हिंदी सिनेमा में कई ऐसे कलाकार रहे हैं जिन्होंने अपने जमे-जमाए अभिनय करियर को पीछे छोड़कर भक्ति और अध्यात्म का रास्ता अपना लिया। जायरा वसीम, सना खान और ममता कुलकर्णी के जीवन से जुड़े ऐसे फैसलों से ज्यादातर लोग परिचित हैं। अब इसी कतार में एक और नाम जुड़ गया है — अभिनेत्री प्रनवी तिवारी, जो दौलत और शोहरत से भरी दुनिया को छोड़कर ईश्वर की भक्ति में लीन हो चुकी हैं।
एयर होस्टेस से अभिनय की दुनिया तक का सफर
अभिनय में आने से पहले प्रनवी तिवारी एयर होस्टेस के तौर पर काम करती थीं। बाद में उन्होंने ग्लैमर इंडस्ट्री में कदम रखा और कई बड़े सितारों के साथ विज्ञापनों में काम किया। इनमें कृति सेनन और अदा शर्मा जैसे नाम भी शामिल हैं। कुछ विज्ञापनों में वे अकेली मुख्य चेहरे के रूप में भी नजर आईं।
प्रनवी के पास जीवन में किसी चीज की कमी नहीं थी। पैसा, काम और परिवार का भरपूर साथ — सब कुछ उनके पास था। इसके बावजूद उन्होंने वह राह चुनी, जिसने सबको हैरान कर दिया।
मन में बढ़ता गया अधूरेपन का अहसास
एक बातचीत में प्रनवी तिवारी ने बताया कि वे पूरी तरह एक्टिंग में अपना करियर बनाना चाहती थीं, लेकिन इन सबके बीच भी उनका मन हमेशा बेचैन रहता था। पिछले दो वर्षों से उन्हें लगातार यह महसूस हो रहा था कि उनकी जिंदगी में कुछ अधूरा रह गया है।
प्रेमानंद महाराज के प्रवचनों से बदली सोच
इसी शांति की तलाश में प्रनवी ने फरवरी 2025 में पूज्य प्रेमानंद जी महाराज के प्रवचन सुनना शुरू किया। महाराज जी की बातों ने उनके मन को गहराई तक छू लिया। उन्हें यह समझ आ गया कि जिस सुकून की उनकी आत्मा को तलाश थी, वह इसी राह पर मिलेगा।
वृंदावन में दीक्षा और नया जीवन
हालांकि प्रेमानंद महाराज से दीक्षा लेना आसान नहीं था, लेकिन प्रनवी अपना मन बना चुकी थीं। उन्होंने अपने परिवार से बात की और मई 2026 में सब कुछ छोड़कर हमेशा के लिए वृंदावन पहुंच गईं। वहां एक व्यक्ति की मदद से उनकी मुलाकात प्रेमानंद महाराज से हुई और उन्होंने महाराज जी से दीक्षा ग्रहण कर ली।
प्रनवी का कहना है कि जब से उन्होंने गुरुदेव की शरण ली है, उन्हें लगता है कि उनकी खोज पूरी हो गई है। उन्होंने अपना पूरा जीवन प्रभु के चरणों में समर्पित कर दिया है। आज प्रनवी एक भागवती बन चुकी हैं और वृंदावन में रहकर कृष्ण भक्ति में अपना जीवन बिता रही हैं।
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