मलमास के बाद घर या प्लॉट खरीदने की तैयारी? पहले समझ लें वास्तु के ये जरूरी संकेत

मलमास खत्म होते ही जमीन, मकान और फ्लैट खरीदने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। ऐसे में दिशा, जमीन के आकार और मिट्टी से जुड़े वास्तु के कुछ अहम नियम जान लेना फायदेमंद रहेगा।

मलमास समाप्त होने में अब बहुत ज्यादा समय शेष नहीं है। इसके बाद विवाह, गृह प्रवेश, भूमि की खरीद और नए निर्माण जैसे मांगलिक कामों की शुरुआत हो जाएगी। यही वह दौर है जब बड़ी संख्या में लोग अपना घर, प्लॉट या फ्लैट खरीदने की योजना बनाते हैं। मगर अक्सर देखने में आता है कि खरीदार सिर्फ कीमत, स्थान और सुविधाओं को आधार बनाकर संपत्ति ले लेते हैं और वास्तु के नियमों की अनदेखी कर देते हैं। आगे चलकर इसी कारण कई लोगों को आर्थिक दिक्कतें, मानसिक तनाव और घर-परिवार में असंतोष जैसी परेशानियां झेलनी पड़ती हैं।

दिशा का गहरा असर

देवघर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल के अनुसार, किसी भी जमीन या मकान का चयन करते समय वास्तु पर खास ध्यान देना चाहिए। उनका मानना है कि प्लॉट का मुख जिस दिशा की ओर होता है, उसका व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। उत्तर दिशा, पूर्व दिशा और ईशान कोण की तरफ खुलने वाले प्लॉट को विशेष रूप से शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इन दिशाओं से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह अधिक रहता है, जिससे घर में सुख-शांति और आर्थिक उन्नति बनी रहती है। साथ ही जमीन के सामने पीपल का पेड़ या मंदिर नहीं होना चाहिए, क्योंकि इनकी छाया को घर के लिए शुभ नहीं माना गया है।

जमीन का आकार भी अहम

ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि सिर्फ दिशा ही नहीं, बल्कि जमीन का आकार भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। चौकोर और आयताकार प्लॉट सबसे बेहतर माने जाते हैं, क्योंकि इनमें संतुलन और स्थिरता बनी रहती है। वहीं टेढ़े-मेढ़े, त्रिकोण आकार वाले या किसी कोने से कटे हुए प्लॉट को खरीदने से पहले अच्छी तरह सोच-विचार करना चाहिए। वास्तु विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे आकार कई बार नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

ऊंचाई, ढलान और मिट्टी की पहचान

जमीन की ऊंचाई और ढलान पर भी गौर करना जरूरी है। अगर प्लॉट का उत्तर या पूर्व भाग कुछ नीचा हो और दक्षिण-पश्चिम हिस्सा तुलनात्मक रूप से ऊंचा हो, तो ऐसी संरचना को अच्छा माना जाता है। इसे सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह के लिए अनुकूल बताया गया है। इसके अलावा भूमि की मिट्टी भी शुभ-अशुभ का संकेत देती है। हल्की नमी वाली उपजाऊ मिट्टी निर्माण कार्य के लिए बेहतर मानी जाती है, जबकि बहुत अधिक रेतीली या बंजर भूमि को कम लाभकारी समझा जाता है।

टी-जंक्शन वाली जमीन से बचें

पंडित नंदकिशोर मुद्गल का कहना है कि टी-जंक्शन यानी ऐसी जगह, जहां सड़क सीधे आकर प्लॉट से टकराती हो, वहां जमीन खरीदने से बचना चाहिए। वास्तु में इसे शुभ नहीं माना गया है। इसलिए मलमास खत्म होने के बाद यदि आप जमीन, मकान या फ्लैट खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो जल्दबाजी करने के बजाय इन जरूरी बातों की पड़ताल जरूर कर लें। थोड़ी-सी सावधानी भविष्य में कई परेशानियों से बचा सकती है और नए घर में सुख, समृद्धि व खुशहाली का रास्ता खोल सकती है।

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