गाजीपुर के 'डिजिटल योद्धा' शिवानंद: फसल बीमा से आयुष्मान तक, हजारों ग्रामीणों तक पहुंचाईं सरकारी योजनाएं

कॉमन सर्विस सेंटर के जिला प्रबंधक शिवानंद उपाध्याय वर्षों से गाजीपुर के गांव-गांव में फसल बीमा, केसीसी और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचा रहे हैं। जिले में करीब 3000 सीएससी विभिन्न डिजिटल सेवाएं दे रहे हैं।

गाजीपुर के हजारों किसान जब फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), आयुष्मान भारत, किसान रजिस्ट्री या श्रम पंजीकरण जैसी योजनाओं का फायदा उठाते हैं, तो इसके पीछे एक पूरी डिजिटल व्यवस्था सक्रिय रहती है। इस तंत्र को हर गांव तक ले जाने वाले चेहरों में एक नाम शिवानंद उपाध्याय का है। कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के जिला प्रबंधक के तौर पर वह बीते कई वर्षों से सरकारी योजनाओं को आखिरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने में जुटे हैं।

बैंकिंग से डिजिटल सेवा तक का सफर

शिवानंद उपाध्याय की प्रारंभिक पढ़ाई-लिखाई गाजीपुर में ही हुई। एमबीए पूरा करने के बाद उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बैंकिंग क्षेत्र से की। वर्ष 2016 में वह कॉमन सर्विस सेंटर नेटवर्क से जुड़े और ग्रामीण इलाकों में डिजिटल सेवाओं के विस्तार की जिम्मेदारी संभाली। आज वह गाजीपुर में हजारों सीएससी संचालकों और ग्रामीण डिजिटल नेटवर्क के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

गाजीपुर में करीब 3000 सीएससी

शिवानंद के मुताबिक कॉमन सर्विस सेंटर की बुनियादी सोच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया विजन से जुड़ी है। इसका मकसद यह था कि ग्रामीणों को छोटी-छोटी सरकारी सेवाओं के लिए तहसील, जिला मुख्यालय या सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। उनके अनुसार गाजीपुर जिले में लगभग 3600 गांव हैं और करीब 3000 कॉमन सर्विस सेंटर अलग-अलग सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं।

वह बताते हैं कि अखबार पढ़ने वाले और जागरूक किसान तो योजनाओं तक पहुंच जाते हैं, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे किसान भी हैं जिन्हें इनकी जानकारी ही नहीं होती। ऐसे लोगों तक पहुंचने के लिए सीएससी, लेखपाल, ग्राम पंचायत सचिव और प्रधान आपस में मिलकर काम करते हैं। फसल बीमा योजना, किसान रजिस्ट्री और किसान क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाओं में लोगों को जागरूक करना सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है।

हम खुद को डिजिटल योद्धा कह सकते हैं, क्योंकि हम गांव-गांव जाकर लोगों को योजनाओं से जोड़ने का काम करते हैं।

कोविड में बढ़ी सीएससी की भूमिका

कोविड महामारी के दौर में जब पूरे देश में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित थीं, तब कॉमन सर्विस सेंटर नेटवर्क की भूमिका और अहम हो गई। शिवानंद बताते हैं कि उस समय बैंकिंग सेवाओं और नकदी उपलब्ध कराने में कई चुनौतियां सामने थीं। बावजूद इसके, पंचायत स्तर पर काम कर रहे सीएससी संचालकों ने लोगों तक धनराशि और जरूरी सेवाएं पहुंचाने का सिलसिला जारी रखा, ताकि ग्रामीणों की रोजमर्रा की जरूरतें बाधित न हों।

आयुष्मान और किसान योजना का लाभ

शिवानंद बताते हैं कि आयुष्मान भारत योजना का फायदा फिलहाल उन्हीं परिवारों को मिल रहा है, जिनका नाम सामाजिक-आर्थिक जनगणना 2011 की सूची में दर्ज है। गाजीपुर के शेरपुर और रेवतीपुर जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग इस योजना से लाभान्वित हुए हैं। वहीं किसान योजनाओं में जागरूकता के लिहाज से सैदपुर क्षेत्र को आगे माना जाता है, जबकि फसल बीमा योजना का लाभ लेने में मोहम्मदाबाद ब्लॉक अग्रणी रहा है।

नौकरी नहीं, सेवा का माध्यम

करीब एक दशक से ग्रामीण डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में सक्रिय शिवानंद उपाध्याय मानते हैं कि यह महज एक नौकरी नहीं, बल्कि सेवा का जरिया है। उनका कहना है कि जब किसी किसान, मजदूर या गरीब परिवार को सरकारी योजना का लाभ मिलता है, तो वही उनके काम की सबसे बड़ी उपलब्धि बन जाती है।

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