उज्जैन में मांस-मटन व मछली की दुकानें शहर से बाहर करने की तैयारी, महापौर ने मांगी योजना

धर्मनगरी उज्जैन में महापौर ने नॉनवेज दुकानों को शहरी सीमा से बाहर ले जाने का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस पहल पर जहां कई लोग समर्थन में हैं, वहीं व्यापारी इसे सैकड़ों परिवारों की आजीविका पर संकट बता रहे हैं।

मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में मांस-मटन और मछली की दुकानों को शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित करने की कवायद ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। वाराणसी मॉडल की तर्ज पर आगे बढ़ते हुए महापौर मुकेश टटवाल ने नगर निगम आयुक्त को इस दिशा में योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। प्रस्ताव सामने आते ही शहरवासियों की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

धार्मिक नगरी में महाकाल मंदिर से कुछ ही दूरी पर सैकड़ों मांस की दुकानें संचालित होती हैं। यहीं के तोपखाना क्षेत्र के नॉनवेज व्यापारियों का कहना है कि शहर में करीब 50 से अधिक चिकन और मटन की दुकानें चल रही हैं।

व्यापारियों की चिंता और आजीविका का सवाल

व्यापारियों का तर्क है कि यदि इन दुकानों को शहर से बाहर किया गया तो सैकड़ों लोगों की आजीविका पर असर पड़ेगा और आम लोगों को सस्ता भोजन मिलने में भी कठिनाई होगी। दूसरी ओर, कई नागरिकों ने इस पहल का समर्थन करते हुए इसे धार्मिक नगरी की गरिमा के अनुकूल फैसला बताया है। उनका कहना है कि महाकाल मंदिर मार्ग, तोपखाना, बेगमबाग और अंडा गली जैसे क्षेत्रों में नॉनवेज दुकानों के कारण श्रद्धालुओं को असहजता का सामना करना पड़ता है।

पहले लागू हुई थी शराबबंदी

उज्जैन को लंबे समय से मध्यप्रदेश की धार्मिक राजधानी के रूप में विशेष पहचान प्राप्त है। विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल की नगरी होने के साथ ही यहां आस्था के अनेक प्राचीन केंद्र मौजूद हैं, जहां प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इसी धार्मिक महत्व को देखते हुए 1 अप्रैल 2025 से प्रदेश के कई प्रमुख तीर्थ शहरों में शराबबंदी लागू की गई थी। इसके बाद अब शहर में नॉनवेज दुकानों को बंद करने की मांग भी एक बार फिर जोर पकड़ती नजर आ रही है।

कैसे बंद होगा शहर में नॉनवेज

महापौर मुकेश टटवाल ने कहा कि आस्था की नगरी में पवित्रता और परंपराओं का सम्मान सबसे ऊपर है। उन्होंने कहा कि जब शहर में शराबबंदी लागू की जा सकती है, तो मांस-मटन और मछली की दुकानों को भी शहरी सीमा से बाहर किया जाना चाहिए। इस संबंध में नगर निगम कमिश्नर को प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो भविष्य में शहर की सीमा के भीतर नॉनवेज दुकानों का संचालन पूरी तरह बंद किया जा सकता है।

नागरिकों की प्रतिक्रिया

अर्जुन भदौरिया ने कहा कि इस बार भी उन्हें भरोसा नहीं है कि दुकानें वास्तव में शहर से बाहर की जाएंगी। हालांकि उन्होंने कहा कि यदि महापौर सचमुच मांस-मटन की दुकानें हटाने में सफल होते हैं, तो हिंदूवादी संगठन उनका दूध से स्नान कराकर सम्मान करेंगे।

उल्लेखनीय है कि महाकाल मंदिर पहुंच मार्ग के कई प्रमुख रास्तों पर मांस की दुकानें संचालित हो रही हैं। इनमें हरिफाटक से बेगमबाग, मालीपुरा से तोपखाना, बसफोड़ गली से तोपखाना, सब्जी मंडी-छत्री चौक, पटनी बाजार से महाकाल मार्ग और तेलीवाड़ा से छोटा पुल होते हुए खारकुआं तक का क्षेत्र शामिल है। इसके अलावा पूरे शहर में बड़ी संख्या में मांस-मटन और मछली की दुकानें चलने की जानकारी सामने आई है।

तोपखाना क्षेत्र के निवासी और मेडिकल व्यवसायी पवन जैन ने कहा कि महापौर ने यह बहुत अच्छा सोचा कि धर्म नगरी में ऐसी दुकानें न हों। उन्होंने कहा कि जो लोग यह व्यवसाय करते हैं, उन्हें नगर निगम की सीमा से बाहर भेजा जाना चाहिए।

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