खंडवा में 208 सरकारी स्कूल जर्जर: छत से झड़ता सीमेंट, बाहर निकले सरिए, जोखिम में बच्चों की जान

खंडवा जिले के करीब 1400 सरकारी स्कूलों में से 208 स्कूल पूरी तरह जर्जर हालत में हैं, जहां बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ाई कर रहे हैं। मरम्मत पर करीब 8 करोड़ रुपए खर्च का अनुमान है।

खंडवा जिले में सरकारी स्कूलों की हालत बेहद चिंताजनक बनी हुई है। शहर हो या गांव, कई ऐसे स्कूल हैं जहां बच्चे अपनी जान को खतरे में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। किसी भवन की छत से लगातार सीमेंट झड़ रहा है तो कहीं दीवारों से सरिए बाहर निकल आए हैं, जो कभी भी किसी बड़े हादसे की वजह बन सकते हैं। यह बदहाली सिर्फ ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर के कई स्कूल भी इसी हाल से जूझ रहे हैं।

1400 में से 208 स्कूल पूरी तरह जर्जर

जिले में करीब 1400 स्कूल हैं, जिनमें से 208 स्कूल पूरी तरह जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं और इन्हीं में बच्चे रोजाना पढ़ाई कर रहे हैं। सिर्फ कक्षाओं की दशा ही खराब नहीं है, बल्कि कई स्कूलों में शौचालयों की स्थिति भी बेहद दयनीय है, जिसके चलते बच्चों को रोज परेशानी झेलनी पड़ती है। नया सत्र शुरू होने का समय करीब आ चुका है, इसके बावजूद शिक्षा विभाग अब तक सुस्त नजर आ रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार अधिकारी आखिर कब चेतेंगे।

अंग्रेजों के जमाने की याद दिलाते स्कूल

शहर के गणेशगंज इलाके में स्थित शासकीय प्राइमरी स्कूल आज भी अंग्रेजों के दौर की याद ताजा कर देता है। वहीं शासकीय शाला पड़ावा नंबर-1, जिसे पहले मेन हिंदी स्कूल के नाम से जाना जाता था, अपनी बदहाली की दास्तां खुद बयां कर रही है। कभी इसी स्कूल से बड़े अधिकारी, उद्योगपति और जनप्रतिनिधि निकले, लेकिन आज यही भवन जर्जर हालत में बच्चों की पढ़ाई का सहारा बना हुआ है।

गांव में 40 बच्चे जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर

ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर भी अलग नहीं है। ग्राम बिहारीपुरा खुर्द में स्थित शासकीय प्राथमिक शाला का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। छत से लगातार सीमेंट झड़ रहा है और कई जगहों पर सरिए साफ नजर आ रहे हैं। मोहना संकुल के अंतर्गत आने वाले इस स्कूल में पहली से पांचवीं कक्षा तक करीब 40 बच्चे पढ़ते हैं। 15 जून से नया सत्र शुरू होने वाला है, लेकिन इस बार भी बच्चों को इसी जर्जर भवन में बैठना पड़ेगा।

स्थानीय निवासी प्रकाश यादव का कहना है कि बारिश का मौसम शुरू हो चुका है और तेज हवा व लगातार बारिश के कारण भवन की हालत और बिगड़ गई है। ऐसे हालात में कभी भी छत गिर सकती है और बड़ा हादसा हो सकता है।

मरम्मत पर करीब 8 करोड़ खर्च का अनुमान

शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले के 383 स्कूलों को रखरखाव और मरम्मत की जरूरत है, जिनमें से 208 स्कूल ऐसे हैं जिन्हें तत्काल सुधार की दरकार है। इन स्कूलों की मरम्मत के लिए करीब 6 करोड़ 20 लाख रुपए की आवश्यकता बताई गई है, जबकि कुल मिलाकर करीब 8 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान लगाया गया है।

समाजसेवी लव जोशी का कहना है कि सरकारी स्कूलों की हालत दिनोंदिन खराब होती जा रही है, लेकिन इस ओर न तो जनप्रतिनिधि ध्यान दे रहे हैं और न ही अधिकारी। वहीं गणेशगंज के पार्षद प्रकाश यादव का कहना है कि इस स्कूल की समस्या को लेकर कई बार आवाज उठाई जा चुकी है, पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बारिश के दौरान बच्चों की छुट्टी करनी पड़ती है, क्योंकि वहां पढ़ाई करना सुरक्षित नहीं है।

प्रशासन की उदासीनता से नाराजगी

बच्चों के परिजनों का कहना है कि उन्होंने कई बार ग्राम पंचायत, बीआरसी कार्यालय और जनपद पंचायत को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन अब तक न तो भवन की मरम्मत कराई गई और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई। लगातार शिकायतों के बाद भी प्रशासन की उदासीनता से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

पालकों का कहना है कि वे अपने बच्चों की पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता है। जब स्कूल का भवन ही सुरक्षित नहीं है, तो बच्चों को वहां भेजना कैसे संभव है। ग्रामीणों ने मांग की है कि तत्काल स्कूल भवनों का निरीक्षण कराया जाए और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए जल्द से जल्द मरम्मत या नए भवन की व्यवस्था की जाए। इस पूरे मामले में जिला शिक्षा अधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।

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