अगर आप ब्लड प्रेशर की दवा लेते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है। हमारे देश में 20 करोड़ से ज्यादा लोग हाई ब्लड प्रेशर से प्रभावित हैं। अक्सर देखा जाता है कि कई लोग बीपी की दवा शुरू तो करते हैं और महीनों तक उसका सेवन भी करते हैं, लेकिन जैसे ही बीपी सामान्य होने लगता है, वे दवा छोड़ देते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बीपी नॉर्मल होने पर दवा बंद कर देनी चाहिए। इसी पर हमने एशिया मारेंगो अस्पताल में ओबेसिटी एंड मेटाबोलिक डिसॉर्डर के डायरेक्टर डॉ. पारस अग्रवाल से बात की।
देश में कितने लोग हैं हाई बीपी के शिकार
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर चार में से एक वयस्क हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहा है। यानी करीब 20 करोड़ भारतीय इस समस्या से ग्रस्त हैं। इससे भी चिंताजनक बात यह है कि इनमें से साढ़े 7 करोड़ लोग ऐसे हैं जिन्हें हाई बीपी और डायबिटीज दोनों एक साथ हैं। दुर्भाग्य की बात यह है कि अधिकांश लोगों को तो यह पता ही नहीं होता कि वे डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं। यह एक साइलेंट किलर बीमारी मानी जाती है, जिसमें लाखों लोगों को नियमित रूप से दवा लेनी पड़ती है।
क्या सच में बीपी की दवा बंद कर देनी चाहिए
डॉ. पारस अग्रवाल बताते हैं कि जब कोई व्यक्ति बीपी की दवा लेता है, तो यह शरीर में कई स्तरों पर असर करती है और कई तरह के जैविक बदलाव लाती है। दवा के प्रभाव से रक्त वाहिकाओं को आराम मिलता है, जिससे वे चौड़ी हो जाती हैं और खून का प्रवाह सही तरीके से होने लगता है। कुछ दवाएं शरीर में जमा अतिरिक्त पानी और सोडियम को पेशाब के रास्ते बाहर निकाल देती हैं, जिससे खून की कुल मात्रा घटती है और धमनियों पर पड़ने वाला दबाव कम हो जाता है।
उनका कहना है कि जब तक दवा का असर शरीर में रहता है, तब तक ब्लड प्रेशर नियंत्रण में रहता है। लेकिन अगर अचानक दवा बंद कर दी जाए, तो शरीर में हुआ सकारात्मक बदलाव रुक जाता है और ब्लड प्रेशर फिर से बढ़ने लगता है। मेडिकल भाषा में इसे रिबाउंड हाइपरटेंशन कहा जाता है। इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना कभी भी ब्लड प्रेशर की दवा बंद नहीं करनी चाहिए।
अचानक दवा बंद करने के नुकसान
डॉ. अग्रवाल के मुताबिक, दवा का असर खत्म होते ही रक्त वाहिकाएं दोबारा सिकुड़ने लगती हैं और दिल की धड़कन तेज हो जाती है। इसके कारण ब्लड प्रेशर अचानक बहुत ऊंचे स्तर पर पहुंच सकता है। यह बढ़ा हुआ दबाव धमनियों की दीवारों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे ब्रेन हैमरेज यानी दिमाग की नस फटने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा दिल पर अचानक अतिरिक्त दबाव पड़ने से हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट जैसी स्थिति भी पैदा हो सकती है।
बीपी को सही रखने का सही तरीका
हाइपरटेंशन एक क्रोनिक यानी लंबे समय तक चलने वाली स्थिति है। एक बार होने के बाद इसका पूरी तरह ठीक होना बहुत मुश्किल होता है, लेकिन जीवनशैली में सुधार करके इसे नियंत्रण में रखा जा सकता है। अगर किसी का बीपी लगातार सामान्य आ रहा हो, तब भी दवा बंद करने का फैसला सिर्फ और सिर्फ डॉक्टर ही ले सकते हैं। डॉक्टर मरीज की सेहत और रिपोर्ट देखकर दवा की खुराक कम कर सकते हैं, लेकिन इसे अचानक रोकना जानलेवा साबित हो सकता है।
बीपी को सुरक्षित रूप से सामान्य बनाए रखने के लिए दवा के नियमित सेवन के साथ-साथ भोजन में नमक की मात्रा कम करना बहुत जरूरी है। हर रोज योग और सामान्य व्यायाम करना चाहिए।
किन चीजों से करें परहेज और क्या खाएं
- तेल, फ्राइड चीजें, पैकेटबंद और ज्यादा फैट वाली चीजें, प्रोसेस्ड फूड, फास्ट फूड, पिज्जा और बर्गर जैसी चीजों से बचना चाहिए।
- घर का शुद्ध और ताजा खाना खाना चाहिए।
- साबुत अनाज, दाल, हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, सीड्स और ड्राई फ्रूट्स को आहार में शामिल करना चाहिए।
- तनाव कम करना बहुत जरूरी है, इसके लिए मेडिटेशन और योग करें तथा रोज वॉक करें।
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