सागर जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर नेशनल हाईवे 44 के किनारे बसा मेहर गांव इन दिनों अपनी रहस्यमयी कहानियों के कारण लोगों की जुबान पर है। वैसे तो इस गांव की पहचान हिंगलाज देवी माता मंदिर के रूप में होती है, लेकिन यहां मौजूद एक पुरानी गुफा को लेकर ग्रामीणों के बीच आज भी तरह-तरह के किस्से सुनाई देते हैं। कहा जाता है कि इस गुफा के भीतर कभी एक पूरी बारात चली गई थी, जो फिर कभी लौटकर नहीं आई।
पांडवों से जुड़ा गांव का इतिहास
गांव में मान्यता है कि यहां पांडवों का खास नाता रहा है। गांव का नाम मेहर पड़ने और यहां विराजमान गुप्तेश्वर महादेव को भी पांडवों से ही जोड़कर देखा जाता है। ग्रामीणों के अनुसार पहले यहां केवल पत्थरों की अद्भुत नक्काशी से बना एक छोटा सा मढ़ हुआ करता था। सालों पहले यहां महंत शंकर पुरी महाराज आए और उनके शिष्य हंस पुरी महंत जी ने उस पुराने मंदिर को हटाकर नया निर्माण कराया। इस दौरान देवी जी को जमीन से एक मंजिल ऊपर विराजमान कर दिया गया।
रहस्यमयी गुफा की कहानियां
जानकारी के मुताबिक गांव में मौजूद इस रहस्यमयी गुफा को कुछ साल पहले मंदिर के महंत ने एक बड़ी पत्थर की शिला रखकर बंद करवा दिया था। इस गुफा को लेकर अलग-अलग कहानियां प्रचलित हैं। बताया जाता है कि बहुत साल पहले एक ग्वाल मंदिर के पास से गुफा के भीतर जाता था और नदी की धार में जाकर निकलता था।
कुछ लोगों का कहना है कि यह गुफा गढ़ पहरा तक जाती थी, तो कुछ इसे कोई गुप्त रास्ता मानते हैं। यह भी कहा जाता है कि एक बार इसी गुफा में एक पूरी बारात भीतर गई थी, जो आज तक वापस नहीं लौटी। यह बात आज भी एक अनसुलझा राज बनी हुई है।
गुप्तेश्वर महादेव का चमत्कार
मंदिर के पास ही करीब 5 फीट की गहराई में भोलेनाथ का शिवलिंग स्थापित है, जिन्हें गुप्तेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। कुछ साल पहले इन्हें जमीन के स्तर तक लाने के लिए खुदाई शुरू की गई थी, लेकिन ग्रामीणों और महंत के तमाम प्रयास नाकाम साबित हुए। गुप्तेश्वर महादेव 1 इंच भी टस से मस नहीं हुए, जिसके बाद उन्हें उसी तरह रहने दिया गया जैसे वे सदियों से विराजमान हैं। मान्यता है कि इन शिवलिंग की स्थापना भी पांडवों ने ही की थी।
आंधी-तूफान से नहीं होता फसलों को नुकसान
ग्रामीणों का कहना है कि इस क्षेत्र पर माता की विशेष कृपा बनी हुई है। यहां कभी भी आंधी-तूफान, ओलावृष्टि या बाढ़ जैसी स्थिति से फसलों को नुकसान नहीं पहुंचा है। खास बात यह है कि इस गांव में आज तक कभी ओलावृष्टि नहीं हुई और इसके पीछे सभी ग्रामीण माता हिंगलाज का आशीर्वाद और छत्रछाया मानते हैं।
ग्रामीणों ने बताए राज
80 वर्षीय हुकम सिंह बताते हैं कि उन्होंने अपने बाप-दादाओं से सुना है कि यहां कभी पांडव आए थे और उन्होंने मेहर भरा था, इसी कारण गांव का नाम मेहर पड़ गया। उन्हीं के द्वारा यहां देवी जी और शिवलिंग की स्थापना की गई थी। उनके मुताबिक यहां एक गुफा भी है, जिसे कुछ साल पहले महंत जी ने पत्थर की एक बड़ी शिला रखकर बंद करवा दिया। कहा जाता है कि इसमें से अलग-अलग जगहों के लिए रास्ते जाते थे, लेकिन वे कहां-कहां तक जाते थे, यह आज भी रहस्य है।
राजा भैया राजपूत बताते हैं कि यह बहुत सिद्ध स्थान है। इस क्षेत्र में माता की ऐसी कृपा है कि यहां कभी ओले नहीं गिरते और न ही किसी तरह का कोई नुकसान होता है। उनका मानना है कि माता ही सबकी रक्षा करती हैं।
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