अंटार्कटिका के पश्चिमी तट से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। ठंड के मौसम में भी यहां फ्रांस देश के बराबर बड़ी बर्फ की चादर गायब हो चुकी है। इस घटना ने ग्लोबल वार्मिंग को लेकर वैज्ञानिकों की चिंता कई गुना बढ़ा दी है। जिस बेलिंग्सहाउसेन सी इलाके में इस समय भारी मात्रा में बर्फ जमी होनी चाहिए थी, सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि वह पूरा क्षेत्र अब बर्फ से खाली हो चुका है।
इसी बदलाव के चलते अंटार्कटिका के पेनिनसुला में भयानक हीटवेव भी देखने को मिली। जून के महीने में यहां अधिकतम तापमान 15.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो सामान्य से करीब 20 डिग्री ज्यादा रिकॉर्ड किया गया। बर्फ के लुप्त होने से मासूम पेंगुइन और समुद्री जीवों के अस्तित्व पर गहरा संकट खड़ा हो गया है, साथ ही समुद्र का जलस्तर बढ़ने का खतरा भी कई गुना बढ़ गया है।
बेलिंग्सहाउसेन सी से अचानक बर्फ क्यों गायब हुई?
अंटार्कटिका में इस समय सर्दियों का मौसम चल रहा है। आमतौर पर इस सीजन में चारों ओर बर्फ की मोटी परत तेजी से जमती है और सितंबर तक यह अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच जाती है। मगर इस साल जून में ही वैज्ञानिकों को हैरान करने वाले आंकड़े मिले हैं, क्योंकि बेलिंग्सहाउसेन सी का पूरा इलाका पूरी तरह बर्फ मुक्त नजर आ रहा है।
शोध के मुताबिक इस क्षेत्र से करीब 6 लाख 50 हजार स्क्वायर किलोमीटर बर्फ गायब है, जो यूरोप के बड़े देश फ्रांस के कुल क्षेत्रफल के बराबर है। यूनिवर्सिटी ऑफ तस्मानिया के बर्फ विशेषज्ञ डॉ. विल हॉब्स ने इस हालात पर गहरी चिंता जताई है।
जून के महीने में यहां बर्फ का न होना बेहद परेशान करने वाला है।
पिछले चार वर्षों में यह तीसरी बार है जब बर्फ का स्तर इतना कम दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब इस क्षेत्र में दोबारा बर्फ जमना बहुत मुश्किल हो सकता है, और इसके पीछे महासागर के तापमान में आ रहे बदलावों को मुख्य वजह माना जा रहा है।
क्या अंटार्कटिका की गर्मी से डूबेंगे तटीय शहर?
बर्फ न जमने का सीधा असर अंटार्कटिका के विशाल ग्लेशियरों पर पड़ रहा है। बेलिंग्सहाउसेन सी के ठीक पश्चिम में पाइन आइलैंड और थवाइट्स ग्लेशियर मौजूद हैं। थवाइट्स ग्लेशियर को दुनिया भर में ‘डूम्सडे ग्लेशियर’ भी कहा जाता है और इसे अंटार्कटिका में सबसे तेजी से पिघलने वाले बर्फ के पहाड़ों में गिना जाता है।
समुद्र में तैरती बर्फ की चादरें इन ग्लेशियरों के लिए सुरक्षा कवच का काम करती हैं। जब यह सुरक्षात्मक बर्फ लंबे समय तक गायब रहेगी, तो ग्लेशियर तेजी से टूट सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया के ब्यूरो ऑफ मीटियोरोलॉजी के डॉ. फिल रीड का कहना है कि तटीय इलाकों में बर्फ खत्म होने से ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार कई गुना बढ़ जाएगी।
इसके चलते आने वाले समय में दुनिया भर के समुद्रों का जलस्तर तेजी से ऊपर उठेगा और कई बड़े तटीय शहरों के डूबने का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाएगा। ग्लोबल हीटिंग के इस सीधे असर से करोड़ों लोगों का जीवन प्रभावित हो सकता है।
बदलते मौसम के अहम आंकड़े क्या कहते हैं?
