अमरोहा और आसपास के इलाके में वैसे तो अनेक मंदिर हैं, जहां श्रद्धालु नियमित रूप से पूजा-अर्चना करने जाते हैं। मगर इनमें पांच मंदिर ऐसे हैं, जिन्हें भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर पूजा करते हैं और अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं। मुरादाबाद मंडल ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु इन मंदिरों में दर्शन के लिए आते हैं।
एक नजर में पांच प्रमुख मंदिर
अमरोहा में पांच मंदिर खासे प्रसिद्ध हैं। इनमें श्री वासुदेव तीर्थ मंदिर शहर का सबसे मशहूर और लगभग 5000 वर्ष पुराना महाभारत कालीन मंदिर है। मान्यता है कि पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान यहां समय बिताया था। मीरा बाबा धाम अमरोहा में आस्था और आध्यात्म का एक प्रमुख केंद्र है, जहां हर साल बड़ी तादाद में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। श्री खाटू श्याम मंदिर का भव्य स्वरूप भी यहां स्थित है, जो स्थानीय भक्तों के बीच बेहद लोकप्रिय है। गंजस्थल क्षेत्र में स्थित काली माता मंदिर देवी दुर्गा को समर्पित है, जहां नवरात्रि के दौरान विशेष पूजा-अर्चना होती है। वहीं हनुमान मंदिर, जिसे हनुमान वाटिका भी कहा जाता है, अपने शांत और रमणीय वातावरण के साथ-साथ भगवान हनुमान की विशाल प्रतिमा के लिए जाना जाता है।
श्री वासुदेव तीर्थ मंदिर
अमरोहा का श्री वासुदेव तीर्थ मंदिर करीब 5000 साल पुराना पौराणिक मंदिर है और अमरोहा रेलवे स्टेशन से 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मान्यता के अनुसार महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण पांडवों के साथ कुरुक्षेत्र जाते समय यहां दो रात ठहरे थे। उन्होंने अपने हाथों से शिवलिंग बनाकर पूजा की थी, जो आज भी सरोवर के दक्षिण तट पर मौजूद है। श्रीकृष्ण ने सुबह सरोवर में स्नान किया था, तभी से इसे श्री वासुदेव सरोवर कहा जाने लगा। मंदिर का नाम भी भगवान के वासुदेव नाम पर रखा गया है।
यह स्थान पांडवों के अज्ञातवास का साक्षी रहा है। यहां 51 फीट ऊंची बजरंगबली की विशाल पंचमुखी प्रतिमा स्थापित है। कहा जाता है कि यहां से कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता। महाशिवरात्रि पर लाखों कांवड़िये यहां जलाभिषेक करते हैं। यही कारण है कि इसे शहर का सबसे प्रसिद्ध मंदिर माना जाता है। श्रद्धालुओं की बात करें तो मुरादाबाद ही नहीं, बल्कि दिल्ली और उत्तराखंड तक के लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं, जबकि मुरादाबाद मंडल के लोग तो आते ही रहते हैं।
मीरा बाबा धाम
अमरोहा का मीर बाबा धाम आस्था और अध्यात्म का प्रमुख केंद्र है, जो श्री वासुदेव तीर्थ परिसर में ही स्थित है। यह हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक माना जाता है, जहां दोनों धर्मों के लोग माथा टेकने आते हैं। मान्यता है कि मीरा बाबा भगवान श्रीकृष्ण के परम भक्त थे। लगभग 5000 साल पुराने वासुदेव तीर्थ में श्रीकृष्ण ने दो रात विश्राम किया था। इसी परिसर में मीरा बाबा पीर पहलवान की मजार और उनके भांजे जनेका की मजार है। इसके पास ही काली माता का प्राचीन मंदिर भी मौजूद है।
यहां मन्नत मांगने पर मनोकामना पूरी होने की मान्यता है। श्रद्धालु मिट्टी के दीए में सरसों का तेल, पताशा और अगरबत्ती चढ़ाते हैं। कहा जाता है कि सच्चे मन से मांगने पर मीरा बाबा किसी को खाली हाथ नहीं लौटाते। रोग, मुकदमे और संतान संबंधी परेशानियों के समाधान के लिए लोग दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं। मई-जून में यहां विशाल मेला लगता है और महाशिवरात्रि पर भी भारी भीड़ उमड़ती है। दिल्ली, मेरठ, मुरादाबाद, सहारनपुर, बरेली, संभल और पूरे देश से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। यह अमरोहा रेलवे स्टेशन से 3 किमी दूर है, जहां रिक्शा से आसानी से पहुंचा जा सकता है।
श्री खाटू श्याम मंदिर
अमरोहा में श्री खाटू श्याम बाबा का भव्य मंदिर भी श्रद्धा का बड़ा केंद्र है। यह मंदिर बहुत पुराना नहीं है, बल्कि आधुनिक समय में भक्तों द्वारा बनवाया गया है। खाटू श्याम जी मूल रूप से राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गांव में पूजे जाते हैं। वे महाभारत के वीर बर्बरीक हैं, जिन्हें श्रीकृष्ण ने कलियुग में श्याम नाम से पूजे जाने का वरदान दिया था। इसी प्रेरणा से अमरोहा में भी यह मंदिर स्थापित किया गया है। गजरौला क्षेत्र में श्री खाटू श्याम मंदिर धाम से फाल्गुन महोत्सव पर भव्य निशान यात्रा निकाली जाती है, जो शिव मंदिर से शुरू होकर लक्ष्मी नगर स्थित खाटू श्याम मंदिर पर समाप्त होती है।
काली माता मंदिर, गजस्थल
अमरोहा का काली माता मंदिर गजस्थल आस्था का प्राचीन केंद्र है। यह अमरोहा से करीब 10 से 12 किमी दूर नूरपुर मार्ग पर गजस्थल गांव में स्थित है। यह मंदिर लगभग 500 साल पुराना है। मान्यता है कि यहां घास काटते समय एक व्यक्ति का खुरपा जमीन में धंसी किसी चीज से टकराया। खुदाई करने पर एक शिवलिंग निकला, जिससे दूध की धार बह रही थी। उसी स्थान पर शिवलिंग की स्थापना हुई और बाद में माता काली का मंदिर बना। मंदिर परिसर 52 से 68 बीघा में फैला हुआ है। यहां बाबा भैरव नाथ और गुरु गोरखनाथ का धूना भी है। कहा जाता है कि माता के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता। हर सोमवार को यहां विशेष दर्शन होते हैं।
हनुमान मंदिर (हनुमान वाटिका)
अमरोहा जनपद में स्थित हनुमान मंदिर को हनुमान वाटिका के नाम से भी जाना जाता है। यह शहर का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। इसके मंदिर परिसर को एक सुंदर वाटिका के रूप में विकसित किया गया है, इसी कारण इसे हनुमान वाटिका कहा जाता है। मान्यता है कि यहां बजरंगबली भक्तों के संकट हरते हैं। मंगलवार और शनिवार को यहां विशेष पूजा होती है। सुंदरकांड पाठ, हनुमान चालीसा और भंडारे का आयोजन भी होता रहता है। मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु ध्वजा और लड्डू चढ़ाते हैं। अमरोहा शहर, संभल, मुरादाबाद और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं।
https://hindi.news18.com/photogallery/uttar-pradesh/amroha-top-5-famous-temples-of-amroha-you-must-know-about-their-history-and-beliefs-local18-10562296.html