पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भूजल स्तर जिस रफ्तार से नीचे खिसक रहा है, वह आने वाले समय के लिए एक गंभीर चुनौती के रूप में सामने आ रहा है। जानकारों का मानना है कि अगर वक्त रहते आम लोगों की भागीदारी से ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आगे चलकर शुद्ध पेयजल तक पहुंच भी मुश्किल हो सकती है।
मानसून बन सकता है संकट से उबरने का जरिया
आने वाले मानसून को इस समस्या से निपटने का एक बड़ा अवसर बताया जा रहा है। मेरठ भूगर्भ जल विभाग की सीनियर जियोफिजिस्ट अधिकारी अदिति सिंह ने जल संचय के महत्व पर विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि बारिश का पानी संभालकर रखना और उसे जमीन में पहुंचाना ही इस संकट को टालने की दिशा में सबसे कारगर उपाय साबित हो सकता है।
बारिश से पहले जरूरी हैं ये काम
अदिति सिंह ने स्पष्ट किया कि बरसात शुरू होने से पहले वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की सफाई बेहद जरूरी है। साथ ही अमृत सरोवरों का समुचित रखरखाव भी उतना ही अहम है। उनका कहना था कि यही दोनों उपाय हमें इस बड़े जल संकट से बचा सकते हैं।
जन-भागीदारी ही है समाधान की कुंजी
विशेषज्ञों के अनुसार, सरकारी प्रयासों के साथ-साथ हर नागरिक का सहयोग इस मुहिम को सफल बना सकता है। यदि समय रहते सामूहिक रूप से जल संचय की दिशा में कदम बढ़ाए गए, तो भविष्य में बूंद-बूंद के लिए तरसने जैसी स्थिति से बचा जा सकता है।
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