक रूप से तवज्जो देकर पार्टी के भीतर एकजुटता का संदेश देना चाहता है।

क्या राजपूत राजनीति पर है निगाह?

बिहार में चुनावी साल नजदीक आते ही जातीय और सामाजिक समीकरण फिर केंद्र में आ गए हैं। आनंद मोहन के बयानों के बाद राजपूत राजनीति की चर्चा और तेज हुई है। ऐसे में नीतीश कुमार की सक्रियता को भी इसी नजरिए से परखा जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री यह जताना चाहते हैं कि जेडीयू में नेतृत्व का केंद्र वही हैं और पार्टी के भीतर किसी भी वैकल्पिक शक्ति केंद्र को ज्यादा राजनीतिक स्पेस नहीं दिया जाएगा।

संकेतों की राजनीति का नया अध्याय

हालांकि जेडीयू की ओर से इन मुलाकातों को लेकर कोई आधिकारिक राजनीतिक वजह नहीं बताई गई है, लेकिन बिहार की राजनीति में संकेतों का अपना महत्व होता है। कई बार नेताओं की मुलाकातें ही बड़े राजनीतिक संदेश बन जाती हैं।

यही कारण है कि राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या नीतीश कुमार खुद मैदान में उतरकर उन तमाम अटकलों का जवाब देना चाहते हैं, जो हाल के दिनों में आनंद मोहन के बयानों के बाद उभरी हैं। फिलहाल इतना तय है कि बिहार की सियासत में शुरू हुई यह शह और मात की लड़ाई आने वाले दिनों में और दिलचस्प होने वाली है।

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