शिक्षा नगरी के रूप में पहचानी जाने वाली कोटा अब अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को संजोने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ा रही है। कोटा विकास प्राधिकरण (केडीए) शहर के सुभाष नगर इलाके में वैदिक थीम पर आधारित एक भव्य पार्क का निर्माण करवा रहा है। यह केंद्र केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम लोगों को भारतीय संस्कृति, वेदों के ज्ञान और सनातन परंपराओं से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगा।
ऋषि परंपरा को जीवंत करेंगी भव्य प्रतिमाएं
इस अनूठे पार्क में भारतीय ऋषि परंपरा को साकार रूप देने के लिए महर्षि वेदव्यास, द्रोणाचार्य, भगवान परशुराम और भगवान धन्वंतरि सहित सप्त ऋषियों की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त सूर्य नमस्कार की अलग-अलग मुद्राओं को दर्शाती प्रतिमाएं भी लगाई जाएंगी, जो यहां आने वाले आगंतुकों और युवाओं को भारतीय आध्यात्मिक मूल्यों तथा योग के महत्व से परिचित कराएंगी।
13 करोड़ की लागत, मई 2027 तक होगा तैयार
केडीए आयुक्त बचनेश कुमार अग्रवाल के अनुसार कोटा में अपनी तरह का यह पहला और बेहद खास वैदिक पार्क तैयार किया जा रहा है। करीब 13 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस पार्क का निर्माण कार्य अप्रैल 2026 में आरंभ हो चुका है और इसके मई 2027 तक पूरी तरह तैयार हो जाने की संभावना है।
पार्क में योगाभ्यास के लिए विशेष रूप से बड़े ग्राउंड, महापुरुषों की प्रतिमाएं और वैदिक संस्कृति को दर्शाने वाली कई आकर्षक संरचनाएं विकसित की जा रही हैं।
14 हजार वर्गमीटर में आधुनिक और आयुर्वेदिक सुविधाएं
केडीए के निदेशक (अभियांत्रिकी) रविंद्र माथुर ने बताया कि करीब 14 हजार वर्गमीटर के विशाल क्षेत्र में आकार ले रहे इस पार्क में अत्याधुनिक के साथ-साथ पारंपरिक सुविधाएं भी मौजूद रहेंगी। यहां एक विशाल योग स्थल, आयुर्वेदिक वाटिका, ध्यान कुटिया, वॉक-वे, आयुर्वेद कियोस्क और आधुनिक सिंचाई तंत्र का निर्माण किया जाएगा।
मनोरंजन के लिए पार्क में एक शानदार बोटिंग ट्रैक भी बनाया जा रहा है, जहां लोग नौकायन का आनंद ले सकेंगे। साथ ही पार्क के चारों ओर विभिन्न प्रजातियों के आकर्षक और औषधीय पौधे लगाए जाएंगे।
आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र
वैदिक थीम पर विकसित हो रहा यह पार्क कोटा के निवासियों को भारतीय संस्कृति और वेदों के प्राचीन ज्ञान से रूबरू कराएगा। यहां के योग केंद्र, हरी-भरी हरित पट्टियां और ध्यान स्थल लोगों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक सिद्ध होंगे।
इस पार्क के बनने से क्षेत्रवासियों को एक स्वच्छ, शांत और प्राकृतिक वातावरण मिलेगा, जहां वे सुबह-शाम भ्रमण के साथ आयुर्वेद की उपयोगी जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे। यह वैदिक पार्क आने वाली पीढ़ियों को भारत की गौरवशाली सनातन परंपरा से जोड़ने में मील का पत्थर साबित होगा।
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