मेटा की 8,000 कर्मचारियों वाली छंटनी याद है? जान गंवाने वालों में इंजीनियर कम, उनके बॉस ज्यादा निकले

फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा ने 20 मई को 8,000 कर्मचारियों को नौकरी से हटाया था, जिसमें सबसे बड़ी मार मिडल मैनेजर्स पर पड़ी। निकाले गए लोगों में करीब एक-तिहाई मैनेजर थे और इनमें सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग मैनेजर सबसे अधिक रहे।

फेसबुक और इंस्टाग्राम चलाने वाली कंपनी मेटा ने 20 मई को अपने 8,000 कर्मचारियों को नौकरी से बाहर कर दिया था। आम तौर पर माना जाता है कि ऐसी कटौती की सबसे पहली चोट जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों पर पड़ती है, लेकिन इस बार तस्वीर एकदम उलटी रही। मेटा में काम करने वाले इंजीनियरों के मुकाबले उन पर बैठे मैनेजर्स की नौकरियां कहीं ज्यादा गईं।

कंपनी के सरकारी दस्तावेजों से सामने आया है कि नौकरी से हटाए गए लोगों में एक बहुत बड़ा हिस्सा सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग मैनेजर्स का था। यानी असल काम करने वाले कर्मचारियों की तुलना में उनकी निगरानी करने वाले अधिकारियों पर गाज ज्यादा गिरी।

जुकरबर्ग के पुराने बयान की झलक

यह पूरी कार्रवाई मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग के उस बयान की याद दिलाती है, जो उन्होंने जनवरी 2023 में दिया था। उस समय जुकरबर्ग ने कहा था कि वह अपनी कंपनी में ऐसा ढांचा कतई नहीं चाहते, जहां ‘मैनेजर्स को मैनेज करने के लिए भी मैनेजर्स’ की चार-चार परतें बनी रहें।

तब इसे महज एक बयान समझा गया था, लेकिन अब छंटनी के आंकड़े सामने आने के बाद साफ है कि जुकरबर्ग अपनी बात को लेकर पूरी तरह गंभीर थे और उन्होंने कंपनी से मैनेजर्स की इस अतिरिक्त फौज को विदा कर दिया।

1,400 से अधिक मैनेजर्स पर गिरी गाज

आंकड़ों के अनुसार, जिन 4,665 कर्मचारियों के जॉब टाइटल सामने आए हैं, उनमें से 1,400 से ज्यादा सिर्फ मैनेजर्स थे। इनमें भी करीब आधे लोग सीधे तौर पर सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग मैनेजर्स के पद पर थे।

इसके मुकाबले जमीनी स्तर पर कोड लिखने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की संख्या करीब 1,000 रही। यानी जो लोग वास्तव में काम कर रहे थे, वे कम निकाले गए और जो केवल निगरानी रख रहे थे, उन पर मार ज्यादा पड़ी। डेटा साइंटिस्ट, प्रोडक्ट मैनेजर्स और मार्केटिंग-सेल्स जैसे विभागों पर इसका बेहद मामूली असर हुआ।

इस बदलाव की असली वजह क्या रही?

इस पूरे फेरबदल के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) है। मेटा इस समय एआई डेटा सेंटर्स और नई तकनीकों पर अरबों डॉलर खर्च कर रही है। अब कंपनी का पूरा ध्यान इस बात पर है कि प्रति कर्मचारी कितनी कमाई हो रही है, न कि इस पर कि कंपनी में कुल कितने लोग काम कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि एआई टूल्स आने के बाद अब गिने-चुने इंजीनियर भी उतना काम कर रहे हैं, जिसके लिए पहले बड़ी टीमों की जरूरत पड़ती थी। जब टीमें छोटी हो गईं, तो उन्हें संभालने वाले भारी-भरकम मैनेजर्स की जरूरत भी खत्म हो गई।

जुकरबर्ग साफ कर चुके हैं कि जहां पहले 50 या 100 लोगों की जरूरत थी, वहां अब 10 लोग ही पर्याप्त हैं। ऐसे में अतिरिक्त मैनेजर्स को विदाई देना कंपनी की मजबूरी बन गई थी।

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