'फीफा में सुरक्षा कड़ी कर लो, कभी भी लैंड हो सकते हैं ड्रोन', FBI के सिस्टम में सेंध लगाकर ईरानी हैकर्स ने दी खुली चेतावनी

अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा की मेजबानी में शुरू हुए फीफा वर्ल्ड कप 2026 पर साइबर हमले का खतरा मंडरा रहा है। ईरान से जुड़े हैकर ग्रुप 'हंडाला' ने FBI के जासूसी ड्रोन सिस्टम को हैक करने का दावा करते हुए अमेरिकी टीम को निशाना बनाने की धमकी दी है।

अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा की संयुक्त मेजबानी में फीफा वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत होते ही इस खेल महाकुंभ पर साइबर आतंक का बड़ा साया मंडराने लगा है। ईरान से जुड़े और फिलिस्तीन समर्थक खतरनाक हैकर समूह 'हंडाला' ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी खुफिया एजेंसी FBI के हाई-टेक जासूसी ड्रोन (FPV) के पूरे तंत्र को अपने कब्जे में ले लिया है। इस दावे के बाद सुरक्षा एजेंसियों में खलबली मच गई है। हैकर्स ने अमेरिकी मेन्स नेशनल टीम (USMNT) को निशाना बनाने की खुलेआम धमकी दी है।

मेजबान अमेरिका को ईरानी हैकर्स ने दी सीधी चुनौती

गुरुवार यानी 11 जून से तीनों देशों की मेजबानी में इतिहास का सबसे बड़ा फीफा वर्ल्ड कप शुरू हो चुका है। जंग के माहौल के बीच अमेरिका ने भी इसकी मेजबानी का जिम्मा संभाला है, लेकिन यही फैसला अब उसके गले की फांस बनता दिख रहा है। हाल की रिपोर्टों के अनुसार ईरान की ओर से इस आयोजन को दहलाने की धमकी दी गई है। हैकर्स ने सीधे तौर पर कहा है, 'अपनी सुरक्षा बढ़ा लो, क्योंकि हमारे निशाने पर कई टीमें हैं और ये ड्रोन कभी भी तुम्हारी टीम की बस में उतर सकते हैं।'

FBI के FPV ड्रोन हैक करने का दावा

जिहादी और साइबर समूहों पर नजर रखने वाली प्रतिष्ठित संस्था 'SITE इंटेलिजेंस ग्रुप' की रिपोर्ट के मुताबिक, फिलिस्तीन समर्थक और ईरान से जुड़े हैकर ग्रुप 'हंडाला' ने एक खौफनाक बयान जारी किया है। हैकर्स का दावा है कि उन्होंने आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए तैनात किए गए FBI के हाई-टेक 'फर्स्ट-पर्सन व्यू' (FPV) ड्रोन को पूरी तरह हैक कर लिया है। उनका कहना है कि बीते कई महीनों से वे अमेरिकी एजेंसी की हर तस्वीर, डेटा और संदिग्धों की सूची जैसी संवेदनशील जानकारी अपने कब्जे में लिए हुए हैं।

अमेरिकी टीम के मैच के दिन धमकी

जिस दिन अमेरिकी मेन्स नेशनल टीम (USMNT) पराग्वे के खिलाफ अपने वर्ल्ड कप अभियान की शुरुआत करने जा रही थी, उसी मौके पर हैकर ग्रुप 'हंडाला' ने खुलकर धमकाते हुए कहा, 'बेहतर होगा कि तुम लोग वर्ल्ड कप की सुरक्षा और मजबूत कर लो, क्योंकि इसमें हिस्सा ले रहीं कुछ टीमें हमें बिल्कुल पसंद नहीं हैं। यह मत भूलना कि FPV ड्रोन हर जगह मौजूद हैं; तुम्हें कभी पता नहीं चलेगा कि कब कोई ड्रोन सीधे तुम्हारी टीम की बस के भीतर पहुंच जाए।'

हैकर्स के अनुसार, इन ड्रोन में फेशियल रिकग्निशन यानी चेहरा पहचानने की तकनीक और लाइसेंस प्लेट स्कैनिंग जैसे बेहद उन्नत फीचर मौजूद हैं, जिन्हें अमेरिका ने आतंकवाद से निपटने के लिए तैनात किया था। हालांकि 'SITE इंटेलिजेंस' ने हैकर्स द्वारा जारी कुछ वीडियो और फुटेज को फर्जी करार दिया है और इन्हें अमेरिकी पुलिस के पुराने वीडियो बताया है। इसके बावजूद इस धमकी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।

काश पटेल का ईमेल हैक कर चुका है यह समूह

'हंडाला' कोई मामूली हैकर समूह नहीं है। यह वही समूह है जिसने मार्च 2026 में FBI डायरेक्टर काश पटेल का निजी ईमेल अकाउंट तक हैक कर लिया था और उनकी निजी तस्वीरें तथा 2010 से 2019 के बीच के कई गोपनीय दस्तावेज ऑनलाइन लीक कर दिए थे। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इस समूह के सदस्यों की पहचान बताने वाले के लिए 10 मिलियन डॉलर यानी करीब 83 करोड़ रुपये के इनाम की घोषणा कर रखी है।

अमेरिकी न्याय विभाग पहले ही आगाह कर चुका था कि फरवरी 2026 में तेहरान पर हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों के बाद ईरान समर्थित साइबर हमलावर अमेरिका को भारी नुकसान पहुंचाने की फिराक में हैं, और अब वर्ल्ड कप को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

विवादों और सुरक्षा चूक के साये में टूर्नामेंट

इस बार वर्ल्ड कप शुरू होते ही विवादों और सुरक्षा चूक की अफवाहों से घिर गया है। एक ओर जहां कई देशों के फैंस और पत्रकारों को अमेरिकी वीजा हासिल करने में भारी दिक्कतें झेलनी पड़ीं, वहीं अफ्रीका के नंबर वन अंपायर उमर अर्टन को आतंकवादियों से कथित संबंध के झूठे आरोप में मियामी एयरपोर्ट से ही वापस डिपोर्ट कर दिया गया।

दूसरी ओर, गुरुवार को मैक्सिको सिटी में हुए ओपनिंग मैच के दौरान स्टेडियम के बाहर मजदूरों और लापता नागरिकों के हक में जबरदस्त हिंसा भड़क उठी, जिसके बाद पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े।

युद्ध की मार झेल रही ईरानी टीम

अमेरिका के साथ जारी युद्ध के चलते ईरान की फुटबॉल टीम को अपना ट्रेनिंग कैंप एरिजोना से हटाकर मैक्सिको के तिजुआना में स्थानांतरित करना पड़ा। गुरुवार को जब ईरानी टीम मीडिया के सामने आई, तो उसके 26 में से सिर्फ 12 खिलाड़ी ही नजर आए और स्टार स्ट्राइकर मेहदी तारेमी भी गायब रहे।

ईरान के राजदूत ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी पाबंदियों के कारण ईरानी टीम को मैच वाले दिन ही अमेरिका में प्रवेश मिलेगा और मैच खत्म होते ही तुरंत देश छोड़ना होगा। साफ है कि खेल का यह मैदान अब पूरी तरह जियोपॉलिटिक्स और साइबर वॉर का अखाड़ा बन चुका है।

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