मुजफ्फरपुर की शाही लीची का दाम काजू से भी ऊंचा, 1200 रुपये सैकड़ा तक पहुंची कीमत, विदेशों तक डिमांड बरकरार

खराब मौसम और जलवायु परिवर्तन के चलते इस बार मुजफ्फरपुर की शाही लीची के उत्पादन में 75% तक गिरावट आई है, जिससे इसकी कीमत 1200 रुपये प्रति सैकड़ा तक चली गई है। इसके बावजूद देश-विदेश में इसकी मांग में कोई कमी नहीं है।

अपने अनोखे स्वाद और मिठास के लिए दुनिया भर में पहचानी जाने वाली मुजफ्फरपुर की शाही लीची इस बार रिकॉर्ड दामों पर बिक रही है। हालत यह है कि इसकी कीमत अब सूखे मेवे यानी काजू से भी आगे निकल गई है। बाजार में यह फल 1200 रुपये प्रति सैकड़ा तक की ऊंची दर पर पहुंच चुका है।

उत्पादन में भारी गिरावट

इस साल मौसम की मार और जलवायु परिवर्तन का सीधा असर शाही लीची की फसल पर पड़ा है। प्रतिकूल मौसमी हालात के कारण इसके उत्पादन में 75% तक की भारी कमी दर्ज की गई है। पैदावार इतनी घट जाने के कारण ही बाजार में इसकी आपूर्ति सीमित हो गई और दाम तेजी से ऊपर चढ़ गए।

मांग में कोई कमी नहीं

फसल की भारी किल्लत के बावजूद इस लीची की वैश्विक मांग पर कोई असर नहीं पड़ा है। इसकी बेमिसाल गुणवत्ता और सीमित उपलब्धता के चलते देश और विदेश के ग्राहक ऊंची कीमत चुकाकर भी इसे खरीदने के लिए तैयार दिख रहे हैं। यही वजह है कि सीमित मात्रा में पहुंच रही यह लीची हाथों-हाथ बिक रही है।

बागान मालिकों के सामने आर्थिक चुनौती

विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार के खराब मौसम ने केवल पैदावार को ही प्रभावित नहीं किया, बल्कि लीची के बाग मालिकों के सामने आर्थिक मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। कम उत्पादन के चलते किसानों और बागान मालिकों को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

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