एयर इंडिया AI171 हादसा: एक साल बाद भी क्यों नहीं सुलझी पायलट की चूक या साजिश की गुत्थी

अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया फ्लाइट AI171 के हादसे को एक साल बीत चुका है, लेकिन टेकऑफ के कुछ सेकंड बाद दोनों इंजनों की फ्यूल सप्लाई बंद होने की असली वजह अब तक रहस्य बनी हुई है। जांच एजेंसियां अब भी अंतिम रिपोर्ट तैयार कर रही हैं और पीड़ित परिवार जवाब का इंतजार कर रहे हैं।

अहमदाबाद से लंदन के लिए उड़ान भरने वाली एयर इंडिया फ्लाइट AI171 का खौफनाक मंजर आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। 12 जून 2025 को उड़ान भरने के महज 32 सेकंड बाद Boeing 787 Dreamliner आग के गोले में तब्दील हो गया था। इस हादसे में 260 लोगों की मौत ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। मगर एक साल बीत जाने के बाद भी सबसे अहम सवाल का जवाब अब तक नहीं मिल पाया है कि आखिर विमान गिरा क्यों।

क्या यह किसी पायलट की चूक थी, कोई तकनीकी गड़बड़ी थी या फिर इसके पीछे कोई ऐसी साजिश छिपी है जिसे अब तक उजागर नहीं किया गया? शुरुआती जांच रिपोर्ट ने जितने सवालों के जवाब दिए, उससे कहीं अधिक नए सवाल पैदा कर दिए। यही कारण है कि यह घटना अब केवल एक विमान हादसा नहीं, बल्कि आधुनिक एविएशन इतिहास की सबसे बड़ी पहेली बन चुकी है। पीड़ित परिवार आज भी उन आखिरी 32 सेकंड की सच्चाई जानने के लिए तरस रहे हैं।

जांच एजेंसियों ने इतना तो स्पष्ट कर दिया है कि हादसे से चंद सेकंड पहले विमान के दोनों इंजन अचानक फ्यूल सप्लाई रुकने के कारण ठप पड़ गए थे। कॉकपिट में मौजूद दोनों Fuel Control Switches 'RUN' से 'CUTOF' मोड में पहुंच गए थे। इसके बाद विमान तेजी से नीचे आया और एयरपोर्ट के नजदीक इमारतों से टकरा गया। लेकिन असली पेच यही है कि इन स्विचों को आखिर बदला किसने। क्या किसी पायलट ने जानबूझकर ऐसा किया, या यह तकनीकी खराबी थी, या फिर कॉकपिट में ऐसा कुछ घटा जिसने अनुभवी पायलटों को उलझन में डाल दिया? एक साल बाद भी इनका कोई निर्णायक जवाब सामने नहीं आया, और इसी वजह से इस हादसे को लेकर बहस लगातार गरमाती जा रही है।

32 सेकंड में थम गई थीं 260 जिंदगियां

AI171 हादसा भारत के सबसे भयावह विमान हादसों में शुमार है। विमान में सवार 242 लोगों में से 241 की जान चली गई थी, जबकि जमीन पर मौजूद 19 लोग भी इसकी चपेट में आ गए। इस उड़ान की कमान बेहद तजुर्बेकार कैप्टन सुमीत सभरवाल के हाथों में थी और उनके साथ फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर मौजूद थे। दोनों के पास हजारों घंटों का उड़ान अनुभव था, ऐसे में यह सवाल और गहरा हो जाता है कि इतनी अनुभवी टीम के होते हुए इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई।

AAIB की शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, टेकऑफ के तुरंत बाद दोनों इंजन फ्यूल सप्लाई रुकने से अपनी ताकत खो बैठे। पायलटों ने इंजन दोबारा चालू करने की कोशिश भी की, मगर तब तक काफी देर हो चुकी थी। विमान इतनी कम ऊंचाई पर था कि उसे संभालना नामुमकिन हो गया और अंततः वह सीधे रिहायशी इलाके में जा गिरा।

थ्योरी 1: क्या किसी पायलट ने जानबूझकर रोकी फ्यूल सप्लाई?

सबसे विवादास्पद धारणा यही है कि कॉकपिट में किसी पायलट ने जानबूझकर फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद कर दिए। Cockpit Voice Recorder में दर्ज बातचीत ने इस आशंका को और गहरा कर दिया। रिकॉर्डिंग में एक पायलट पूछता सुनाई देता है, 'तुमने फ्यूल क्यों बंद किया?' जवाब मिलता है, 'मैंने नहीं किया।' इसके कुछ ही सेकंड बाद विमान क्रैश हो जाता है।

एविएशन विशेषज्ञों का कहना है कि इन स्विचों में लॉकिंग मैकेनिज्म लगा होता है और इन्हें गलती से एक साथ बंद करना बेहद कठिन माना जाता है। यही कारण है कि कुछ जानकार इसे 'deliberate action' यानी सोची-समझी हरकत मान रहे हैं। हालांकि भारतीय जांच एजेंसी AAIB ने अब तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है। एजेंसी का साफ कहना है कि जांच पूरी होने से पहले पायलटों को दोषी ठहराना गलत होगा।

थ्योरी 2: कहीं यह महज मानवीय भूल तो नहीं?

