निशानेबाज जसपाल राणा का निधन: उत्तराखंड की माटी से निकला वह सपूत जिसने देश को दिलाए पदक

एशियाई खेलों के पूर्व स्वर्ण पदक विजेता और मशहूर पिस्टल कोच जसपाल राणा का 49 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत पूरे खेल जगत ने इस क्षति पर शोक जताया।

भारतीय निशानेबाजी के चमकते सितारे और एशियाई खेलों के पूर्व स्वर्ण पदक विजेता जसपाल राणा अब इस दुनिया में नहीं रहे। 26 जून को अपना 50वां जन्मदिन मनाने से ठीक पहले 49 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के अध्यक्ष कलिकेश नारायण सिंह देव के मुताबिक राणा ने गुरुवार रात दिल्ली के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली।

उत्तराखंड से रहा गहरा रिश्ता

स्वर्गीय जसपाल राणा और उनके परिवार का उत्तराखंड से बेहद करीबी नाता रहा। उनका जन्म उत्तरकाशी जिले में हुआ था। उनके पिता नारायण राणा सिक्योरिटी फोर्सेज में रहे और उन्होंने ही जसपाल को निशानेबाजी की राह दिखाई। एशियाई खेलों में शूटिंग के मैदान पर भारत का झंडा बुलंद करने के बाद जसपाल ने फिर कभी मुड़कर नहीं देखा।

देश के लगभग हर प्रतिष्ठित सम्मान — द्रोणाचार्य अवार्ड, अर्जुन अवार्ड और पद्म अवार्ड — से उन्हें नवाजा गया। वे अक्सर देहरादून स्थित अपने पिता की शूटिंग अकादमी में नजर आते थे, जहां युवाओं को निशानेबाजी के गुर सिखाते थे।

देश के सबसे सफल पिस्टल कोच

जसपाल राणा की गिनती देश के सबसे कामयाब पिस्टल कोचों में होती है। उन्होंने कई भारतीय निशानेबाजों को तैयार किया। ओलंपिक में अपनी चमक बिखेरने वाली शूटर मनु भाकर को भी जसपाल ने ही तराशा। निधन के समय वे भारतीय पिस्टल निशानेबाजों के लिए 'हाई परफॉर्मेंस कोच' के रूप में कार्यरत थे।

राजनीति में भी आजमाया हाथ

जसपाल के पिता नारायण राणा उत्तराखंड की पहली नित्यानंद स्वामी सरकार में खेल मंत्री रहे। बीजेपी से जुड़े नारायण राणा 2002 का चुनाव हार गए थे। खुद जसपाल ने भी राजनीति में किस्मत आजमाई। 2009 में उन्होंने टिहरी लोकसभा क्षेत्र से बीजेपी के टिकट पर तत्कालीन कांग्रेस प्रत्याशी विजय बहुगुणा के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन इस मुकाबले में बहुगुणा विजयी रहे।

उत्तराखंड के 2012 विधानसभा चुनाव से पहले जसपाल ने एक बार फिर बीजेपी के टिकट की दावेदारी की, मगर इस बार बात नहीं बनी। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया और पार्टी के कैंपेनर के तौर पर सक्रिय रहे। हालांकि इस छोटी राजनीतिक पारी के बाद उन्होंने अपना पूरा ध्यान निशानेबाजी पर केंद्रित कर लिया और एक सफल कोच के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई।

विदेश से लौटते समय बिगड़ी थी तबीयत

जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ विश्व कप से भारतीय दल की वापसी की उड़ान के दौरान राणा की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी और उन्हें एक चिकित्सा प्रक्रिया से गुजरना पड़ा था। नई दिल्ली में विमान के उतरते ही उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनके स्टेंट डाले गए थे।

पीएम मोदी ने जताया शोक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जसपाल राणा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया और इसे भारतीय खेल जगत के लिए बड़ी क्षति बताया। उन्होंने एक्स पर लिखा कि जसपाल राणा जी के निधन से उन्हें गहरा दुख हुआ है और यह भारतीय खेल जगत के लिए बहुत बड़ी क्षति है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राणा ने निशानेबाजी में अपनी असाधारण उपलब्धियों से देश का गौरव कई गुना बढ़ाया और एक कोच के रूप में युवा खिलाड़ियों को निखारने में अहम भूमिका निभाई।

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