समस्तीपुर के वैज्ञानिकों ने तैयार किया जिंक से भरपूर 'सुपर राइस', पोषण के साथ किसानों को भी फायदा

समस्तीपुर के डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक हाई-जिंक धान की नई किस्म बायो-45 विकसित कर रहे हैं, जिसका बीज तैयार करने और लॉन्चिंग की तैयारी अंतिम चरण में है। यह किस्म कुपोषण से लड़ाई में अहम भूमिका निभा सकती है।

देश में आज भी बड़ी संख्या में बच्चे कुपोषण जैसी गंभीर समस्या का सामना कर रहे हैं, जिसका सीधा असर उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर पड़ता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए वैज्ञानिक लगातार ऐसे खाद्यान्न तैयार करने में जुटे हैं, जिनमें जरूरी पोषक तत्व अधिक मात्रा में मौजूद हों। इसी कोशिश के तहत बिहार के समस्तीपुर स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (आरपीसीएयू) के वैज्ञानिक धान की एक विशेष नई किस्म विकसित कर रहे हैं। इस किस्म को बायो-45 नाम दिया गया है, जिसमें सामान्य धान की तुलना में जिंक की मात्रा अधिक बताई जा रही है।

शोध अंतिम चरण में

जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक हाई-जिंक वाले इस धान की नई प्रजाति पर लंबे समय से शोध कर रहे हैं। फिलहाल इसके बीज को तैयार करने का काम अंतिम चरण में पहुंच चुका है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह धान पोषण की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

पोषण स्तर में सुधार की उम्मीद

बायो-45 धान की सबसे बड़ी खासियत इसमें मौजूद जिंक की अधिक मात्रा है। जिंक शरीर के विकास और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए एक आवश्यक पोषक तत्व माना जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि लोग इस धान से बने चावल का नियमित सेवन करें, तो उन्हें भोजन के माध्यम से ही पर्याप्त मात्रा में जिंक उपलब्ध हो सकेगा। इससे बच्चों समेत आम लोगों के पोषण स्तर में सुधार आने की संभावना है।

स्वास्थ्य समस्याओं में लाभकारी

विशेषज्ञों का मानना है कि यह धान खासकर उन इलाकों के लिए ज्यादा उपयोगी हो सकता है, जहां बच्चों में कुपोषण की समस्या अधिक देखने को मिलती है। भोजन के जरिए जरूरी पोषक तत्व मिलने से कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है।

लॉन्चिंग की तैयारी पूरी होने को

सूत्रों के मुताबिक बायो-45 धान की लॉन्चिंग की तैयारी भी अंतिम दौर में है। उम्मीद है कि जल्द ही यह किस्म किसानों और आम लोगों के लिए उपलब्ध हो जाएगी। सरकार भी पोषक तत्वों से भरपूर फसलों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दे रही है, ताकि लोगों को उनके रोजमर्रा के भोजन से ही बेहतर पोषण मिल सके।

कुपोषण से लड़ाई में अहम भूमिका

वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि चावल में पर्याप्त मात्रा में जिंक उपलब्ध हो जाए, तो लोगों की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में बड़ी मदद मिलेगी। फिलहाल समस्तीपुर के वैज्ञानिक इस अहम शोध को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में बायो-45 धान की यह नई किस्म कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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