पलामू टाइगर रिजर्व में वाटरहोल गणना 2026, 14 घंटे जलस्रोतों पर टिकी रही टीम की निगाहें

पलामू टाइगर रिजर्व में गर्मी के दौरान वन्यजीवों की निगरानी के लिए वाटरहोल गणना 2026 कराई गई, जिसमें वन कर्मियों और स्वयंसेवकों ने लगातार 14 घंटे तक जंगल के जलस्रोतों पर नजर रखी। शुरुआती रिपोर्ट में हाथी, तेंदुआ और गौर समेत कई वन्यजीवों की मौजूदगी दर्ज हुई है।

भीषण गर्मी का मौसम आते ही जंगल के ज्यादातर जलस्रोत सूखने लगते हैं और ऐसे में वन्यजीव पानी की तलाश में सीमित बचे हुए जलस्रोतों की ओर पहुंचते हैं। यही वह समय होता है जब वन विभाग को उनकी गिनती और निगरानी का सबसे अच्छा अवसर मिलता है। पलामू टाइगर रिजर्व (PTR) में इसी अवसर का लाभ उठाते हुए पारंपरिक वाटरहोल गणना यानी वाटरहोल सेंसस कराया जाता है।

इस वर्ष भी ‘वाटरहोल गणना 2026’ का सफल आयोजन हुआ, जिसमें वन कर्मियों और स्वयंसेवकों ने मिलकर पूरे 14 घंटे तक लगातार जंगल के अलग-अलग जलस्रोतों पर नजर बनाए रखी।

बाघों की गणना की शुरुआत इसी इलाके से

पलामू टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जैना ने बताया कि देश में पलामू टाइगर रिजर्व का एक खास इतिहास रहा है। भारत में बाघों की गणना की शुरुआत भी इसी क्षेत्र से हुई थी। वन्यजीवों के अध्ययन और संरक्षण के क्षेत्र में पलामू लंबे समय से अहम भूमिका निभाता आ रहा है।

उन्होंने बताया कि वाटरहोल सेंसस वन्यजीवों की निगरानी का एक पारंपरिक और वैज्ञानिक तरीका है, जिसका इस्तेमाल आज भी प्रभावी ढंग से किया जा रहा है।

जब जानवर पानी पीने आते हैं, तब होती है गिनती

जैना के अनुसार यह एक मौसमी गतिविधि है, जो मुख्य रूप से गर्मी के दिनों में की जाती है। इस दौरान जंगल के जानवर पानी पीने के लिए तय जलस्रोतों पर पहुंचते हैं। ऐसे मौके पर वन विभाग के कर्मचारी और प्रशिक्षित स्वयंसेवक मचानों तथा छिपे हुए स्थानों से उनकी हर हलचल पर नजर रखते हैं।

इस तरीके से यह जानकारी मिलती है कि कौन-सा वन्यजीव किस जलस्रोत पर आता है, कितनी संख्या में आता है और किस समय पहुंचता है।

डेटा शीट से आसान हुई गिनती

गणना के दौरान हर वाटरहोल पर विशेष डेटा शीट उपलब्ध कराई गई थी। इसमें वन्यजीवों के आने का समय, उनकी प्रजाति, नर-मादा और शावकों की अनुमानित संख्या समेत दूसरी जरूरी जानकारियां दर्ज की गईं।

शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक हाथी, तेंदुआ, गौर, चीतल, सांभर, कोटरा, भालू और सियार जैसे कई महत्वपूर्ण वन्यजीवों की मौजूदगी दर्ज की गई है। इससे जंगल के जानवरों की गिनती करना काफी आसान हो जाता है।

सबसे भरोसेमंद तरीका माना जाता है

वन अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की गणना से न केवल वन्यजीवों की मौसमी गतिविधियों का आकलन होता है, बल्कि यह भी पता चलता है कि कौन-से जलस्रोत वन्यजीवों के लिए सबसे ज्यादा उपयोगी हैं।

जुटाए गए आंकड़ों का वैज्ञानिक विश्लेषण भविष्य में जलस्रोतों के बेहतर प्रबंधन, कृत्रिम जल आपूर्ति की व्यवस्था और शिकार विरोधी अभियान को मजबूत बनाने में मददगार साबित होगा। यही वजह है कि वाटरहोल गणना आज भी वन्यजीव संरक्षण के सबसे भरोसेमंद पारंपरिक तरीकों में से एक मानी जाती है।

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