PoK में भड़की बगावत से पाकिस्तान बेचैन, प्रदर्शनकारी हो रहे लापता, घरों में घुस रही सेना

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के नेता शौकत नवाज मीर ने छिपे ठिकाने से जारी ऑडियो में सेना और सुरक्षा एजेंसियों पर दमन, जबरन गिरफ्तारियों और लोगों को गायब करने के आरोप लगाए हैं।

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (POK) में लंबे समय से सुलग रहा राजनीतिक असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रमुख नेता शौकत नवाज मीर ने किसी गुप्त ठिकाने से एक ऑडियो संदेश जारी कर पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा एजेंसियों पर गंभीर आरोप मढ़े हैं। उनका कहना है कि जारी आंदोलन को दबाने के लिए पूरे क्षेत्र में दमन का बड़ा अभियान चलाया जा रहा है।

मीर ने स्थानीय निवासियों, विदेशों में बसे कश्मीरी समुदाय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान का सुरक्षा तंत्र और सैन्य प्रतिष्ठान आंदोलन को कुचलने के लिए ‘संरचनात्मक आतंक’ और व्यापक हिंसा का इस्तेमाल कर रहा है।

परिवारों को बनाया जा रहा निशाना

मीर के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियां केवल JAAC की कोर कमेटी के सदस्यों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन परिवारों को भी निशाने पर ले रही हैं जिन्होंने आंदोलन को आर्थिक या सार्वजनिक रूप से समर्थन दिया है। उनका दावा है कि रात के अंधेरे में घरों पर छापेमारी की जा रही है, निजी संपत्ति को क्षति पहुंचाई जा रही है और महिलाओं के साथ भी कथित तौर पर अभद्रता की जा रही है।

‘पाकिस्तानी सेना लोगों को गायब कर रही’

अपने ऑडियो संदेश में मीर ने कहा कि कई कार्यकर्ताओं को बिना किसी स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया के हिरासत में ले लिया गया है, जबकि बड़ी संख्या में लोगों को कथित तौर पर जबरन गायब कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि परिवारों को इन लोगों के ठिकाने या उनकी सुरक्षा के बारे में कोई जानकारी नहीं दी जा रही।

मीर ने POK की वर्तमान स्थिति को मानवीय संकट करार दिया। उनका दावा है कि कोटली, नीलम और रावलाकोट जैसे इलाकों में हाल की झड़पों में कई स्थानीय लोगों की जान गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अर्धसैनिक बलों को सार्वजनिक स्थानों पर एकत्र होने वाले लोगों के खिलाफ सीधे घातक बल प्रयोग की खुली छूट दे दी गई है।

इस्लामाबाद का पूर्ण नियंत्रण

दूसरी ओर, सीमा क्षेत्र पर नजर रखने वाले शीर्ष खुफिया सूत्रों के मुताबिक मौजूदा हालात ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि इस इलाके पर इस्लामाबाद का सीधा और पूरा नियंत्रण है। यहां पंजाब रेंजर्स और फेडरल कॉन्स्टेबुलरी जैसे भारी हथियारों से लैस बलों की तैनाती की गई है, साथ ही संचार और इंटरनेट सेवाओं पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

सूचना का प्रवाह लगभग ठप

सूत्रों के अनुसार, इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद होने के कारण स्थानीय लोग अपनी बात बाहरी दुनिया तक पहुंचाने के लिए ऑडियो रिकॉर्डिंग और वैकल्पिक नेटवर्क का सहारा लेने को मजबूर हैं। इसकी वजह से क्षेत्र में सूचना का आदान-प्रदान लगभग रुक गया है। वहीं, पाकिस्तान का सुरक्षा तंत्र इस आंदोलन को लेकर अपना अलग नैरेटिव भी गढ़ने में जुटा हुआ है।

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