उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले की ड्रमंडगंज घाटी पर बीते दिनों हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया था। इस हादसे में 12 लोगों की जान चली गई थी, जिनमें एक ही परिवार के 9 सदस्य शामिल थे। घटना के बाद यातायात सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हुए और प्रशासन की ओर से ठोस कदम उठाने की बात कही गई थी।
हादसे को बीते करीब एक महीना गुजर चुका है, लेकिन घाटी की तस्वीर आज भी पहले जैसी ही बनी हुई है। व्यवस्था के नाम पर यहां सिर्फ कुछ स्लोगन लगा दिए गए हैं, जिनमें से कई जगह तो स्लोगन गिरे हुए नजर आते हैं। जब लोकल टीम मौके पर पहुंची तो सचेतक और सूचना बोर्ड भी टूटे हुए मिले।
हादसे में गई थी एक ही परिवार के 9 लोगों की जान
करीब 50 दिन पहले ढलान पर उतरते समय एक ट्रक का ब्रेक फेल हो गया था। इसके बाद ट्रक ने आगे चल रही बोलेरो को जोरदार टक्कर मार दी थी और बोलेरो आगे चल रहे दूसरे ट्रक में जा घुसी थी। इस दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के नौ लोगों की मौत हुई थी।
हादसे के बाद से अब तक सुधार के नाम पर कोई ठोस कदम उठाते नहीं दिखा है। सड़क सुरक्षा के लिए जो स्लोगन लगाए गए हैं, वे भी ठीक से दिखाई नहीं देते। न तो घाटी पर रिफ्लेक्टर लगाए गए हैं और न ही ट्रक चालकों को पहले से सतर्क करने के लिए कोई डिस्प्ले बोर्ड लगाया गया है, जो उन्हें घाट के बारे में अग्रिम जानकारी दे सके।
'नीचे उतरते-चढ़ते सहम जाता है दिल'
घाटी से होकर गुजर रहे ऋषभ कुमार ने बताया कि नीचे उतरते या ऊपर चढ़ते समय बहुत डर लगता है। उन्होंने कहा कि यहां पहले भी कई हादसे हो चुके हैं और वाहनों की रफ्तार देखकर दिल सहम जाता है।
हादसे के बाद भी कोई बदलाव नहीं हुआ है। आज भी स्थिति जस की तस है। प्रशासन को राहगीरों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए, ताकि यहां होने वाले हादसों को रोका जा सके।
अब भी बना हुआ है बड़ा सवाल
स्थानीय लोगों के मन में अब भी वही सवाल कौंध रहा है कि क्या किसी नए हादसे का इंतजार किया जा रहा है, या वाकई प्रशासन घाटी की सुरक्षा को लेकर सजग है। फिलहाल मौके के हालात बताते हैं कि सुरक्षा इंतजामों को लेकर अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।
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