बांध और बैराज में क्या फर्क होता है, नदियों की सेहत के लिहाज से कौन है बेहतर विकल्प

बांध और बैराज दोनों नदी पर बनते हैं, पर इनके काम और बनावट में बड़ा अंतर है। जानिए दोनों में फर्क, भारत में किसकी संख्या ज्यादा है और पर्यावरण की दृष्टि से कौन कम नुकसानदेह है।

अक्सर लोग बांध और बैराज को एक ही मान बैठते हैं, जबकि दोनों में बुनियादी अंतर होता है। यह सच है कि ये दोनों ही संरचनाएं नदी पर बनाई जाती हैं, लेकिन इन्हें बनाने और चलाने का तरीका एक-दूसरे से काफी अलग है। नदी और पर्यावरण की सेहत के लिहाज से इनमें कौन ज्यादा उपयुक्त है, यह जानना दिलचस्प है। भारत में अंग्रेजों ने मुख्यतौर पर सिंचाई की दृष्टि से बैराज बनाने की शुरुआत की थी, जबकि बड़े बांध बनाने का बड़ा दौर आजादी के बाद आया। दिलचस्प बात यह भी है कि आज यूरोप और अमेरिका में कई बड़े बांध तोड़े जा रहे हैं।

बांध आखिर होता क्या है

बांध किसी नदी या घाटी पर खड़ी की गई एक विशाल संरचना होती है, जो पानी को रोककर उसके पीछे एक बड़ा जलाशय तैयार कर देती है। आसान शब्दों में कहें तो बांध का प्रमुख मकसद पानी को इकट्ठा यानी स्टोर करना होता है। इसके पीछे बनने वाली झील कई बार सैकड़ों वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैल जाती है।

बांध किन कामों में आते हैं

  • सिंचाई के लिए पानी जमा करना
  • पानी से बिजली बनाना
  • बाढ़ पर नियंत्रण रखना
  • शहरों और उद्योगों तक जल आपूर्ति पहुंचाना
  • सूखे के दौरान पानी उपलब्ध कराना

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, भारत में करीब 5,300 से 6,600 बड़े बांध मौजूद हैं, जबकि लगभग 400 से 450 बांध अभी निर्माणाधीन हैं। इसके मुकाबले बैराजों की सटीक संख्या करीब 250 मानी जाती है।

बैराज क्या होता है

बैराज भी नदी पर ही बनाई जाने वाली संरचना है, पर इसका उद्देश्य पानी को लंबे समय तक रोककर रखना नहीं होता। बैराज में कई बड़े-बड़े गेट लगे होते हैं, जिन्हें खोलकर या बंद करके नदी के जल प्रवाह को काबू में रखा जाता है। इसे आप ‘नदी का ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम’ भी कह सकते हैं। भारत के प्रमुख बैराजों में नरौरा बैराज, फरक्का बैराज और भीमगोडा बैराज शामिल हैं।

बैराज किन कामों में आते हैं

  • नहरों में पानी मोड़ना
  • सिंचाई व्यवस्था को नियंत्रित करना
  • नदी में जलस्तर बनाए रखना
  • कुछ मामलों में बाढ़ का प्रबंधन

बैराज के पीछे आमतौर पर बहुत बड़ा जलाशय नहीं बनता और ये बांध की तुलना में कम ऊंचे होते हैं। इनका मुख्य काम नदी के पानी को मोड़कर नहरों तक पहुंचाना होता है, ताकि आसपास के इलाकों में आसानी से सिंचाई हो सके।

बांध और बैराज में मुख्य अंतर

  • बांध ज्यादा ऊंचे होते हैं, जबकि बैराज अपेक्षाकृत नीचा होता है।
  • बांध में गेट हो भी सकते हैं और नहीं भी, लेकिन बैराज में गेट होना जरूरी है।
  • बांध बिजली उत्पादन में काम आते हैं, जबकि बैराज के साथ यह जरूरी नहीं होता।
  • बांध पानी इकट्ठा करके सिंचाई का काम करता है, जबकि बैराज सीधे नहरों में पानी भेजकर सिंचाई में मददगार बनता है।
  • बांध की लागत बहुत अधिक होती है, जबकि बैराज की लागत अपेक्षाकृत कम रहती है।

