पाटलिपुत्र स्टेशन उपद्रव: क्या वाकई ट्रेन लेट होने से भड़के परीक्षार्थी या परदे के पीछे थी सोची-समझी साजिश?

पटना के पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन पर सिपाही भर्ती परीक्षार्थियों की भीड़ में हुई पत्थरबाजी और तोड़फोड़ में रेल आईजी समेत पुलिसकर्मी घायल हुए। प्रशासन इसे महज परीक्षा की अव्यवस्था नहीं, बल्कि असामाजिक तत्वों की सुनियोजित साजिश मान रहा है और जांच के लिए एसआईटी बनाई गई है।

बिहार की राजधानी पटना का पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन रविवार सुबह कुछ देर के लिए रणक्षेत्र जैसा नजर आया। बिहार पुलिस मद्य निषेध विभाग की सिपाही भर्ती परीक्षा देने जा रहे हजारों अभ्यर्थियों की भीड़ में मौजूद कुछ उपद्रवी तत्वों ने स्टेशन पर जमकर तोड़फोड़ और पथराव किया। हालात संभालने पहुंचे रेल आईजी जितेंद्र राणा सहित पांच पुलिसकर्मी इस हिंसक झड़प में गंभीर रूप से घायल हो गए। पहली नजर में इसे परीक्षा छूट जाने के डर से उपजा छात्रों का आक्रोश माना गया, मगर पुलिस-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने इसके पीछे एक ‘गहरी साजिश’ और असामाजिक तत्वों की भूमिका की ओर साफ इशारा किया है।

रातों-रात बिगड़ने लगा था माहौल

पटना के जिलाधिकारी डॉ. चंद्रशेखर सिंह और रेल पुलिस के अनुसार, स्टेशन पर तनाव रविवार सुबह नहीं, बल्कि शनिवार-रविवार की रात से ही पनपने लगा था। प्रशासन को आधी रात के आसपास खबर मिली थी कि कुछ संदिग्ध लोग स्टेशन परिसर में इकट्ठा होकर माहौल खराब करने में जुटे हैं। पुलिस ने उन्हें बार-बार समझाने और शांति बनाए रखने की अपील की, फिर भी भीड़ में शामिल कुछ लोग लगातार उग्र बने रहे। प्रशासन का कहना है कि अभ्यर्थियों के लिए पहले से ही दो विशेष ट्रेनें स्टेशन पर मौजूद थीं, इसके बावजूद जानबूझकर अफरा-तफरी फैलाई गई ताकि परीक्षार्थियों को भड़काया जा सके।

बार-बार चेन पुलिंग और ट्रैक जाम करने की चाल

इस पूरे बवाल में पुलिस को सबसे ज्यादा हैरान उपद्रवियों के तौर-तरीकों ने किया। रेल पुलिस के मुताबिक, स्पेशल ट्रेनें खड़ी होने के बावजूद कुछ असामाजिक तत्वों ने जानबूझकर बार-बार ट्रेनों की इमरजेंसी चेन पुलिंग (वैक्यूम खींचना) शुरू कर दी, ताकि ट्रेनें समय पर रवाना न हो सकें। बताया जा रहा है कि सुबह जैसे ही बाकी परीक्षार्थियों की भीड़ स्टेशन पहुंची, इन तत्वों ने अफवाह उड़ा दी कि ट्रेनें लेट हैं और वे परीक्षा में शामिल नहीं हो पाएंगे। करियर का सवाल सामने आते ही आम छात्र आसानी से बहकावे में आ गए और देखते ही देखते सैकड़ों लोग रेलवे ट्रैक पर उतर आए।

क्या पुलिस को निशाना बनाना था मकसद?

जब आंदोलन उग्र हुआ और राजधानी एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनों का परिचालन बाधित होने लगा, तब रेल आईजी जितेंद्र राणा खुद मोर्चे पर पहुंचे। वे बेहद संयम के साथ छात्रों को समझा रहे थे और उनकी मांगें सुन रहे थे, लेकिन भीड़ कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थी। अधिकारियों का मानना है कि साजिश रचने वाले किसी भी कीमत पर समझौता नहीं चाहते थे। जैसे ही पुलिस ने ट्रैक खाली करने की चेतावनी दी, भीड़ के पीछे छिपे असामाजिक तत्वों ने अचानक बड़े पत्थरों और रोड़ों से हमला बोल दिया। एकाएक हुई इस तेज पत्थरबाजी से साफ झलकता है कि पत्थर पहले से जमा करके रखे गए थे, जो एक सुनियोजित साजिश की ओर इशारा करता है।

पुराने पैटर्न पर रेलवे को बनाया गया निशाना

पुलिस-प्रशासन इस घटना को सिर्फ परीक्षा की अव्यवस्था से जोड़कर नहीं देख रहा। साल 2022 में बिहार में हुए ‘अग्निवीर आंदोलन’ के दौरान भी इसी तरह रेलवे स्टेशनों को आग के हवाले किया गया था और ट्रेनों में तोड़फोड़ की गई थी। जानकारों का कहना है कि इस समय देशभर में NEET परीक्षा को लेकर मचे बवाल के बीच बिहार पुलिस की इस परीक्षा में इतनी बड़ी हिंसा भड़कना किसी गहरी राजनीतिक या सामाजिक अस्थिरता पैदा करने वाली साजिश का हिस्सा हो सकती है। उपद्रवियों ने ठीक उसी ‘अग्निवीर पैटर्न’ को अपनाया, जिसमें छात्रों की मजबूरी को ढाल बनाकर देश की संपत्ति को निशाना बनाया जाता है।

6 नामजद, 500 पर एफआईआर

इस बीच दानापुर पाटलिपुत्र स्टेशन पर हुए हंगामे को लेकर रेल पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 6 नामजद समेत 500 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। साथ ही आधे दर्जन छात्रों को गिरफ्तार कर उनसे पूछताछ की जा रही है। इस पथराव की घटना में पटना आईजी जितेंद्र राणा समेत 6 पुलिसकर्मी बुरी तरह घायल हुए हैं और बेहतर इलाज के लिए सभी को दानापुर अनुमंडल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

वीडियो फुटेज खंगाल रही एसआईटी

रेल आईजी जितेंद्र राणा ने इस पूरी साजिश का पर्दाफाश करने और उपद्रवियों को बेनकाब करने के लिए एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन कर दिया है, जिसमें कई डीएसपी और थानाध्यक्षों को शामिल किया गया है। स्टेशन परिसर, प्लेटफॉर्म और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों के अलावा स्थानीय मीडिया और प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा बनाए गए वीडियो फुटेज को भी खंगाला जा रहा है। पुलिस ने साफ कहा है कि मासूम छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले और कानून-व्यवस्था को हाथ में लेने वाले किसी भी असली साजिशकर्ता को बख्शा नहीं जाएगा।

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