अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव एक बार फिर तेज़ हो उठा है। पाकिस्तान की मध्यस्थता से जो संघर्षविराम हुआ था, उसके टूटते ही दोनों देश दोबारा भीषण लड़ाई में उलझ गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नया चरण पहले से कहीं अधिक गंभीर साबित हो सकता है और इसकी आंच पूरी दुनिया तक पहुंच सकती है।
पहले चरण से कैसे अलग है यह दौर
फरवरी में जब यह युद्ध शुरू हुआ था, तब दोनों पक्षों का निशाना मुख्य रूप से एक-दूसरे के सैन्य ठिकाने और शीर्ष नेतृत्व था। लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे हैं। लड़ाई ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है जहां बुनियादी ढांचे यानी इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जा रहा है, जो टकराव की गंभीरता को और बढ़ा देता है।
क्यों चिंतित है पूरी दुनिया
इस बढ़ते सैन्य संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर बेचैनी पैदा कर दी है। सबसे बड़ी आशंका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर है, जहां बढ़ता तनाव तेल और गैस की आपूर्ति को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है।
आम लोगों पर क्या होगा असर
अगर आपूर्ति बाधित हुई तो इसका सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। महंगाई बढ़ सकती है, ईंधन की किल्लत गहरा सकती है और आर्थिक अस्थिरता का खतरा मंडराने लगेगा। यही वजह है कि इस संघर्ष को महज दो देशों की लड़ाई नहीं, बल्कि वैश्विक संकट के रूप में देखा जा रहा है।
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