बिना दवा और थेरेपी के ठीक हो रहे मरीज! इस अनोखे शिविर में इस तरीके से होता है बीमारियों का इलाज

मध्य प्रदेश के खरगोन में 12 जून से शुरू हुए तीन दिवसीय नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर में बिना गोली, दवाई और मशीन थेरेपी के लोगों को स्वस्थ बनाने का दावा किया जा रहा है। ब्रह्म मुहूर्त में ध्यान, व्यायाम और 15 से 20 प्रकार के स्वास्थ्यवर्धक नाश्ते के जरिए शारीरिक और मानसिक रोगों से राहत दी जा रही है।

मध्य प्रदेश के खरगोन में 12 जून से एक अलग ही अंदाज वाला स्वास्थ्य शिविर शुरू हुआ है, जहां न गोली दी जा रही है, न दवाई और न ही किसी मशीन से थेरेपी की जा रही है, फिर भी लोगों को बीमारियों से छुटकारा दिलाने का दावा किया जा रहा है। यह तीन दिवसीय नि:शुल्क आयोजन शहर की दामखेड़ा कॉलोनी स्थित गुप्तेश्वर महादेव मंदिर में हो रहा है।

नए नजरिए वाला शिविर

यह शिविर सन टू ह्यूमन फाउंडेशन की ओर से लगाया गया है, जिसमें शामिल होने वाले लोगों को ब्रह्म मुहूर्त में विशेष गतिविधियां कराई जा रही हैं। आयोजकों का कहना है कि खुले आसमान के नीचे किए जाने वाले ये अभ्यास शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाते हैं, जिससे व्यक्ति को ऊर्जा, प्रसन्नता और मानसिक शांति का अनुभव होता है।

सुबह 5:45 से 7:30 बजे तक का समय

शिविर प्रतिदिन सुबह 5:45 बजे से 7:30 बजे तक चलता है। इस दौरान लोगों को आलस्य, थकान, चिड़चिड़ापन, डर, क्रोध और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं से राहत दिलाने के लिए खास अभ्यास कराए जा रहे हैं।

कौन कर रहा है संचालन

शिविर का संचालन शहर के जितेंद्र भावसार कर रहे हैं, जिन्होंने परम पूज्य आलय जी से प्रशिक्षण लिया है। वह पिछले कई वर्षों से लोगों को प्राकृतिक तरीके से स्वस्थ रखने के लिए नि:शुल्क शिविर लगाते आ रहे हैं।

नाश्ता है सबसे खास

आयोजकों के अनुसार, इस शिविर की सबसे बड़ी विशेषता इसका नाश्ता है। इसमें 15 से 20 प्रकार के फल, बीज और अनाज से तैयार स्वास्थ्यवर्धक आहार दिया जाएगा, जो शरीर को भीतर से मजबूत बनाने में मदद करता है।

जितेंद्र भावसार बताते हैं कि यह नाश्ता हर व्यक्ति की उम्र, वजन और शरीर की जरूरत के अनुसार तय किया जाता है। इसके साथ ध्यान और व्यायाम भी कराया जाता है, ताकि शरीर खुद बीमारियों से लड़ने की क्षमता विकसित कर सके।

किन समस्याओं में राहत का दावा

उनका दावा है कि इस पद्धति से गैस, कब्ज, एसिडिटी, मोटापा, ब्लड प्रेशर, शुगर, थायराइड, दमा, तनाव, अनिद्रा और डिप्रेशन जैसी समस्याओं में भी आराम मिलता है। भावसार का मानना है कि सही आहार ही सबसे बड़ी औषधि है।

शिविर से जुड़े लोगों का कहना है कि नियमित अभ्यास और संतुलित आहार की वजह से उन्हें दवाइयों पर निर्भरता कम करनी पड़ी है। धीरे-धीरे यह प्राकृतिक स्वास्थ्य पद्धति लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बनती जा रही है।

पूरी तरह नि:शुल्क है शिविर

यह शिविर पूरी तरह नि:शुल्क है और इसमें कोई भी व्यक्ति भाग ले सकता है। इसके लिए किसी विशेष प्रक्रिया या पंजीयन की जरूरत नहीं है। यानी जो लोग बिना दवा के खुद को स्वस्थ रखना चाहते हैं, वे इस शिविर में शामिल हो सकते हैं।

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