खेती में लगातार बढ़ती लागत और कटाई के मौके पर मजदूरों की भारी कमी ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। इसी मुश्किल के बीच अंबाला के बराड़ा क्षेत्र के प्रगतिशील किसान मुनीश कुमार ने अपनी सूझबूझ से एक ऐसा देसी आविष्कार किया है, जो सूरजमुखी की खेती करने वाले किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। उन्होंने गेहूं और धान की कटाई में इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक कंबाइन मशीन में थोड़ा फेरबदल कर उसे ऐसी मशीन में बदल दिया है, जो घंटों का काम चंद मिनटों में निपटा रही है।
मजदूरों की किल्लत के बीच निकाला अनोखा रास्ता
इस समय पूरे प्रदेश में सूरजमुखी की फसल पककर पूरी तरह तैयार खड़ी है और किसान कटाई के लिए मजदूरों की तलाश में इधर-उधर भटक रहे हैं। सीजन आते ही मजदूरी आसमान छूने लगती है। मौजूदा हालात में एक एकड़ सूरजमुखी की कटाई के लिए मजदूर करीब 5500 रुपये तक वसूल रहे हैं, जिससे किसानों के हाथ में मुनाफा न के बराबर बचता है। इसी भारी खर्च और परेशानी से बचने के लिए मुनीश कुमार ने अपनी कंबाइन मशीन पर करीब 1.20 लाख रुपये खर्च कर एक खास देसी जुगाड़ फिट करवाया।
मशीन के आगे लोहे का एक ऐसा डिजाइन तैयार किया गया है, जो सूरजमुखी के फूलों को बेहद सफाई के साथ काटता है। इससे समय और पैसा दोनों की बड़ी बचत हो रही है।
5 घंटे का काम अब महज 1 घंटे में
आमतौर पर मजदूरों से एक एकड़ खेत की कटाई करवाई जाए तो कम से कम 5 से 6 घंटे लग जाते हैं। इतना ही नहीं, कटाई के बाद फसल को कई दिनों तक खेत में सूखने के लिए छोड़ना पड़ता है। इस बीच अगर अचानक मौसम बिगड़ जाए या तेज बारिश हो जाए, तो पूरी फसल काली पड़कर बर्बाद हो जाती है।
वहीं मुनीश की यह मॉडिफाइड मशीन सिर्फ 1 से 2 घंटे के भीतर एक एकड़ फसल की कटाई कर देती है। यह केवल कटाई ही नहीं करती, बल्कि साथ के साथ दानों को छीलकर और साफ करके सीधे ट्रॉली में डाल देती है। यानी फसल को खेत में सुखाने की झंझट ही खत्म हो जाती है।
एक दिन में 6 एकड़ खेत की सफाई
मुनीश कुमार बताते हैं कि इस मशीन की मदद से अब वे अकेले एक ही दिन में 6 एकड़ सूरजमुखी की फसल काटकर सीधे मंडी तक पहुंचा रहे हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि कम समय में उपज बिक जाती है और मौसम की मार से होने वाले नुकसान का खतरा पूरी तरह खत्म हो जाता है। साथ ही खेत जल्दी खाली होने से किसान बिना किसी देरी के अगली फसल की बुआई की तैयारी भी शुरू कर सकते हैं।
मिट्टी को पोषण और दूसरों के लिए प्रेरणा
इस मशीन की एक और खूबी यह है कि यह सिर्फ फूलों की कटाई करती है और खेत में बचने वाले डंठलों को इस तरह काटती है कि उन्हें आसानी से जोतकर मिट्टी में मिलाया जा सके। ये डंठल खेत में सड़कर जैविक खाद का काम करते हैं, जिससे जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है।
मुनीश का कहना है कि खेती की इन चुनौतियों को देखते हुए अगर गांव के कुछ किसान आपस में मिलकर इस तरह का देसी जुगाड़ कंबाइन में तैयार करवा लें, तो पूरे गांव के किसानों की किस्मत बदल सकती है और मजदूरों पर निर्भरता हमेशा के लिए खत्म हो सकती है।
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