शहरों में रहने वाले लोगों के लिए आने वाला महीना बरसों से अटके कामों को निपटाने का बड़ा अवसर लेकर आ रहा है। राज्य सरकार 12 जून से 15 जुलाई तक पूरे राजस्थान में “शहरी सेवा शिविर-2026” आयोजित करने जा रही है। सरकार का दावा है कि इन शिविरों के जरिए आम लोगों को दफ्तरों के बार-बार चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और ज्यादातर मामलों का समाधान उसी जगह पर कर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में शुरू हो रहे इस अभियान के अंतर्गत प्रदेश के सभी नगरीय निकायों और विकास प्राधिकरणों में विशेष शिविर लगाए जाएंगे। खास बात यह है कि वर्षों से लंबित पड़े प्रकरणों को भी इस दौरान प्राथमिकता के आधार पर निपटाने की तैयारी की गई है।
पट्टे, नामांतरण और लाइसेंस के काम होंगे आसान
सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक इन शिविरों में पट्टे जारी करने, नामांतरण, जन्म और मृत्यु पंजीकरण, फायर एनओसी तथा ट्रेड लाइसेंस समेत कई जरूरी सेवाओं से जुड़े मामलों का निस्तारण किया जाएगा। जिन लोगों के आवेदन लंबे समय से अटके पड़े हैं, उन्हें भी राहत मिलने की उम्मीद है।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि शिविर स्थल पर पहुंचने वाले लोगों के मामलों को उसी दिन सुलझाने की कोशिश की जाए। नए आवेदनों और पुराने लंबित प्रकरणों, दोनों पर एक साथ काम होगा। लीज होल्ड संपत्तियों को फ्री होल्ड में बदलने से जुड़े मामले भी इस अभियान में शामिल किए गए हैं, जिनके पूरा होने का इंतजार कई लोग वर्षों से कर रहे हैं।
ब्याज और शुल्क में मिलेगी बड़ी छूट
इस अभियान का एक अहम पहलू वित्तीय राहत है। सरकार ने तय किया है कि बकाया लीज राशि एकमुश्त जमा करने वालों को ब्याज में 100 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी। कुछ मामलों में 60 प्रतिशत तक की विशेष छूट भी मिलेगी। इसके अलावा नामांतरण शुल्क में 50 प्रतिशत की राहत देने की घोषणा की गई है।
ईडब्ल्यूएस और एलआईजी श्रेणी के आवंटियों को ब्याज और शास्ति में 100 प्रतिशत तक की राहत दी जाएगी, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है। ऐसे कई परिवार हैं जिनके भूखंड, मकान या अन्य संपत्तियों से जुड़े मामले लंबे समय से फाइलों में अटके हुए हैं, और उनके लिए यह अभियान राहत का मौका माना जा रहा है।
पेंडेंसी खत्म करने पर रहेगा खास जोर
शासन सचिव रवि जैन ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि शिविरों में आने वाले सभी नए और लंबित आवेदनों का निपटारा शिविर स्थल पर ही सुनिश्चित किया जाए, ताकि लोगों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। वहीं अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक गुप्ता ने कहा कि अभियान के दौरान मिलने वाले हर प्रकरण का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण किया जाए और पेंडेंसी को शून्य रखने का प्रयास हो।
सरकार की मंशा है कि इस अभियान के जरिए लोगों को सीधे राहत मिले और नगरीय निकायों पर वर्षों से लंबित मामलों का बोझ भी कम हो। अब देखना यह होगा कि 12 जून से शुरू होने वाले ये शिविर जमीनी स्तर पर लोगों को कितनी राहत दिला पाते हैं और कितने पुराने प्रकरणों का समाधान निकल पाता है।
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