विश्व प्रसिद्ध खाटूश्याम जी मंदिर में दर्शन की योजना बना रहे श्रद्धालुओं के लिए एक अहम जानकारी सामने आई है। श्री श्याम मंदिर कमेटी ने बाबा श्याम की दैनिक आरतियों के समय में बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत अब श्रृंगार आरती और संध्या आरती बदले हुए समय पर होंगी। मंदिर प्रशासन ने भक्तों से अनुरोध किया है कि दर्शन और आरती में शामिल होने से पहले वे नई समय-सारणी की जानकारी जरूर ले लें।
क्यों बदला गया आरती का समय
श्री श्याम मंदिर कमेटी के मंत्री मानवेंद्र सिंह चौहान के अनुसार मंदिर की परंपराओं के अनुरूप समय-समय पर आरती के समय में फेरबदल किया जाता है। ज्येष्ठ (अधिक) शुक्ल पक्ष से ज्येष्ठ (अधिक) कृष्ण पक्ष आरंभ होने के कारण आरती की समय-सारणी में संशोधन किया गया है। इस बदलाव का मकसद मंदिर की धार्मिक परंपराओं का पालन करना और श्रद्धालुओं को व्यवस्थित ढंग से दर्शन कराना है।
नई व्यवस्था के मुताबिक अब श्रृंगार आरती सुबह 06:45 बजे और संध्या आरती शाम 07:45 बजे होगी। मंदिर प्रशासन का कहना है कि भक्त निर्धारित समय के अनुसार ही मंदिर पहुंचें, ताकि उन्हें किसी तरह की असुविधा न झेलनी पड़े।
पांच प्रमुख आरतियों का विशेष महत्व
खाटूश्याम जी मंदिर में हर दिन पांच प्रमुख आरतियां होती हैं और हर आरती का अपना धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। दिन की शुरुआत मंगला आरती से होती है, जिसमें भक्त सुबह-सुबह बाबा श्याम के दिव्य दर्शन करते हैं। इसके बाद श्रृंगार आरती में बाबा श्याम का विशेष श्रृंगार किया जाता है।
वर्तमान समय-सारणी के अनुसार मंदिर में आरतियों का समय इस प्रकार रहेगा:
- मंगला आरती — सुबह 04:30 बजे
- श्रृंगार आरती — सुबह 06:45 बजे
- भोग आरती — दोपहर 12:30 बजे
- संध्या आरती — शाम 07:45 बजे
- शयन आरती — रात 10:00 बजे
शयन आरती के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।
क्यों खास हैं श्रृंगार और संध्या आरती
श्रृंगार आरती के दौरान बाबा श्याम को रंग-बिरंगे फूलों, आकर्षक वस्त्रों और विशेष आभूषणों से सजाया जाता है। वहीं संध्या आरती में बड़ी तादाद में श्रद्धालु जुटकर बाबा का आशीर्वाद लेते हैं। इन दोनों आरतियों के समय भक्तों की विशेष भीड़ देखने को मिलती है।
कौन हैं बाबा श्याम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बाबा श्याम को भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप माना जाता है। महाभारत काल में भीम के पौत्र बर्बरीक ने भगवान श्रीकृष्ण को अपना शीश दान किया था। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें कलियुग में श्याम नाम से पूजे जाने का वरदान दिया। तभी से बाबा श्याम को “हारे का सहारा” कहा जाता है और देशभर से लाखों श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए खाटूधाम पहुंचते हैं।
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