जालोर: 12वीं के टॉपर्स को मलेशिया दिखाएंगे समाजसेवी रमेश जैन, जुलाई में होगी शैक्षणिक यात्रा

सांचौर-डूंगरी क्षेत्र के 12वीं बोर्ड के मेधावी विद्यार्थियों को समाजसेवी रमेश कुमार जैन जुलाई में 5 दिवसीय मलेशिया शैक्षणिक भ्रमण पर भेजेंगे, जहां छात्र वहां के शैक्षणिक संस्थानों, तकनीकी केंद्रों और ऐतिहासिक स्थलों को देखेंगे।

जालोर जिले के सांचौर क्षेत्र के डूंगरी इलाके सहित आसपास के पूरे क्षेत्र के होनहार विद्यार्थियों के लिए एक उत्साहजनक खबर सामने आई है। पढ़ाई में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले छात्रों को अब विदेश घूमने का सुनहरा मौका मिलने जा रहा है। डूंगरी–सांचौर क्षेत्र में शिक्षा को प्रोत्साहन देने के मकसद से समाजसेवी रमेश कुमार जैन ने एक सराहनीय कदम उठाया है। उन्होंने 12वीं बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करने वाले टॉपर्स को मलेशिया के शैक्षणिक भ्रमण पर भेजने की घोषणा की है।

जुलाई में प्रस्तावित है 5 दिवसीय यात्रा

यह शैक्षणिक यात्रा जुलाई माह में प्रस्तावित है और इसकी अवधि 5 दिन रहेगी। आयोजकों के अनुसार इस पहल का मकसद सिर्फ छात्रों को पुरस्कार देना नहीं है, बल्कि ग्रामीण और क्षेत्रीय स्तर के विद्यार्थियों को वैश्विक शिक्षा प्रणाली, तकनीकी प्रगति और आधुनिक व्यवस्थाओं से रूबरू कराना है।

रमेश कुमार जैन का मानना है कि इस तरह के अनुभव विद्यार्थियों की सोच को व्यापक बनाते हैं और उनके भविष्य को एक नई दिशा देते हैं।

निर्धारित मानदंडों पर होगा छात्रों का चयन

इस यात्रा के लिए केवल उन्हीं विद्यार्थियों को चुना जाएगा, जिन्होंने बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। चयन की प्रक्रिया पूरी तरह तय मानदंडों के आधार पर पूरी की जाएगी, ताकि डूंगरी–सांचौर क्षेत्र के सही मायनों में मेधावी छात्रों को ही इस अवसर का फायदा मिल सके।

क्या-क्या देखेंगे छात्र

यात्रा के दौरान विद्यार्थियों को मलेशिया के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों, तकनीकी केंद्रों और ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा। इसके साथ ही वे वहां की आधुनिक शिक्षा प्रणाली और सांस्कृतिक विविधता को नजदीक से समझ सकेंगे।

अभिभावकों से पासपोर्ट जल्द बनवाने की अपील

समाजसेवी रमेश कुमार जैन ने डूंगरी–सांचौर क्षेत्र के अभिभावकों से अपील की है कि जिन छात्रों के पासपोर्ट अब तक नहीं बने हैं, वे जल्द से जल्द यह प्रक्रिया पूरी करा लें, ताकि यात्रा की तैयारियों में किसी तरह की रुकावट न आए।

उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसे व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ना बेहद आवश्यक है। उनका यह प्रयास युवाओं को प्रेरित करने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोचने के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

क्षेत्र में इस पहल को एक “लाइफ चेंजिंग अवसर” के रूप में देखा जा रहा है और इसे शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरणादायक कदम के तौर पर सराहा जा रहा है।

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