बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय में हंगामा, धारा 52 लागू करने और कुलगुरु के इस्तीफे की मांग पर छात्रों-कर्मचारियों का धरना

भोपाल के बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय में कुलगुरु प्रो. एस.के. जैन के इस्तीफे और धारा 52 लागू करने की मांग को लेकर छात्र पिछले 30 घंटे से अनिश्चितकालीन धरने पर हैं, अब कर्मचारी संघ ने भी आंदोलन को समर्थन दे दिया है।

भोपाल का सबसे बड़ा शैक्षणिक संस्थान बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय इन दिनों आंदोलन का केंद्र बना हुआ है। परिसर में छात्रों और कर्मचारियों का विरोध दिन-ब-दिन तेज होता जा रहा है। कुलगुरु प्रो. एस.के. जैन के इस्तीफे और विश्वविद्यालय में धारा 52 लागू किए जाने की मांग को लेकर छात्र पिछले 30 घंटे से अनिश्चितकालीन धरने पर डटे हुए हैं। अब इस आंदोलन को विश्वविद्यालय के कर्मचारियों का भी समर्थन मिल गया है, जिससे टकराव और गहराता जा रहा है।

छात्रों का आरोप और मांगें

धरने पर बैठे छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय की व्यवस्थाएं पूरी तरह बिखर चुकी हैं और प्रशासनिक स्तर पर कई अहम फैसले लंबे समय से अटके पड़े हैं। छात्रों की मांग है कि मौजूदा हालात को देखते हुए विश्वविद्यालय में धारा 52 लागू कर प्रशासन को सीधे शासन के अधीन ले लिया जाना चाहिए, ताकि यहां की व्यवस्थाओं को पटरी पर लाया जा सके।

प्रदर्शनकारी छात्रों ने परिसर में कुलगुरु के खिलाफ पोस्टर भी चस्पा किए हैं, जिन पर “कुलपति वांटेड” और “कुलपति लापता” जैसे नारे लिखे हुए हैं।

कर्मचारी संघ भी आंदोलन में कूदा

दूसरी ओर बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ भी अब खुलकर आंदोलन के समर्थन में आ गया है। संघ का आरोप है कि पिछले दो वर्षों से कर्मचारियों के इंक्रीमेंट रोक दिए गए हैं और अनुकंपा नियुक्तियों जैसे मामलों में भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही। संघ के अनुसार कर्मचारियों से जुड़े कई प्रशासनिक आदेश लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा।

कर्मचारी नेताओं का आरोप है कि कुलगुरु न सिर्फ कर्मचारियों की समस्याओं की अनदेखी कर रहे हैं, बल्कि उच्च शिक्षा विभाग और शासन के निर्देशों का भी पालन नहीं किया जा रहा है। कर्मचारियों का यह भी कहना है कि जानकारी छिपाने और कर्मचारियों को प्रताड़ित करने जैसी शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं।

सोमवार से सड़कों पर उतरने की चेतावनी

आंदोलन को लेकर स्थिति अब और गंभीर होती दिख रही है। कर्मचारी संघ ने ऐलान किया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं हुआ तो सोमवार से कर्मचारी सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। वहीं छात्र संगठनों ने भी चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ने पर मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा।

प्रशासन की चुप्पी

परिसर में बढ़ते विरोध और छात्रों-कर्मचारियों की एकजुटता ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आंदोलन के और विस्तार लेने से आने वाले दिनों में विवाद और गहराने की आशंका है। अब सभी की निगाहें उच्च शिक्षा विभाग और शासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

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