अयोध्या स्थित राम मंदिर के दान पात्रों से चढ़ावे की राशि चोरी होने की अफवाहों को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर शासन ने तत्काल संज्ञान लेते हुए एक हाई-प्रोफाइल विशेष जांच दल (SIT) गठित कर दिया है। लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत (IAS) की अध्यक्षता वाली यह तीन सदस्यीय समिति मामले के प्रशासनिक, पुलिसिया और वित्तीय—तीनों पहलुओं की पड़ताल करेगी।
ट्रस्ट की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से एसआईटी जांच की मांग की गई थी, जिसे सरकार ने तुरंत मंजूरी दे दी। शासन का कहना है कि यह विशेष टीम न सिर्फ अफवाहों की जमीनी सच्चाई सामने लाएगी, बल्कि इस प्रोपेगैंडा के पीछे सक्रिय चेहरों को भी बेनकाब करेगी।
एसआईटी में कौन-कौन शामिल
शासन ने जांच की जिम्मेदारी प्रदेश के अनुभवी अधिकारियों को सौंपी है। तीन सदस्यीय समिति का स्वरूप इस प्रकार है:
- विजय विश्वास पंत (IAS – अध्यक्ष): वर्तमान में लखनऊ के मंडलायुक्त हैं और पूरी जांच समिति की अध्यक्षता करेंगे।
- किरन एस (IPS): आईजी रेंज के रूप में मामले के आपराधिक, सुरक्षा व्यवस्था और सोशल मीडिया पर फैली अफवाह के पुलिसिया पक्ष की जांच संभालेंगे।
- नील रतन (विशेष सचिव, वित्त): मंदिर के ऑडिट, दान पेटियों की काउंटिंग प्रक्रिया और वित्तीय लेन-देन के तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच करेंगे।
तय समय में देनी होगी रिपोर्ट
मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश के अनुसार इस समिति को जांच धीमी रफ्तार से नहीं, बल्कि तेजी से पूरी करनी होगी। एसआईटी के लिए काम पूरा करने और रिपोर्ट सौंपने का सख्त समय-सीमा निर्धारित की गई है और सरकार ने जल्द से जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
एक युवक हिरासत में
दान पात्रों में चढ़ावे की रकम के कथित गबन के मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार चढ़ावे की राशि की गिनती से जुड़े कई कर्मचारी इस समय सीधे जांच के दायरे में आ गए हैं। एसओजी (SOG) टीम ने रुदौली के शुजागंज क्षेत्र के मीनापुर फगौली निवासी एक युवक को हिरासत में ले लिया है। पुलिस हिरासत में इस संदिग्ध से कड़ी पूछताछ की जा रही है, ताकि मामले से जुड़े अहम तथ्यों और इसमें शामिल अन्य लोगों तक पहुंचा जा सके। सूत्रों का दावा है कि पूछताछ और छापेमारी के दौरान आरोपी के पास से कुछ संदिग्ध नकदी भी बरामद की जा चुकी है।
किस आधार पर हो रही जांच
मंदिर परिसर के भीतर हुई इस कथित हेराफेरी को समझने के लिए सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को जांच का सबसे अहम आधार बनाया गया है। इसके साथ ही दान पेटियों के खुलने से लेकर पैसों की गिनती तक के सभी तकनीकी और भौतिक सबूतों की फोरेंसिक स्तर पर पड़ताल की जा रही है। आशंका को देखते हुए एजेंसियां कई अन्य लोगों की संभावित भूमिका की भी गहराई से जांच कर रही हैं।
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