भारत में बांध ज्यादा हैं या बैराज

संख्या के हिसाब से देखें तो भारत में बांधों की तादाद कहीं ज्यादा है। भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां सबसे अधिक बड़े बांध बनाए गए हैं। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक देश में 5,000 से अधिक बड़े बांध हैं और सैकड़ों अन्य या तो निर्माणाधीन हैं या प्रस्तावित। इसकी तुलना में बैराजों की संख्या काफी कम है और इन्हें कुछ सौ के आसपास ही माना जाता है।

ब्रिटिश काल में बैराजों की अहमियत

दिलचस्प पहलू यह है कि ब्रिटिश शासन ने भारत में बड़े पैमाने पर बैराजों और हेडवर्क्स के निर्माण पर जोर दिया था। उनका मकसद मुख्य रूप से सिंचाई बढ़ाना और राजस्व जुटाना था। गंगा नहर प्रणाली, भीमगोडा बैराज और पंजाब के कई हेडवर्क्स इसी सोच की देन थे। आजादी के बाद भारत ने बड़े बहुउद्देशीय बांधों पर अधिक ध्यान दिया, क्योंकि देश को बिजली, सिंचाई और जल भंडारण तीनों की जरूरत थी।

नदियों की सेहत के लिहाज से कौन बेहतर

अगर सिर्फ नदी और पर्यावरण की सेहत के नजरिए से देखा जाए, तो आमतौर पर बैराज को बांध की तुलना में कम नुकसानदायक माना जाता है। बड़े बांध नदी के पूरे स्वभाव को बदल देते हैं और उसका प्राकृतिक प्रवाह रुक जाता है। नदी हजारों वर्षों से जिस गति और मात्रा में बहती आई है, बांध उसे नियंत्रित कर देता है, जिससे नीचे की धारा का पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होता है।

हिमालयी नदियां भारी मात्रा में गाद और उपजाऊ मिट्टी साथ लेकर आती हैं। भाखड़ा, टिहरी या सरदार सरोवर जैसे बड़े बांधों में यह तलछट जलाशय में ही जमा हो जाती है, जिससे नीचे की ओर खेतों को कम उपजाऊ मिट्टी मिलती है। इससे नदी का डेल्टा सिकुड़ने लगता है, मछलियों के प्रवास में बाधा आती है और बड़े पैमाने पर विस्थापन होता है। नदी झील जैसी बन जाती है, पानी का तापमान बदलता है और ऑक्सीजन का स्तर भी प्रभावित होता है।

बैराज का असर भी पूरी तरह निर्दोष नहीं

बैराज भी पूरी तरह नुकसानरहित नहीं होते। इनमें जल प्रवाह नियंत्रित किया जाता है और पानी को मोड़कर नहरों में डाल दिया जाता है, जिससे कई बार नीचे की धारा में कम पानी पहुंचता है। मछलियों पर असर यहां भी पड़ता है, लेकिन बांध की तुलना में कम। कई बार नदी के एक हिस्से में जलस्तर बढ़ जाता है तो दूसरे हिस्से में घट जाता है।

भारत का पहला बांध और बैराज

भारत में जिसे पहला बांध माना जाता है, वह असल में एक बैराज ही था। इसे कल्लणै में बनाया गया था। कल्लणै ने कावेरी को झील में नहीं बदला, बल्कि उसने केवल पानी को नियंत्रित कर खेतों तक पहुंचाने का काम किया।

https://hindi.news18.com/news/knowledge/what-is-difference-between-a-dam-and-a-barrage-which-is-better-for-the-rivers-ws-el-10573043.html