नीति आयोग की बैठक खत्म होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के बीच हुई मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। इस भेंट की तस्वीरें और दोनों नेताओं की बॉडी लैंग्वेज को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे बीजेपी की कोई गहरी रणनीति छिपी हो सकती है।
कांग्रेस की चिंता की असली वजह
विशेषज्ञों के अनुसार बीजेपी तेलंगाना में कांग्रेस को कमजोर करने के लिए रेवंत रेड्डी को अपने हाईकमान से अलग करने की योजना बना रही है। रेवंत रेड्डी राज्य में कांग्रेस की जीत के सबसे मजबूत स्तंभ माने जाते रहे हैं। अगर उनके और दिल्ली नेतृत्व के बीच दूरी बढ़ती है तो इसका सीधा नुकसान कांग्रेस को और फायदा बीजेपी को होगा।
सोशल मीडिया पर भी इस मुलाकात को लेकर बहस छिड़ गई है। विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं कि दोनों नेताओं के बीच भीतर ही भीतर कोई तालमेल चल रहा है।
तस्वीरों में दिखी केमिस्ट्री
नीति आयोग की बैठक के बाद ली गई तस्वीरों में दोनों नेताओं की नजदीकी साफ झलक रही है। विशेषज्ञों ने इन तस्वीरों में दिख रही बॉडी लैंग्वेज का गहराई से मनोवैज्ञानिक विश्लेषण किया है। उनके मुताबिक रेवंत रेड्डी के झुकने और हाथ मिलाने के अंदाज में सम्मान और आत्मविश्वास दोनों दिखाई देते हैं, जबकि पीएम मोदी का मुस्कुराते हुए दूसरा हाथ ऊपर रखना उनके अनुभव और वरिष्ठता को दर्शाता है।
ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं और बीजेपी कार्यकर्ता इनसे बेहद उत्साहित हैं। वहीं कांग्रेस के लिए ये तस्वीरें बड़ा सिरदर्द बन गई हैं, क्योंकि इनसे यह संदेश जा रहा है कि रेवंत और मोदी के रिश्ते काफी मजबूत हैं। रेवंत रेड्डी पहले भी पीएम मोदी को 'बड़ा भाई' कह चुके हैं, जिससे दोनों के बीच किसी गुप्त समझौते की अफवाहों को लगातार बल मिल रहा है।
मीनाक्षी नटराजन मामले में उठे सवाल
इस पूरे प्रकरण में एक नया विवाद भी जुड़ गया है। कांग्रेस की तेलंगाना प्रभारी मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन खारिज हो गया था। मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दावा किया है कि इस मामले की अंदरूनी जानकारी कांग्रेस के नेताओं ने ही लीक की थी। इसके बाद से ही शक की सुई रेवंत रेड्डी और उनके करीबियों की ओर घूम रही है।
विपक्ष का कहना है कि यह जानकारी रेवंत रेड्डी की मर्जी के बिना बाहर नहीं जा सकती थी। बीआरएस के प्रवक्ता मन्ने कृषांक ने कहा है कि अगर रेवंत रेड्डी निर्दोष हैं तो उन्हें तुरंत इस पूरे मामले की जांच करानी चाहिए। इस विवाद ने कांग्रेस के भीतरी कलह को खुलकर सामने ला दिया है।
केटीआर का 'जोड़ी' सरकार वाला आरोप
बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव यानी केटीआर ने कांग्रेस और बीजेपी पर बेहद गंभीर आरोप मढ़े हैं। उनका दावा है कि तेलंगाना में रेवंत रेड्डी की सरकार असल में बीजेपी और मोदी ही चला रहे हैं। उन्होंने इसे केंद्र की मोदी और राज्य की 'जोड़ी' सरकार करार दिया है।
केटीआर का आरोप है कि एक पॉक्सो (POCSO) केस में एक केंद्रीय मंत्री के बेटे को नौ दिनों तक बचाया गया, और आपसी तालमेल के बिना ऐसा संरक्षण मिलना संभव ही नहीं था। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि पीएम मोदी ने खुद रेवंत रेड्डी पर 'आरआर टैक्स' वसूलने का आरोप लगाया था, फिर भी केंद्र सरकार ने उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की। केटीआर के अनुसार मोदी ही रेवंत रेड्डी को हर मोर्चे पर बचा रहे हैं।
2028 के चुनाव पर बीजेपी की नजर
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बीजेपी का असली निशाना साल 2028 का तेलंगाना विधानसभा चुनाव है। राज्य की सत्ता हासिल करने के लिए पार्टी एक दूरगामी रणनीति बुन रही है। इसके तहत एक ओर वह रेवंत रेड्डी को घेर रही है, वहीं दूसरी ओर उन्हें अपने करीब दिखाकर कांग्रेस हाईकमान की नजरों में संदिग्ध बना रही है। अगर रेवंत को कांग्रेस से अलग कर दिया जाए तो राज्य में पार्टी के पास कोई दूसरा बड़ा चेहरा नहीं बचेगा।
विश्लेषक तेलकपेल्ली रवि के मुताबिक रेवंत रेड्डी फिलहाल पार्टी बदलने वाले नहीं हैं, क्योंकि ऐसा करते ही उनकी मुख्यमंत्री की कुर्सी तुरंत चली जाएगी। लेकिन बीजेपी यह धारणा बनाने में कामयाब रही है कि रेवंत के साथ उसके रिश्ते काफी मधुर हैं। खुद रेवंत रेड्डी भी इस नैरेटिव का खुलकर विरोध नहीं कर रहे हैं, शायद वे यह दिखाना चाहते हैं कि उनके संबंध सभी के साथ बेहतर हैं।
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