दूसरी धारणा यह है कि यह हादसा किसी भ्रम या मानवीय गलती का परिणाम हो सकता है। टेकऑफ को विमान उड़ाने का सबसे संवेदनशील चरण माना जाता है, जिस दौरान पायलटों पर भारी दबाव रहता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि कॉकपिट में अचानक उपजे तनाव, चेतावनी संकेतों या तकनीकी गड़बड़ी के बीच गलती से स्विच हिल गए हों।

पायलट संगठनों ने इस बात का समर्थन किया है कि जांच में सभी तकनीकी पहलुओं को पहले खारिज किया जाना चाहिए। Federation of Indian Pilots ने दावा किया कि विमान में पहले से ही कई तकनीकी दिक्कतें मौजूद थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली से अहमदाबाद आते समय विमान stabiliser problem का सामना कर चुका था। इसके अलावा एयर कंडीशनिंग और इलेक्ट्रिकल सिस्टम में भी खराबी बताई गई। ऐसे में पायलट यूनियनों का कहना है कि सिर्फ दो सेकंड की ऑडियो क्लिप के आधार पर पायलटों को जिम्मेदार ठहराना जल्दबाजी होगी।

थ्योरी 3: क्या बोइंग 787 में थी कोई तकनीकी खामी?

तीसरी और सबसे गंभीर धारणा तकनीकी या सॉफ्टवेयर फेलियर की है। कुछ एविएशन विशेषज्ञ मानते हैं कि किसी इलेक्ट्रॉनिक खराबी या छिपे हुए सॉफ्टवेयर ग्लिच ने फ्यूल स्विच को प्रभावित किया हो सकता है। बोइंग 787 Dreamliner एक अत्याधुनिक विमान है, जिसके कई सिस्टम पूरी तरह कंप्यूटर से नियंत्रित होते हैं। ऐसे में किसी इलेक्ट्रॉनिक गड़बड़ी की आशंका को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता।

हालांकि अब तक जांच एजेंसियों को Boeing 787 या GE इंजन में किसी डिजाइन संबंधी खामी का कोई सीधा सबूत नहीं मिला है। न ही DGCA या अमेरिकी एविएशन रेगुलेटर ने इस विमान मॉडल को ग्राउंड किया है। लेकिन इंजन के पुर्जों और विमान के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की जांच अब भी जारी है, और यही वजह है कि अंतिम रिपोर्ट आने में देरी हो रही है।

आखिर जांच में इतनी देरी क्यों?

विमान हादसे की जांच केवल दोष तय करने के लिए नहीं होती, बल्कि हादसे की असली जड़ तक पहुंचने के लिए की जाती है। AI171 मामले में भारत के साथ-साथ अमेरिका और ब्रिटेन की एजेंसियां भी शामिल हैं, क्योंकि विमान बोइंग का था, इंजन अमेरिकी थे और यात्रियों में ब्रिटिश नागरिक भी मौजूद थे। तकनीकी परीक्षण, इंजन एनालिसिस और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सलाह-मशविरा अब भी चल रहा है।

सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले हर संभावित कारण की पुष्टि करना चाहती हैं। यही कारण है कि एक साल गुजरने के बाद भी अंतिम रिपोर्ट सामने नहीं आई है। संभावना जताई जा रही है कि पहले एक अंतरिम रिपोर्ट जारी की जाए और बाद में अंतिम निष्कर्ष दिए जाएं।

परिवारों को आज भी सिर्फ जवाब की दरकार

हादसे में अपनों को खोने वाले परिवार आज भी जवाब की मांग कर रहे हैं। उनके लिए मुआवजा सबकुछ नहीं है, वे यह जानना चाहते हैं कि आखिर उनके अपनों की मौत कैसे हुई। हादसे के इकलौते जीवित बचे यात्री विश्वकुमार रमेश ने भी जांच में पारदर्शिता की मांग उठाई है।

परिवारों का कहना है कि जब तक अंतिम रिपोर्ट नहीं आती, तब तक अटकलें और विवाद यूं ही चलते रहेंगे। कोई पायलटों को कठघरे में खड़ा कर रहा है तो कोई बोइंग को, लेकिन असली सच्चाई अब भी बंद फाइलों और डेटा रिकॉर्डर में दबी हुई है। यही वजह है कि एयर इंडिया AI171 हादसा आज भी भारत के सबसे बड़े एविएशन रहस्यों में गिना जाता है।

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