अंटार्कटिका की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए कुछ आंकड़ों पर नजर डालना जरूरी है, जो साफ बताते हैं कि ग्लोबल वॉर्मिंग किस रफ्तार से बढ़ रही है।
- गायब बर्फ का क्षेत्रफल: करीब 6,50,000 स्क्वायर किलोमीटर (फ्रांस देश के बराबर बड़ा इलाका)।
- रिकॉर्ड तापमान: जून 2026 में एस्पेरांजा बेस पर तापमान 15.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा।
- सामान्य औसत तापमान: जून में इस क्षेत्र का सामान्य तापमान माइनस 6.2 डिग्री सेल्सियस रहता है।
- कुल समुद्री बर्फ की कमी: 10 जून को पूरे महाद्वीप में 11.4 मिलियन स्क्वायर किलोमीटर बर्फ थी, जबकि ऐतिहासिक औसत 12.6 मिलियन होना चाहिए था।
- जीवों पर प्रभाव: सम्राट पेंगुइन की प्रजाति अब अंतरराष्ट्रीय संकटग्रस्त सूची में ‘एंडेंजर्ड’ घोषित हो चुकी है।
पेंगुइन और समुद्री जीवों पर मौत का खतरा क्यों?
बर्फ के इस तरह गायब होने का सबसे पहला और दर्दनाक असर वहां के वन्यजीवों पर दिख रहा है। बेलिंग्सहाउसेन सी का तट पेंगुइन के रहने का एक प्रमुख स्थान माना जाता है। साल 2022 के आखिर में इस इलाके में एक बड़ी त्रासदी देखी गई थी, जब बर्फ समय से पहले पिघलने के कारण सम्राट पेंगुइन के हजारों बच्चों की मौत हो गई थी।
ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे के डॉक्टर पीटर फ्रेटवेल इस गिरावट पर लगातार शोध कर रहे हैं।
बर्फ का देर से बनना और जल्दी टूटना पेंगुइन के लिए गंभीर समस्या है।
इसके चलते पेंगुइन के बच्चों का ब्रीडिंग सक्सेस रेट बहुत कम हो गया है। संयुक्त राष्ट्र के सलाहकारों ने पेंगुइन को अंतरराष्ट्रीय संकटग्रस्त प्रजातियों की सूची में ‘एंडेंजर्ड’ श्रेणी में डाल दिया है। इसके अलावा एडेल पेंगुइन की संख्या भी तेजी से गिर रही है। सील मछलियों को गर्मियों में सुरक्षित रहने के लिए दूसरी जगहों पर माइग्रेट करना पड़ रहा है, वहीं क्रिल मछलियों के छिपने की जगह भी पूरी तरह खत्म हो गई है। क्रिल को अंटार्कटिका के पूरे फूड वेब का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
सर्दियों में रिकॉर्ड तोड़ हीटवेव की वजह क्या है?
इस महीने अंटार्कटिका के पेनिनसुला में तापमान का एक बेहद खतरनाक रिकॉर्ड दर्ज हुआ है। अर्जेंटीना के एस्पेरांजा बेस पर 5 और 6 जून को भयंकर गर्मी महसूस की गई, जब वहां का अधिकतम तापमान क्रमशः 15.4 डिग्री और 13.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। हैरानी की बात यह है कि जून में यहां का सामान्य औसत तापमान माइनस 6.2 डिग्री सेल्सियस होता है, यानी तापमान सामान्य से 20 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा ऊपर चला गया।
इससे पहले साल 1998 में यहां जून का रिकॉर्ड तापमान 13.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ था। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस भीषण हीटवेव के पीछे भी समुद्र में बर्फ की कमी ही जिम्मेदार है। सामान्य दिनों में समुद्र की बर्फ उत्तर से आने वाली गर्म हवाओं को ठंडा करने में मदद करती है, लेकिन बर्फ न होने के कारण गर्म हवाएं सीधे जमीन तक पहुंचकर मौसम को बिगाड़ रही हैं।
https://hindi.news18.com/world/rest-of-world-antarctica-west-coast-sea-ice-loss-france-size-temperature-rise-10567490.html