दिल्ली-एनसीआर में वियतनाम की कंपनी ग्रीन एसएम लिमो ने इलेक्ट्रिक टैक्सी सेवा की शुरुआत करते ही ड्राइवरों की नाराजगी का सामना करना शुरू कर दिया है। कंपनी ने इस इलाके में विनफास्ट ब्रांड की करीब एक हजार कारें सड़कों पर उतारी थीं और भर्ती के समय ड्राइवरों को अच्छी आमदनी का भरोसा दिया गया था। मगर पहले हफ्ते का भुगतान हाथ में आते ही ड्राइवरों के बीच गहरी निराशा फैल गई।
कई ड्राइवरों का कहना है कि उन्हें सिर्फ एक हजार रुपये से कुछ ही ज्यादा रकम मिली, जबकि उनकी उम्मीद इससे कई गुना अधिक की थी। इसके चलते उनकी घर-गृहस्थी की जिम्मेदारियां प्रभावित हो रही हैं। कंपनी ने शुरुआती दौर की इन दिक्कतों को माना है और ड्राइवरों के साथ बातचीत शुरू कर दी है। ब्लू स्मार्ट के बंद होने के बाद इस ईवी कैब सेवा को प्रीमियम इलेक्ट्रिक कैब क्षेत्र की खाली जगह भरने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा था। ड्राइवरों का आरोप है कि वादे और हकीकत के बीच बड़ा फासला है, जिससे उनका भरोसा कमजोर पड़ रहा है।
लॉन्च और शुरुआती वादे
ग्रीन एसएम लिमो का ऐप कुछ हफ्ते पहले ही सक्रिय हो गया था, लेकिन इसकी आधिकारिक सेवाएं 5 जून को शुरू हुईं। लॉन्च कार्यक्रम में दिल्ली और हरियाणा के बड़े नेता भी मौजूद रहे। कंपनी ने ड्राइवरों से वादा किया था कि बुकिंग कम रहने पर भी उन्हें दो महीने तक हर महीने कम से कम 35,000 रुपये की गारंटीड आमदनी दी जाएगी। इसके बाद कमाई प्रदर्शन के आधार पर तय होने की बात कही गई थी। कंपनी हर मंगलवार को भुगतान करती है।
ड्राइवरों को सबसे ज्यादा आकर्षित करने वाली बात यह थी कि उन्हें अपनी गाड़ी खरीदने की जरूरत नहीं थी, क्योंकि कंपनी खुद विनफास्ट कारें मुहैया करा रही है। शुरुआत में यह पूरा प्रस्ताव बेहद आकर्षक लग रहा था, मगर भुगतान आते ही तस्वीर बदल गई। एक कैब ड्राइवर ने बताया कि पूरे हफ्ते की मेहनत के बदले उसे महज 1,064 रुपये मिले, जबकि उसे 8,000 रुपये से ज्यादा मिलने की उम्मीद थी।
भुगतान और शर्तों पर टकराव
ड्राइवरों का आरोप है कि कंपनी ने गारंटीड इनकम पाने के लिए कई नई शर्तें जोड़ दी हैं, जिनका जिक्र शुरुआत में नहीं किया गया था। अब 90 प्रतिशत से ज्यादा बुकिंग स्वीकार करने की दर, 90 प्रतिशत ट्रिप पूरी करने की दर और कम से कम 4.8 की ग्राहक रेटिंग को अनिवार्य कर दिया गया है।
इसके साथ ही ड्राइवरों को घर पर रहते हुए या गाड़ी चार्ज होने के दौरान ऐप पर ऑनलाइन रहने से रोक दिया गया है। उन्हें कहा गया है कि वे सिर्फ गाड़ी में बैठकर ड्यूटी शुरू करने के बाद ही लॉगिन करें। कई ड्राइवरों ने परमिट से जुड़ी परेशानी भी गिनाई। दिल्ली और उत्तर प्रदेश में गाड़ियों को पूरी अनुमति न मिलने के कारण नोएडा जैसी जगहों की बुकिंग लेने या रद्द करने में दिक्कत हो रही है।
कंपनी का पक्ष
ग्रीन एसएम के एक अधिकारी ने कहा कि कंपनी शुरुआती चरण में अपने ड्राइवर पार्टनर्स की प्रतिक्रिया को गंभीरता से ले रही है। ड्राइवरों से सीधे मिलकर उनकी बात सुनी गई है और समस्याओं के हल पर काम जारी है। कंपनी ऑपरेशनल डेटा की पड़ताल कर जरूरी बदलाव करने की तैयारी में है।
इसके अलावा योग्य ड्राइवरों को गाड़ी घर ले जाने की नई सुविधा देने की योजना भी है, ताकि उनकी सहूलियत बढ़ सके। कंपनी का लक्ष्य देशभर में 10,000 कारें तैनात करने का है। दूसरी ओर ड्राइवरों का कहना है कि अगर जल्द ठोस बदलाव नहीं किए गए तो उनकी रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ेगा। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही है।
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