बेटे की जान बचाने में करंट की चपेट में आई मां, बेहोश होने पर परिवार ले गया 'बिजली बाबा' के पास

बेगूसराय में एक महिला अपने बेटे को करंट से बचाने के दौरान खुद बिजली की चपेट में आ गई और बेहोश हो गई। परिजन उसे अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़फूंक के लिए बाबा के पास ले गए, जहां उसकी मौत हो गई।

बिहार के बेगूसराय में एक मां ने अपने बेटे की जान बचाने की कोशिश में अपनी जान गंवा दी। करंट की चपेट में आए बेटे को बचाने के दौरान वह खुद बिजली की चपेट में आ गई और इस हादसे में उसकी दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है और पूरे गांव में शोक का माहौल है।

कैसे हुआ हादसा

यह मामला बछवारा थाना क्षेत्र के चमथा गांव का है। मृतका की पहचान गांव निवासी मिनट राय की पत्नी रंजू देवी के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि उनके घर में निर्माण कार्य चल रहा था और बिजली के पोल के पास पहले से ही पूस (फूस) रखा हुआ था। इसी दौरान महिला का बेटा पूस लाने गया और करंट की चपेट में आ गया।

परिजनों के मुताबिक, बेटे को तड़पता देख रंजू देवी दौड़कर मौके पर पहुंचीं और किसी तरह उसे करंट से बचा लिया। लेकिन जैसे ही उन्होंने पोल के पास से पूस का बोझ उठाने की कोशिश की, वह खुद करंट की चपेट में आ गईं और मौके पर ही बेहोश होकर गिर पड़ीं।

अस्पताल के बजाय बाबा के पास ले गए परिजन

हादसे के बाद परिजन उन्हें अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक कराने के लिए स्थानीय स्तर पर मशहूर एक तथाकथित 'बिजली बाबा' के पास ले गए। परिजनों का आरोप है कि वहीं उनकी मौत हो गई। घटना के बाद ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि अगर समय रहते उन्हें अस्पताल पहुंचाया जाता तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी।

इस दर्दनाक मौत ने एक बार फिर अंधविश्वास और झाड़-फूंक के भरोसे इलाज कराने की प्रवृत्ति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का भी कहना है कि बिजली का करंट लगने के बाद सबसे जरूरी तत्काल चिकित्सकीय उपचार ही होता है।

पुलिस जांच में जुटी

घटना की सूचना मिलते ही बछवारा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बेगूसराय सदर अस्पताल भेज दिया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।

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