हैरान कर देने वाला विज्ञान: समुद्र के बीचों-बीच अचानक उभरते और फिर लुप्त हो जाते हैं ये रहस्यमयी द्वीप, समझिए इसके पीछे की असली वजह

समुद्र में अचानक उभरकर कुछ समय बाद गायब हो जाने वाले अस्थायी द्वीप किसी कल्पना का हिस्सा नहीं, बल्कि एक वास्तविक वैज्ञानिक परिघटना हैं। जानिए ये कैसे बनते हैं और क्यों मिट जाते हैं।

हमारी दुनिया अनगिनत रहस्यों से भरी हुई है और समुद्र से जुड़े कई ऐसे अनोखे तथ्य आज भी इंसान को चकित कर देते हैं। इन्हीं में से एक है उन रहस्यमयी द्वीपों की मौजूदगी, जो अचानक समुद्र के बीच प्रकट होते हैं और कुछ अरसे बाद फिर से ओझल हो जाते हैं। पहली नज़र में यह किसी फिल्म या काल्पनिक कथा जैसा प्रतीत हो सकता है, लेकिन हकीकत में यह पूरी तरह एक वैज्ञानिक घटना है। प्राकृतिक प्रक्रियाओं के चलते बनने और मिटने वाले ऐसे अस्थायी द्वीप दुनिया भर के अलग-अलग समुद्री क्षेत्रों में देखे जा चुके हैं।

आखिर ये रहस्यमयी द्वीप बनते कैसे हैं?

समुद्र की तलहटी में कई सक्रिय ज्वालामुखी मौजूद होते हैं। जब इनमें विस्फोट होता है तो लावा, राख और चट्टानी पदार्थ समुद्र की सतह तक पहुंच जाते हैं। इन पदार्थों के लगातार जमा होते रहने से धीरे-धीरे पानी के ऊपर एक नया द्वीप आकार ले सकता है। ऐसे द्वीपों को ज्वालामुखी द्वीप कहा जाता है। कभी-कभी समुद्र के भीतर होने वाली भूकंपीय हलचलों और तलछट के जमाव से भी ज़मीन के नए हिस्से उभर आते हैं। यही कारण है कि कुछ द्वीप अचानक नक्शे पर नज़र आने लगते हैं।

फिर ये अचानक गायब क्यों हो जाते हैं?

इनमें से अधिकांश द्वीप टिकाऊ नहीं होते। ज्वालामुखी विस्फोट से बने द्वीपों की मिट्टी और चट्टानें प्रायः कमज़ोर होती हैं। समुद्र की तेज़ लहरें, तूफ़ान और निरंतर होता कटाव धीरे-धीरे इन्हें खत्म कर देते हैं। कई बार महज़ कुछ महीनों या वर्षों में ही पूरा द्वीप समुद्र में समा जाता है। इसी वजह से इन्हें "क्षणिक" या अस्थायी द्वीप भी कहा जाता है।

दुनिया में देखे गए ऐसे कुछ उदाहरण

पूरी दुनिया में ऐसे अनेक द्वीपों का पता चला है जो अचानक उभरे और फिर लुप्त हो गए। साल 2013 में ज्वालामुखीय गतिविधि के कारण प्रशांत महासागर में एक नया द्वीप बना था। इसी प्रकार पाकिस्तान के तट पर भूकंप के बाद एक अस्थायी द्वीप बनने की घटना सामने आई थी, जो कुछ वर्षों के बाद लगभग पूरी तरह गायब हो गया।

वैज्ञानिकों के लिए क्यों हैं ये बेहद अहम?

ऐसे द्वीप वैज्ञानिकों के लिए प्राकृतिक प्रयोगशाला की तरह काम करते हैं। इनके अध्ययन से पृथ्वी की आंतरिक संरचना, ज्वालामुखी गतिविधियों, समुद्री भूगोल और नए इकोसिस्टम के विकास को समझने में सहायता मिलती है। वैज्ञानिक यह भी बारीकी से देखते हैं कि नवनिर्मित द्वीपों पर पौधे, पक्षी और दूसरे जीव-जंतु किस तरह खुद को स्थापित करते हैं।

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