नेपाल ने एक नए बयान में साफ किया है कि उसने भारतीय आमों के आयात पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं लगाया है और मांग के अनुसार कुछ नियमों के पालन के साथ इन फलों को अपने बाजारों में आने की अनुमति दी जा रही है। यह सफाई उन खबरों के कुछ दिन बाद आई, जिनमें नेपाली अधिकारियों ने कहा था कि अधिक कीटनाशक वाले भारतीय आमों के आयात को सीमित किया गया है और सीमा से लगे इलाकों, खासकर मधेश प्रांत में 'क्वारंटीन' सुविधाओं की कमी के चलते यह कदम उठाया गया।
कृषि मंत्रालय ने बुधवार को दी सफाई
कृषि, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने बुधवार को जारी अपने बयान में दोहराया कि भारत से आने वाले आमों के आयात पर कोई रोक नहीं है। मंत्रालय के अधीन काम करने वाले 'प्लांट क्वारंटीन एंड पेस्टिसाइड मैनेजमेंट सेंटर' ने बताया कि विभिन्न मीडिया और सोशल मीडिया मंचों पर भारतीय आमों पर प्रतिबंध से जुड़ी खबरें आने के बाद इस मामले की ओर ध्यान गया। मंत्रालय के अनुसार, उसने आयात पर कोई पाबंदी नहीं लगाई है और तय नियमों के तहत मांग के आधार पर इन फलों के प्रवेश की इजाजत दी जा रही है।
मधेश प्रांत में रुकी थी आमों की खेप
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले मधेश प्रांत की भिट्टामोड़ 'क्वारंटीन' जांच चौकी पर भारत से आई आमों की एक बड़ी खेप को फलों में हानिकारक कीटों की आशंका के कारण रोक लिया गया था। मधेश प्रांत के भूमि प्रबंधन, कृषि एवं सहकारिता मंत्रालय के प्रवक्ता मनीष कुमार पाल ने बताया कि भारतीय अधिकारियों की ओर से 'प्लांट हेल्थ सर्टिफिकेट' जारी होने के बाद उस खेप को अब छोड़ दिया गया है।
व्यापारी संघों ने जताई थी चिंता
समाचार पत्र 'द राइजिंग नेपाल' के मुताबिक, मधेश प्रांत के जनकपुरधाम में फल और सब्जी व्यापारियों के संघ के महासचिव भुवनेश्वर पुरबे ने पहले आगाह किया था कि भारतीय आमों का आयात रोकने से घरेलू बाजारों में आम की कमी हो सकती है। उन्होंने सरकार को सुझाव दिया था कि पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय 'क्वारंटीन' व्यवस्था को मजबूत किया जाए और उचित गुणवत्ता जांच के बाद भारतीय फलों को बाजार में आने दिया जाए।
नए नियमों में क्या है
नेपाल के प्लांट प्रोटेक्शन ऑर्गनाइजेशन ने 10 जून को जारी बयान में कहा कि भारतीय आमों का आयात पहले की तरह जारी है। संगठन के अनुसार, भारत से आने वाली आम की खेपों को पौध स्वास्थ्य नियमों का पालन करना होगा। इसके तहत नेपाली आयातकों को भारत सरकार की ओर से जारी वैध फाइटोसैनिटरी सर्टिफिकेट दिखाना अनिवार्य होगा। आयात की इन नई शर्तों में हॉट वॉटर ट्रीटमेंट का नियम सबसे अहम माना जा रहा है।
क्या है हॉट वॉटर ट्रीटमेंट
हॉट वॉटर ट्रीटमेंट के तहत आमों को निर्यात से पहले गर्म पानी से उपचारित किया जाता है, ताकि फल में मौजूद कीटों, रसायनों और उससे जुड़े रोगों को रोका जा सके। भारत सरकार ने नेपाल के इन नए नियमों पर चिंता जताई है। भारत का कहना है कि नेपाल ने ये नियम बनाने से पहले उसके साथ कोई चर्चा नहीं की। भारत ने नेपाल के इस रवैये का मुद्दा डब्ल्यूटीओ में उठाया है।
भारत ने भी जारी किया था बयान
भारत सरकार ने भी बुधवार को नेपाल में आम के आयात पर रोक से जुड़ी कुछ मीडिया रिपोर्टों को 'तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक' करार दिया था। सरकार ने कहा कि नेपाल को होने वाला भारतीय आमों का निर्यात बिना किसी रुकावट के लगातार जारी है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, नेपाल के प्लांट क्वारंटीन और कीटनाशक प्रबंधन केंद्र ने स्वयं 10 जून को स्पष्ट किया कि भारतीय आमों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।
https://www.indiatv.in/paisa/business/no-ban-on-indian-mango-imports-but-nepal-has-quietly-introduced-new-rules-2026-06-11-1224452