धान की फसल का बड़ा दुश्मन तना छेदक, खेत में दिखते ही करें ये उपाय वरना उठाना पड़ेगा नुकसान

धान की खेती में तना छेदक कीट पौधे को अंदर से खाकर सुखा देता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार फेरोमोन ट्रैप, ट्राइको कार्ड, नीम तेल का छिड़काव, लाइट ट्रैप और रोपाई से पहले पौध की कटिंग जैसे उपायों से इस पर असरदार नियंत्रण पाया जा सकता है।

इन दिनों किसान धान की बुवाई में जुटे हुए हैं। बुवाई शुरू होते ही फसल को कई रोगों और कीटों से बचाने के लिए विशेष सतर्कता बरतनी पड़ती है। इनमें सबसे घातक तना छेदक कीट माना जाता है, जो तने को खाकर पूरे पौधे को सुखा देता है। इस खतरे से फसल को कैसे सुरक्षित रखा जाए, इसको लेकर कृषि विशेषज्ञ अहम जानकारी दे रहे हैं।

क्यों बढ़ी किसानों की चिंता

मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के चलते खेती करने वाले किसानों को कई दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है। इनमें सबसे बड़ी चुनौती धान उगाने वाले किसानों के सामने खड़ी है। मौजूदा समय में धान की फसल में तना छेदक कीट किसानों की मुश्किलें बढ़ा रहा है, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है। यह कीट धान की बुवाई के समय, कल्ले फूटने की अवस्था में और अगेती फसल में बालियां निकलने के दौरान सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है।

कैसे पहचानें इस कीट को

इस कीट की पहचान मादा पतंगे के पीले अग्रपंखों पर बने खास काले निशान से की जा सकती है। मादा पतंगा पत्तियों के ऊपरी हिस्से पर समूह में अंडे देती है। इन अंडों से निकलने वाले लार्वा पत्तियों में छेद करते हुए गोभ में घुस जाते हैं और पौधे को क्षति पहुंचाते हैं। इसी वजह से धान के पौधे पीले-भूरे पड़कर सूखने लगते हैं।

नर्सरी के जरिए पहुंचता है खेत तक

कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. आई.के. कुशवाहा ने बातचीत में बताया कि फिलहाल कुछ किसानों ने धान की नर्सरी तैयार कर ली है, जबकि कई किसान अगले महीने रोपाई करेंगे। उन्होंने बताया कि तना छेदक कीट अक्सर नर्सरी के माध्यम से ही खेतों तक पहुंचता है, इसलिए इसकी रोकथाम के लिए किसानों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।

रोपाई से पहले करें यह काम

डॉ. कुशवाहा के मुताबिक, धान की रोपाई से पहले पौधों का करीब एक-तिहाई ऊपरी हिस्सा काटकर हटा देना चाहिए। देखने में आता है कि नर्सरी के पौधों के ऊपरी सिरे पर रुई जैसी संरचना बन जाती है, जिसके भीतर तना छेदक के अंडे छिपे रहते हैं। अगर रोपाई से पहले इस हिस्से को काटकर अलग कर दिया जाए, तो ये अंडे खेत तक नहीं पहुंच पाते।

उन्होंने आगाह किया कि यदि किसी वजह से खेत में तना छेदक का प्रकोप दिखाई दे, तो किसानों को तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। इसकी मादा पौधे के निचले हिस्से को नुकसान पहुंचाती है, जिससे पूरा पौधा सूख सकता है।

लाइट ट्रैप से करें कीट पर वार

तना छेदक पर काबू पाने के लिए किसान लाइट ट्रैप का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिसकी ओर आकर्षित होकर कीट नष्ट हो जाते हैं। इसके साथ ही नीम के तेल का छिड़काव, फेरोमोन ट्रैप और ट्राइको कार्ड का उपयोग भी कारगर उपाय माने जाते हैं।

इन उपायों से मिलेगा असरदार नियंत्रण

डॉ. कुशवाहा के अनुसार, धान की रोपाई के एक महीने बाद प्रति एकड़ खेत में 6 फेरोमोन ट्रैप और 2 ट्राइको कार्ड 10 दिन के अंतराल पर लगाने चाहिए। ऐसा करने से तना छेदक कीट का असर काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। फेरोमोन ट्रैप में नर कीट आकर्षित होकर खत्म हो जाते हैं, वहीं ट्राइको कार्ड से निकलने वाले मित्र कीट तना छेदक के अंडों को नष्ट कर देते हैं।

https://hindi.news18.com/news/agriculture/how-to-protect-paddy-crop-from-stem-borer-and-increase-yield-local18-10562151.html