मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी और महत्वाकांक्षी नगरीय विकास योजनाओं में गिने जाने वाले उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन (UIMR) प्रोजेक्ट ने अब जमीन पर उतरने की दिशा में रफ्तार पकड़ ली है। इस योजना की प्रारंभिक रिपोर्ट बनकर तैयार है, जिसमें मालवा क्षेत्र के छह जिलों को एकीकृत विकास मॉडल के तहत आपस में जोड़ने का प्रस्ताव दिया गया है। प्रदेश के सबसे बड़े आर्थिक और धार्मिक केंद्रों को एक साझा विकास ढांचे में लाने की यह कोशिश आने वाले वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था की नई पहचान बन सकती है।
इस योजना का मकसद केवल शहरों का विस्तार करना नहीं, बल्कि उद्योग, निवेश, परिवहन, कृषि, पर्यटन और रोजगार को एक समग्र नजरिए से विकसित करना है। प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, शाजापुर और रतलाम जिले इस मेट्रोपॉलिटन रीजन में शामिल किए जाएंगे।
कितनी होगी आबादी
वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर इस क्षेत्र की आबादी 75 लाख से अधिक आंकी गई थी, जो अब 85 से 90 लाख के बीच मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह परियोजना तय समयसीमा में लागू होती है तो मालवा क्षेत्र देश के प्रमुख आर्थिक क्लस्टर्स में अपनी जगह बना सकता है। इसी वजह से इसे प्रदेश का सबसे बड़ा क्षेत्रीय विकास मॉडल माना जा रहा है।
छह जिलों को जोड़ने वाली योजना
उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन का कुल क्षेत्रफल 16 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक रहेगा। इसमें 38 तहसीलें और 2781 गांव शामिल किए गए हैं। इंदौर जिला पूरी तरह इस क्षेत्र का हिस्सा रहेगा, जबकि शाजापुर का करीब 90 प्रतिशत भू-भाग भी योजना में जुड़ेगा। इस मॉडल का उद्देश्य प्रशासनिक सीमाओं से ऊपर उठकर आर्थिक और बुनियादी ढांचे के स्तर पर एकीकृत विकास सुनिश्चित करना है, जिससे क्षेत्रीय असंतुलन घटाने में भी मदद मिलेगी।
अगले चरण में सिचुएशन एनालिसिस रिपोर्ट
प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद अब अगले ढाई माह में सिचुएशन एनालिसिस रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसमें छह जिलों के करीब 50 सेक्टरों का अध्ययन किया जाएगा। इस दौरान सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, जल संसाधन, पुलिस, पीएचई और हरित क्षेत्रों की मौजूदा स्थिति का आकलन होगा। भविष्य की विकास परियोजनाओं को भी इसी रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।
विकास और निवेश का रोडमैप
सिचुएशन एनालिसिस रिपोर्ट के बाद रीजनल डेवलपमेंट एंड इंवेस्टमेंट प्लान बनाया जाएगा। इसमें क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक विजन और निवेश रणनीति तय की जाएगी। कौन से प्रोजेक्ट सबसे पहले शुरू होंगे, किन इलाकों में उद्योग लगेंगे, परिवहन नेटवर्क को कैसे मजबूत किया जाएगा और रोजगार के नए मौके कहां बनेंगे—इन सबका खाका इसी चरण में तैयार होगा।
सड़क और एक्सप्रेस-वे पर खास जोर
योजना में कई बड़े सड़क प्रोजेक्ट को जगह दी गई है। इनमें इंदौर-भोपाल ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे, इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे, उज्जैन-मक्सी कॉरिडोर और उज्जैन-जावरा कॉरिडोर प्रमुख हैं। इसके साथ ही इंदौर के पूर्वी और पश्चिमी एक्सप्रेस बायपास भी प्रस्तावित किए गए हैं। इससे मालवा क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक गतिविधियों को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
रेलवे नेटवर्क का होगा विस्तार
मेट्रोपॉलिटन रीजन में रेल कनेक्टिविटी को और मजबूत करने की भी तैयारी है। नागदा-उज्जैन, उज्जैन-मक्सी और उज्जैन-देवास-महू जैसे दोहरी विद्युत लाइन वाले मार्ग पहले से मौजूद हैं। आने वाले समय में टीही-धार, धार-दाहोद, धार-जोबट, महू-मनमाड़ और मांगलिया-बुधनी जैसे नए रेलवे रूट विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
निवेश, उद्योग और रोजगार पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना सिर्फ शहरी विस्तार तक सीमित नहीं रहेगी। इससे औद्योगिक निवेश बढ़ेगा, रियल एस्टेट सेक्टर को गति मिलेगी और लाखों रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। इंदौर की औद्योगिक ताकत, उज्जैन की धार्मिक पहचान, देवास की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और रतलाम के व्यापारिक महत्व को एक साझा आर्थिक ढांचे में पिरोने की कोशिश ही इस योजना की सबसे बड़ी खासियत है।
एक साल में दिखेगा स्पष्ट स्वरूप
योजना के अलग-अलग चरणों को देखते हुए माना जा रहा है कि अगले एक साल में इसका साफ स्वरूप सामने आ जाएगा। इसके बाद डीपीआर, सर्वे और प्रोजेक्ट स्वीकृतियों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यदि सभी चरण समय पर पूरे होते हैं तो उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन केवल मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के सबसे बड़े क्षेत्रीय विकास मॉडलों में शुमार हो सकता है।
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