नेपाल ने पलटा अपना रुख, बोला- भारतीय आम पर नहीं लगाई कोई रोक, जानें हर साल कितने का होता है निर्यात

इसी सप्ताह की शुरुआत में नेपाल द्वारा भारतीय आम के आयात पर प्रतिबंध की खबर आई थी, लेकिन अब नेपाल सरकार ने इसका खंडन करते हुए कहा है कि आयात पर कोई रोक नहीं है, बस कुछ नियमों का पालन जरूरी होगा।

भारतीय आम उत्पादकों को बड़ी राहत देते हुए नेपाल सरकार ने अपने पहले के रुख से पलटी मार ली है। जापान की तरह नेपाल ने भी हाल ही में भारतीय आम पर प्रतिबंध लगाने की बात कही थी, लेकिन इस फैसले को दो दिन भी पूरे नहीं हुए और सरकार को अपना बयान बदलना पड़ गया। नेपाल ने अब स्पष्ट किया है कि भारतीय आमों के आयात पर किसी तरह की कोई रोक नहीं है और मांग के अनुरूप कुछ नियमों के तहत इन फलों को नेपाली बाजारों में प्रवेश की अनुमति दी गई है।

यह राहत इसलिए भी अहम है, क्योंकि नेपाल के सीमावर्ती इलाकों से हर साल बड़ी मात्रा में आम का निर्यात होता है। गौरतलब है कि गौरतलब है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है।

क्यों आई थी प्रतिबंध की खबर

नेपाल सरकार का यह स्पष्टीकरण उन रिपोर्टों के बाद आया, जिनमें वहां के अधिकारियों ने कहा था कि अत्यधिक कीटनाशक वाले भारतीय आमों के आयात को सीमित कर दिया गया है। बताया गया था कि सीमावर्ती क्षेत्रों, खासकर मधेश प्रांत में ‘क्वारंटीन’ सुविधाओं की कमी के चलते यह कदम उठाया गया है। हालांकि अब नेपाल के कृषि, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने बयान जारी कर साफ किया कि भारत से आमों के आयात पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।

प्रतिबंध नहीं, पर नियमों का पालन जरूरी

मंत्रालय के अधीन काम करने वाले ‘प्लांट क्वारंटीन एंड पेस्टिसाइड मैनेजमेंट सेंटर’ ने कहा कि विभिन्न मीडिया और सोशल मीडिया मंचों पर भारतीय आमों पर रोक से जुड़ी खबरें आने के बाद इस मामले पर उसका ध्यान गया। केंद्र ने दोहराया कि उसने भारत से आमों के आयात पर कोई पाबंदी नहीं लगाई है और मांग के आधार पर कुछ नियमों के तहत इन फलों के प्रवेश की अनुमति दी गई है।

इसका मतलब यह है कि भले ही भारतीय आम पर प्रतिबंध न हो, लेकिन निर्यातकों को तय नियमों का पालन जरूर करना होगा।

कुछ दिन पहले रोकी गई थी खेप

कुछ दिन पहले मधेश प्रांत की भिट्टामोड़ ‘क्वारंटीन’ जांच चौकी पर भारत से आई आमों की एक बड़ी खेप को फलों में हानिकारक कीटों की आशंका के कारण रोक दिया गया था। मधेश प्रांत के भूमि प्रबंधन, कृषि एवं सहकारिता मंत्रालय के प्रवक्ता मनीष कुमार पाल ने बताया कि भारतीय प्राधिकरणों द्वारा ‘प्लांट हेल्थ सर्टिफिकेट’ जारी किए जाने के बाद उस खेप को छोड़ दिया गया।

इसके बाद से ही कीटनाशक वाले आम के निर्यात पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। दरअसल, भारतीय आयात को रोकने से नेपाल के घरेलू बाजारों में किल्लत हो सकती है। यही कारण है कि इस पर रोक लगाने के बजाय कुछ शर्तों के तहत आयात की अनुमति दी गई है।

नेपाल को कितने आम का निर्यात

भारत से हर साल नेपाल को हजारों टन आम भेजा जाता है। साल 2026 में ही अब तक 2 हजार टन से भी ज्यादा आम का निर्यात नेपाल को किया जा चुका है। एक अनुमान के मुताबिक, हर साल नेपाल को करीब 40 करोड़ रुपये का आम निर्यात होता है, जिसमें खासतौर पर दशहरी और लंगड़ा जैसी प्रजातियां शामिल रहती हैं।

इससे पहले जापान सरकार ने भी भारतीय आमों के आयात पर प्रतिबंध लगाया था। जापान का कहना था कि भारतीय आमों में कीटनाशकों का उपयोग ज्यादा किया जाता है।

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