हनौता बांध बनकर तैयार, अब किसानों के सूखे खेतों तक पहुंचेगा पानी और लहलहाएंगी फसलें

सागर जिले की बहुप्रतीक्षित हनौता सिंचाई परियोजना का लगभग 95% काम पूरा हो चुका है और इसी रबी सीजन से किसानों को पानी मिलने लगेगा, जिससे करीब एक लाख एकड़ जमीन सिंचित होगी।

सागर जिले की बहुप्रतीक्षित हनौता बांध सिंचाई परियोजना का काम अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। जिम्मेदार अधिकारियों का दावा है कि इसी रबी सीजन से किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलने लगेगा। परियोजना का लगभग 95% काम पूरा हो चुका है, जिसके चलते सागर जिले की बीना और खुरई तहसील के साथ-साथ विदिशा के कुरवाई क्षेत्र की करीब एक लाख एकड़ जमीन सिंचित होगी। इससे हजारों किसानों के खेत हरी-भरी फसलों से लहलहा उठेंगे।

किसानों की बदलेगी तस्वीर

सिंचाई परियोजना के चालू होते ही पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल जाएगी। पर्याप्त पानी मिलने से किसान साल में तीन फसलें ले सकेंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। इसके अलावा सब्जियों की पैदावार भी बढ़ेगी और यह इलाका सब्जी उत्पादन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरेगा।

कहां और कितनी लागत से बना बांध

हनौता बांध को सागर जिले के खुरई ब्लॉक के ग्राम हनौता एवं गौड़खेड़ी तथा विदिशा जिले के बीच बीना नदी पर बनाया गया है। इस परियोजना पर कुल 1392 करोड़ रुपये की लागत आ रही है। इसमें से लगभग 700 करोड़ रुपये भू-अर्जन पर खर्च हुए हैं, जबकि करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से बांध का निर्माण कार्य चल रहा है।

खास बात यह है कि इस परियोजना में सूक्ष्मदाब सिंचाई पद्धति के जरिए हर किसान के खेत तक पानी पहुंचाया जाएगा। इस व्यवस्था में किसानों को न तो मोटर की जरूरत पड़ेगी और न ही बिजली का झंझट रहेगा।

हनौता बांध परियोजना की खासियत

परियोजना की तकनीकी ताकत की बात करें तो इसके मुख्य बांध की लंबाई 1939 मीटर रखी गई है, जबकि सैडल बांध की लंबाई 2194 मीटर है। इसमें कंक्रीट बांध का भी उपयोग किया गया है, जिसकी लंबाई 242.50 मीटर है।

  • यहां लगभग एक दर्जन गेट बनाए जा रहे हैं, जिनकी साइज 12.75 m × 10.50 m रखी गई है।
  • बांध की कुल जल भराव क्षमता 158.747 मिलियन घनमीटर है।

इस बांध का काम अप्रैल 2026 तक पूरा होना था, लेकिन मानसून आने में कुछ ही दिन शेष रह गए हैं और अब भी कुछ काम बाकी है।

इन गांवों को मिलेगा लाभ

हनौता सिंचाई परियोजना से बीना ब्लॉक के दर्जनों गांव लाभान्वित होंगे, जिनमें आगासौद, बगदावली, बाघारूपा, बम्होरी दुर्जन, बरोदिया, बरोदिया घाट, बेसरा कसोई, भांकरई, भापसोन, भरतौली, भिलावली, भोजपुर, बिल्धई बुजुर्ग, बिंधई, चक्क आगासौद, चंदेरा, चिकनौटा, दौलतपुर, देहरी, ढांड, धनोरा, धानोरा, धंसरा, धरमपुर, धवई, ढिमरौली, ढुरूआ, दोनमढ़ी, ऐरन, इटावा, गढ़ा, गोदना, गौहर, गुलौआ, हड़कलखाती, हांसलखेड़ी, हांसुआ, हरदौट, हींगटी, हिन्नाौद, हिरनछिपा, इटैया, जाउखेड़ी, जिरवारा, जौध, केथनी रैयतवारी, कजरई, कलरावनी, कोंरजा, करई, कठाई, खमउखेड़ी, किर्रावदा, किर्रोद, कुरूआ, लखाहार, महादेवखेड़ी, महूटा, मनउ, मनमति, मेवली, मूडरी, मुड़िया नायक, मुहांसा कोंरजा, मुसयावदा, नेहरोन, ननियाखेड़ी, निवोदिया, नौगांव, नौपुरा, पड़रिया, पहाखेरी, पहलेजपुर, पाली, पार, पटकुईं, पिपरिया सनाई, पिपरिया पूरन, पूरा राना, पुरैना, रहटवास, रामपुर, रसीलपुर, रेता, रुपउ, सब्दा, सनाई, सरगौली, सातनी, सतौरिया, शेखपुर, सिरचैंपी और सिरोंजीपुर शामिल हैं। इसके अलावा विदिशा जिले के 29 गांव भी इस परियोजना से लाभान्वित होंगे।

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