बिहार में 8 अंचल अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई, मंत्री दिलीप जायसवाल के सख्त रुख से मचा हड़कंप

बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल के निर्देश पर रिश्वतखोरी और दाखिल-खारिज में गड़बड़ी समेत गंभीर आरोपों में 8 सीओ पर कार्रवाई की गई है। अब तक राज्य में 50 सीओ पर कार्रवाई हो चुकी है।

बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं के विरुद्ध एक बार फिर कड़ा कदम उठाते हुए राज्य के विभिन्न अंचलों में तैनात रहे करीब 8 अंचल अधिकारियों (सीओ) पर कार्रवाई की है। विभागीय मंत्री दिलीप जायसवाल के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई में रिश्वतखोरी, दाखिल-खारिज मामलों में गड़बड़ी, सरकारी भूमि अभिलेखों में अनियमितता और कर्तव्य में लापरवाही जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।

मंत्री दिलीप जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ विभाग की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति आगे भी जारी रहेगी और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों को किसी भी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा। विभागीय दस्तावेजों के अनुसार जिन अधिकारियों पर शिकंजा कसा गया है, उन पर रिश्वत लेने, सरकारी अभिलेखों में हेरफेर, दाखिल-खारिज मामलों में अनियमितता, सरकारी भूमि से जुड़े मामलों में लापरवाही और बिना सूचना अनुपस्थित रहने जैसे आरोप हैं।

किन अधिकारियों पर गिरी गाज

कार्रवाई की जद में जहानाबाद, बांका, मधेपुरा, भागलपुर, नालंदा और रोहतास समेत कई जिलों के तत्कालीन अंचल अधिकारी आए हैं। इनके खिलाफ लगाए गए आरोप और की गई कार्रवाई का ब्योरा इस प्रकार है:

  • संतु कुमार राम (रतनपुरा, जहानाबाद): निगरानी ब्यूरो द्वारा ₹1,000 रिश्वत लेते गिरफ्तार — पेंशन में 100% स्थायी कटौती।
  • सुरजेश्वर श्रीवास्तव (फुलीडुमर, बांका): बिना सूचना एवं अनुमति के लगातार अनुपस्थित रहना — आरोप पत्र गठित।
  • जयप्रकाश स्वर्णकार (मुरलीगंज, मधेपुरा): स्थानांतरण के बाद भी बड़ी संख्या में दाखिल-खारिज मामलों का निपटारा — द्वितीय कारणपृच्छा की मांग।
  • अजय कुमार सरकार (नारायणपुर, भागलपुर): दाखिल-खारिज के एवज में ₹5 लाख रिश्वत मांगने का आरोप — विभागीय कार्रवाई संचालित।
  • आमोद कुमार (एकंगरसराय, नालंदा): पहले अस्वीकृत दाखिल-खारिज वाद को उसी दस्तावेज पर पुनः स्वीकृत करना — द्वितीय कारणपृच्छा की मांग।
  • विजय कुमार गुप्ता (बौंसी, बांका): पहले अस्वीकृत दाखिल-खारिज वाद को पुनः स्वीकृत करना — 2 वर्ष के लिए पेंशन में 10% कटौती।
  • मीना रानी (डिहरी, रोहतास): सरकारी भूमि के अभिलेखों एवं दस्तावेजों में कथित जालसाजी तथा बंदोबस्त संबंधी आरोप — विभागीय कार्रवाई संचालित।
  • नागेंद्र प्रसाद (बेलहर, बांका): पहले अस्वीकृत दाखिल-खारिज वाद को उसी दस्तावेज पर पुनः स्वीकृत करना — आरोप पत्र गठित।

अलग-अलग स्तर पर हुई कार्रवाई

इनमें से कुछ अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र गठित किया गया है, तो कुछ मामलों में विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। वहीं कुछ अधिकारियों की पेंशन में कटौती जैसी दंडात्मक कार्रवाई भी की गई है।

पारदर्शिता पर सरकार का जोर

मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। भ्रष्टाचार और अनियमितता की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

उल्लेखनीय है कि विभाग ने पिछले एक महीने के दौरान करीब 50 अंचल अधिकारियों के खिलाफ विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई की है। इस तरह मंत्री दिलीप जायसवाल के नेतृत्व में अब तक बिहार में 50 सीओ पर शिकंजा कसा जा चुका है।

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