इंदौर के कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय में प्रकृति ने इस बार ऐसा करिश्मा दिखाया है, जिसने वन्यजीव विशेषज्ञों से लेकर आम दर्शकों तक सभी को रोमांचित कर दिया है। जून महीने में यहां पहली बार एक दुर्लभ सफेद कृष्ण मृग ने जन्म लिया है। आमतौर पर कृष्ण मृग काले, भूरे या गेहूंआ रंग के होते हैं, लेकिन इस नवजात का रंग पूरी तरह दूध जैसा सफेद है और इसकी आंखें गुलाबी दिखाई देती हैं। यही कारण है कि जन्म के कुछ ही दिनों में यह नन्हा मेहमान चिड़ियाघर का सबसे बड़ा आकर्षण बन गया है।
वन्यजीव विशेषज्ञ इसे एक अत्यंत दुर्लभ आनुवंशिक घटना मान रहे हैं। देशभर में ऐसे मामले बहुत कम सामने आते हैं, इसलिए इंदौर के चिड़ियाघर के लिए यह उपलब्धि विशेष महत्व रखती है। इस अनोखे जन्म ने इंदौर को एक बार फिर देश के वन्यजीव मानचित्र पर चर्चा में ला दिया है।
पहली बार सामने आया ऐसा दुर्लभ मामला
प्राणी संग्रहालय प्रशासन के अनुसार सफेद कृष्ण मृग स्वस्थ अवस्था में जन्मा है और उसकी नियमित निगरानी की जा रही है। चिड़ियाघर के प्रभारी अधिकारी डॉ. उत्तम यादव ने बताया कि वर्तमान में जू में करीब 55 कृष्ण मृग हैं, जो सभी सामान्य काले या गेहूंआ रंग के हैं। पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी कृष्ण मृग ने सफेद रंग के बच्चे को जन्म दिया हो।
प्रशासन के मुताबिक नर कृष्ण मृग का रंग काला और मादा का रंग गेहूंआ होता है। इसी सामान्य परिवार में जन्मे सफेद बच्चे ने सभी को हैरान कर दिया है। जन्म के बाद से ही उसकी गतिविधियों और स्वास्थ्य पर खास नजर रखी जा रही है।
क्यों खास है सफेद कृष्ण मृग?
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति सामान्य एल्बिनिज्म या ल्यूसिज्म जैसी दुर्लभ आनुवंशिक प्रक्रिया का परिणाम हो सकती है। ऐसे जानवरों के शरीर में रंग बनाने वाले तत्वों की मात्रा बहुत कम रह जाती है। यही वजह है कि उनका रंग पूरी तरह सफेद दिखता है और कई मामलों में आंखें गुलाबी नजर आती हैं।
जंगल में जीवित रहना होता है मुश्किल
विशेषज्ञों के अनुसार जंगल में सफेद रंग वाले जानवरों के लिए जीवित रहना आसान नहीं होता। उनका रंग उन्हें दूर से ही आसानी से पहचान में आने वाला बना देता है, जिससे शिकारी जानवर उन्हें तुरंत भांप लेते हैं। यही कारण है कि ऐसे दुर्लभ जीवों के संरक्षण में चिड़ियाघरों की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है।
दर्शकों के लिए बना आकर्षण का केंद्र
सफेद कृष्ण मृग के जन्म की खबर सामने आने के बाद बड़ी संख्या में लोग उसे देखने पहुंच रहे हैं। बच्चों और वन्यजीव प्रेमियों में इसे लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। प्रशासन ने नवजात के बाड़े के आसपास अतिरिक्त निगरानी और सुरक्षा की व्यवस्था भी की है।
संरक्षण की दृष्टि से भी अहम
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह दुर्लभ आनुवंशिक परिवर्तन भविष्य में वन्यजीव संरक्षण और प्रजनन अध्ययन के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। उनका कहना है कि यदि यह विरल आनुवंशिक गुण आगे भी बना रहता है, तो भविष्य में सफेद कृष्ण मृगों की संख्या बढ़ सकती है, हालांकि यह पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। फिलहाल वैज्ञानिक और पशु चिकित्सक इसके विकास पर नजर बनाए हुए हैं।
क्या कहता है जू प्रशासन?
प्रभारी अधिकारी डॉ. उत्तम यादव के अनुसार नवजात पूरी तरह स्वस्थ है और उसे आवश्यक पोषण व चिकित्सकीय देखभाल दी जा रही है। प्रशासन को उम्मीद है कि आने वाले समय में यह नन्हा सफेद कृष्ण मृग इंदौर के चिड़ियाघर की पहचान बन सकता है।
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