बालोद में स्व-सहायता समूह की महिलाएं बीज उपचार से तैयार कर रहीं पौधे, जानें नारियल से लेकर पपीता तक के दाम

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में धरा क्लस्टर संगठन लाटाबोड़ से जुड़ी महिलाएं बीज उपचार कर विभिन्न प्रजातियों के पौधे तैयार कर रही हैं, जिन्हें बेचकर वे अतिरिक्त आय अर्जित करेंगी। नारियल, कटहल और मुनगा जैसे बड़े पौधे 200 रुपये में और नीम, इमली, पपीता व आम 50 रुपये प्रति पौधा बेचे जाएंगे।

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में महिला स्व-सहायता समूहों की महिलाएं पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में एक नई पहल कर रही हैं। धरा क्लस्टर संगठन लाटाबोड़ से जुड़ी ये महिलाएं बीज उपचार के जरिए अलग-अलग प्रजातियों के पौधे तैयार कर रही हैं। पौधे तैयार होने के बाद इन्हें बाजार में बेचकर आय अर्जित की जाएगी। इस प्रयास से जहां महिलाओं को अतिरिक्त रोजगार मिलेगा, वहीं क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने और लोगों को पौधारोपण के प्रति जागरूक करने में भी मदद मिलेगी।

कैसे होता है बीज उपचार का काम

क्लस्टर की सक्रिय महिला सोनी साहू ने बताया कि महिलाओं द्वारा बीज उपचार का काम किया जा रहा है। इसके लिए मिट्टी, गोबर खाद और पानी का इस्तेमाल कर बीजों को विशेष विधि से तैयार किया जाता है। उपचारित बीजों को सुरक्षित रखा जाता है और लगभग एक सप्ताह बाद उनमें अंकुरण शुरू हो जाता है।

उन्होंने आगे बताया कि अंकुर निकलने के बाद बीजों को पॉलीथिन बैग में स्थानांतरित कर पौधों के रूप में विकसित किया जाएगा। जब पौधे पर्याप्त रूप से तैयार हो जाएंगे, तब उनकी बिक्री की जाएगी।

पौधों के दाम पहले से तय

सोनी साहू के अनुसार समूह और क्लस्टर की महिलाओं ने विभिन्न पौधों की कीमतें पहले से ही निर्धारित कर दी हैं। नारियल, कटहल और मुनगा जैसे बड़े पौधों की कीमत 200 रुपये प्रति पौधा तय की गई है, जबकि नीम, इमली, पपीता और आम जैसे पौधे 50 रुपये प्रति पौधा की दर से बेचे जाएंगे।

महिलाओं का मानना है कि इन पौधों की बिक्री से उन्हें अच्छी आय प्राप्त होगी। इसके साथ ही वे खुद भी अपने घरों और बाड़ी में इन पौधों को लगाकर फल उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण का लाभ उठा सकेंगी।

पौधारोपण के लिए लोगों को करेंगी प्रेरित

वर्तमान में धरा क्लस्टर संगठन लाटाबोड़ बालोद की करीब 40 से 45 महिलाएं इस काम से जुड़ी हुई हैं। क्लस्टर की सक्रिय महिला जमुना उर्वशा ने बताया कि सभी महिलाओं ने मिलकर यह संकल्प लिया है कि वे स्वयं पौधे तैयार करेंगी और दूसरे लोगों को भी पौधारोपण के लिए प्रेरित करेंगी।

उनका कहना है कि जल स्रोतों में लगातार कमी, बढ़ता तापमान और पेड़ों की कटाई जैसी समस्याएं भविष्य के लिए चिंता का विषय हैं। ऐसे में अधिक से अधिक पौधे लगाना समय की जरूरत है। महिलाओं को उम्मीद है कि यह पहल न केवल उनकी आय बढ़ाएगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर और सुरक्षित पर्यावरण तैयार करने में भी मददगार साबित होगी।

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