टीवी से शोहरत, 'दबंग 2' में दमदार किरदार, अपने सफर को याद कर भावुक हुईं यह अभिनेत्री

टीवी अभिनेत्री रश्मि देसाई ने बचपन की पुरानी तस्वीरें साझा करते हुए अपने करियर के सफर को याद किया और भावुक हो गईं. 'उतरन' की 'तपस्या' से घर-घर पहचानी जाने वाली रश्मि ने थिएटर को सबसे कम आंका जाने वाला माध्यम बताया.

टीवी जगत की जानी-मानी अभिनेत्री रश्मि देसाई ने हाल ही में अपने बचपन के दिनों को याद किया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने पुराने दौर की कुछ बेहद खूबसूरत और स्टाइलिश तस्वीरें साझा कीं. इन तस्वीरों को साझा करते वक्त रश्मि काफी भावुक नजर आईं.

अपने मन की बात रखते हुए उन्होंने बताया कि बचपन में उन्हें इस बात का अंदाजा तक नहीं था कि किस्मत उन्हें आगे चलकर कहां ले जाएगी. लेकिन एक बात पक्की थी कि उस 'नन्ही रश्मि' ने अपने भीतर के आत्मविश्वास और चमक को कभी फीका नहीं पड़ने दिया.

अभिनेत्री ने अपने इस पूरे सफर में मिले हर सबक, हर उतार-चढ़ाव, मुश्किलों और ईश्वर के आशीर्वाद के लिए दिल से आभार जताया. उनका कहना था कि आज वह जिस मुकाम पर खड़ी हैं, उसमें उनके जीवन के इन तमाम पुराने अनुभवों की बड़ी भूमिका रही है.

टीवी से लेकर बड़े पर्दे तक का सफर

अगर रश्मि देसाई के करियर पर नजर डालें तो उन्होंने साल 2006 में सीरियल 'रावण' के साथ हिंदी टेलीविजन की दुनिया में कदम रखा था. इसके बाद 2000 के दशक के सुपरहिट शो 'उतरन' में 'तपस्या' का किरदार निभाकर वह घर-घर में पहचानी जाने लगीं.

उनका असर सिर्फ धारावाहिकों तक ही सीमित नहीं रहा. वह सलमान खान की फिल्म 'दबंग 2' में भी एक खास किरदार में दिखाई दी थीं. इसके अलावा 'बिग बॉस 13', 'खतरों के खिलाड़ी 6', 'झलक दिखला जा 5' और 'नच बलिए 7' जैसे बड़े रियलिटी शोज में भी उन्होंने अपनी मौजूदगी का जलवा बिखेरा. फिलहाल 40 साल की हो चुकीं रश्मि आखिरी बार मशहूर शो 'वागले की दुनिया' में नजर आई थीं.

थिएटर की दुनिया में सक्रिय

टीवी और फिल्मों के साथ-साथ रश्मि ने हाल के दिनों में थिएटर यानी नाटकों की दुनिया में भी खूब नाम कमाया है. थिएटर कलाकारों की स्थिति पर बात करते हुए उन्होंने कहा था कि हमारे देश में नाटक करने वाले कलाकारों को वह सम्मान और हक नहीं मिल पाता, जिसके वे असल में हकदार हैं.

रश्मि के मुताबिक थिएटर आज भी सबसे कम आंका जाने वाला माध्यम है. एक थिएटर कलाकार दिन-रात कड़ी मेहनत करता है और एक छोटे से परिवार की तरह मिल-जुलकर खुश रहता है. ऐसे कलाकारों को अपनी कला के लिए किसी बाहरी व्यक्ति की मंजूरी या तारीफ की जरूरत नहीं होती.

उन्होंने आगे कहा कि अगर कभी कोई कलाकार असफल भी हो जाए, तो बाकी साथी उसका हाथ थामने के लिए हमेशा खड़े रहते हैं. रश्मि का मानना है कि जिंदगी में नई शुरुआत करने और कुछ नया सीखने के लिए थिएटर सबसे बेहतरीन जरिया है, इसलिए समाज को इन कलाकारों को और ज्यादा इज्जत देनी चाहिए.

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